सेफी की पहल: CPSE अधिकारियों के लिए चतुर्थ वेतन संशोधन समिति (PRC) गठन की मांग

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSE) में कार्यरत अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा एक बार चर्चा में आ गया है।
  • सेफी (SEFI) चेयरमेन व कार्यकारी अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार बंछोर ने केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर चतुर्थ वेतन संशोधन समिति (PRC) के शीघ्र गठन का अनुरोध किया है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

वित्त मंत्री को भेजा गया आधिकारिक अनुरोध, वेतन संशोधन की स्थापित परंपरा और आवश्यकता!

👉नेशनल कांफिडरेशन ऑफ ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधित्व में नरेन्द्र कुमार बंछोर ने वित्त मंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि CPSE अधिकारियों के लिए चतुर्थ वेतन संशोधन समिति का गठन जल्द से जल्द किया जाना आवश्यक है। इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह एक स्थापित परंपरा रही है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बोर्ड स्तर तथा उससे नीचे के कार्यपालक अधिकारियों और गैर-यूनियन पर्यवेक्षकों के लिए लगभग हर दस वर्ष में वेतन संशोधन समितियों का गठन किया जाता है। यह प्रक्रिया केवल वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें मुद्रास्फीति, बढ़ती जीवन-यापन लागत, आंतरिक समानता और निजी क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धा जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाता है।


आगामी वेतन संशोधन और समयबद्ध प्रक्रिया की जरूरत

विदित हो कि केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 25 नवंबर 2025 को किया जा चुका है और इसके द्वारा शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। साथ ही, केन्द्रीय सरकारी लोक उद्यमों के लिए चतुर्थ वेतन संशोधन 01.01.2027 से प्रभावी होना है। अतः आवश्यक है कि चतुर्थ वेतन संशोधन समिति के गठन की प्रक्रिया अग्रिम रूप से प्रारंभ की जाए, जिससे विचार-विमर्श, हितधारकों से परामर्श तथा समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु पर्याप्त समय उपलब्ध हो सके।


पिछली वेतन संशोधन प्रक्रिया का संदर्भ

👉सेफी ने वित्त मंत्री को अनुरोध करते हुए अवगत कराया कि तृतीय वेतन संशोधन समिति का गठन 9 जून 2016 को किया गया था तथा केंद्र सरकार के अनुमोदन के पश्चात सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) द्वारा 3 अगस्त 2017 को वेतन संशोधन आदेश जारी किए गए, जो 01.01.2017 से प्रभावी हुए।

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प्रतिस्पर्धी माहौल में सीपीएसई की भूमिका

वर्तमान में सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अत्यंत प्रतिस्पर्धी एवं गतिशील वातावरण में कार्य कर रहे हैं, जहाँ उन्हें घरेलू एवं वैश्विक निजी क्षेत्र की कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, ये उद्यम राष्ट्र निर्माण, अधोसंरचना विकास, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल विस्तार तथा अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


समय पर वेतन संशोधन के रणनीतिक लाभ!

सेफी ने वित्त मंत्री से निवेदन किया है कि ऐसी स्थिति में वेतन एवं भत्तों का समय पर संशोधन एक रणनीतिक आवश्यकता है, जिससे-

बोर्ड स्तर तथा बोर्ड स्तर से नीचे के स्तर पर उच्च कौशलयुक्त एवं प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करना तथा उन्हें बनाए रखना संभव हो सके।
– निजी क्षेत्र के समकक्ष उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धात्मकता एवं समानता सुनिश्चित की जा सके।
– केन्द्रीय सरकारी लोक उद्यमों की परिचालन दक्षता एवं राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति को बल मिल सके।
– विशेषकर तकनीकी एवं विशिष्ट क्षेत्रों में अनुभवी मानव संसाधन के पलायन को रोका जा सके।…


⚠️ देरी के संभावित प्रभाव

👉पीआरसी के गठन में विलंब से कार्यपालक अधिकारियों में अनिश्चितता उत्पन्न हो सकती है, जिससे प्रतिभा को बनाए रखने तथा संगठनात्मक प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब इन उद्यमों से देश की विकास यात्रा में और अधिक योगदान की अपेक्षा है।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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