दुर्ग पुलिस की साइबर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई, 09 म्यूल बैंक खाताधारकों पर शिकंजा!
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- दुर्ग जिले में साइबर ठगी के नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए पुलिस ने ऐसे बैंक खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनके खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में किया जा रहा था।
- पुलिस के अनुसार, कमीशन के लालच में बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड अन्य लोगों को उपलब्ध कराने वाले कुल 09 म्यूल बैंक खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
- जांच में इन खातों से 05 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध राशि के लेन-देन का खुलासा हुआ है।
- आइए विस्तार से जानते हैं 👇
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर विशेष अभियान
👉पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार साइबर अपराधों में इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत थाना सुपेला, थाना भिलाई भट्ठी और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए कुल 09 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई थाना सुपेला के अपराध क्रमांक 679/2026 तथा थाना भिलाई भट्ठी के अपराध क्रमांक 63/2026 में धारा 318(2), 318(3), 318(4) बीएनएस के तहत की गई है।
बैंक खातों के तकनीकी विश्लेषण से सामने आया लेन-देन
👉पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधों से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित करने और उसकी पहचान छिपाने के लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच के दौरान बैंक खातों के लेन-देन, तकनीकी साक्ष्यों और उपलब्ध दस्तावेजों का विश्लेषण किया गया।
जांच में सामने आया कि संबंधित खाताधारकों ने कमीशन या अन्य प्रतिफल के लालच में अपने अथवा अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों से जुड़े बैंकिंग साधन दूसरे लोगों को उपलब्ध कराए थे। इन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा होने के बाद उसे आगे दूसरे खातों में स्थानांतरित किया गया।
पुलिस के अनुसार, संबंधित बैंक खातों से साइबर ठगी से जुड़ी 05 लाख रुपये से अधिक राशि का लेन-देन पाया गया है।
कमीशन के लालच में उपलब्ध कराए बैंक खाते और सिम
👉जांच में सामने आए मॉडस ऑपरेंडी के अनुसार, आरोपी बैंक खाते अथवा बैंक खातों से संबंधित पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और मोबाइल सिम कार्ड साइबर अपराधियों या उनके एजेन्टों को उपलब्ध कराते थे।
👉इन खातों में ठगी की रकम आने के बाद उसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इस प्रक्रिया के माध्यम से साइबर ठगी से प्राप्त रकम को आगे स्थानांतरित करने और उसकी वास्तविक पहचान छिपाने में मदद मिलती थी।
👉पुलिस जांच में आरोपियों को कथित तौर पर ₹2,000 से ₹15,000 तक कमीशन या प्रतिफल मिलने की बात सामने आई है।
09 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई
👉दिनांक 20 अगस्त 2026 को थाना सुपेला में 02 तथा थाना भिलाई भट्ठी में 07 आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई। थाना सुपेला — अपराध क्रमांक 679/2026
- अमन कुमार राय, उम्र 25 वर्ष, निवासी चन्द्र नगर, उमरपोटी, थाना उतई, जिला दुर्ग।
- डोमेन्द्र कुमार सिन्हा, उम्र 38 वर्ष, निवासी पांच रास्ता, चिंगरी पारा, सुपेला, जिला दुर्ग।
थाना भिलाई भट्ठी — अपराध क्रमांक 63/2026
- दिनेश कुमार देशमुख, उम्र 22 वर्ष, निवासी अग्रसेन कॉलेज, धनोरा, पदमनाभपुर, जिला दुर्ग।
- नितिश सिंह राजपूत, उम्र 28 वर्ष, निवासी स्टाफ क्वार्टर एस-05, पदमनाभपुर, जिला दुर्ग।
- विक्रम देशलहरे, उम्र 33 वर्ष, निवासी घुघसीडीह, उतई, जिला दुर्ग।
- भीष्म ध्रुव, उम्र 24 वर्ष, निवासी सेक्टर-10, सड़क 33/ए, क्वार्टर नंबर 1-डी, भिलाई नगर, जिला दुर्ग।
- के. सुनीता राव, निवासी श्रीराम चौक, खुर्सीपार, जिला दुर्ग।
- स्मीता मसीह, निवासी प्रगति नगर, रिसाली, जिला दुर्ग।
- गुनगुन देवांगन, निवासी वैशाली नगर, भिलाई, जिला दुर्ग।
बैंकिंग दस्तावेज और मोबाइल सहित सामग्री जब्त
👉कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस टीम द्वारा इन दस्तावेजों और बैंकिंग गतिविधियों के आधार पर मामले की आगे जांच की जा रही है।
पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की पहचान
👉पूरी कार्रवाई में थाना सुपेला, थाना भिलाई भट्ठी और एसीसीयू की पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने बैंक खातों के लेन-देन का विश्लेषण करने के साथ तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण किया और संबंधित खाताधारकों से जुड़ी जानकारी एकत्रित की। उपलब्ध साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन के विश्लेषण के आधार पर आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी एवं जप्ती की कार्रवाई की गई।
म्यूल बैंक खाते क्यों बन रहे हैं साइबर अपराधियों का माध्यम?
👉साइबर ठगी के मामलों में ठगी की रकम को सीधे अपराधियों के अपने बैंक खाते में रखने के बजाय कई बार दूसरे लोगों के बैंक खातों के माध्यम से घुमाया जाता है। ऐसे खातों को आम तौर पर म्यूल बैंक अकाउंट कहा जाता है।
इन खातों का इस्तेमाल रकम प्राप्त करने, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और धनराशि के वास्तविक स्रोत तक पहुंच को मुश्किल बनाने के लिए किया जा सकता है। ऐसे मामलों में केवल साइबर अपराधी ही नहीं, बल्कि जानबूझकर अपना बैंक खाता या बैंकिंग साधन उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।
दुर्ग पुलिस की नागरिकों से अपील
👉दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक अथवा मोबाइल सिम कार्ड उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी इन माध्यमों का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेन-देन के लिए कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में मूल खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
यदि किसी नागरिक को यह जानकारी मिलती है कि उसके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक या सिम कार्ड का किसी अन्य व्यक्ति द्वारा गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, तो तत्काल संबंधित बैंक, नजदीकी पुलिस थाना अथवा साइबर पुलिस को सूचना देने की अपील की गई है। साथ ही ऑनलाइन या लिखित शिकायत की प्राप्ति रसीद सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
आपका बैंक खाता, आपकी जिम्मेदारी
👉दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कमीशन के लालच में किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता या उससे जुड़े बैंकिंग साधन उपलब्ध कराना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। साइबर अपराध की रकम के लेन-देन में खाते का इस्तेमाल होने पर खाताधारक भी पुलिस जांच का सामना कर सकता है।
आपका बैंक खाता आपकी जिम्मेदारी है—कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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