SAIL सहित सभी CPSEs में “Compassionate Appointment” नीति पर लोकसभा में सरकार का बड़ा बयान
– DIGITAL BHILAI NEWS – नई दिल्ली/भिलाई – 12 अगस्त 2025
- लोकसभा में सांसद ढुल्लू महतो द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि👉🏻
- SAIL सहित मंत्रालय के अधीन सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) में अनुकम्पा नियुक्ति (Compassionate Appointment) केवल कुछ गंभीर बीमारियों या कार्यक्षमता को स्थायी रूप से प्रभावित करने वाली स्थितियों तक सीमित है।
- मंत्री ने कहा कि ‘समान गाइडलाइन’ जारी करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
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बैकग्राउंड: क्यों उठाया गया यह मुद्दा?
👉🏻अनुकम्पा नियुक्ति (Compassionate Appointment) का प्रावधान उन परिवारों के लिए राहत का जरिया है जिनके सदस्य की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से अक्षम हो जाते हैं।
👉🏻SAIL समेत कई PSUs में यह सुविधा सीमित बीमारियों — जैसे कैंसर, किडनी फेल्योर आदि — पर ही लागू होती है।
👉🏻सांसद ढुल्लू महतो ने सवाल उठाया कि अन्य गंभीर और असाध्य बीमारियों से होने वाली मृत्यु पर आश्रितों को समान अवसर क्यों नहीं दिया जाता?
👉🏻उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नीति को ‘मृत्यु के कारण’ के बजाय ‘परिवार के आर्थिक और सामाजिक प्रभाव’ के आधार पर तय किया जाए।
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लोकसभा में सवाल और सरकार का जवाब👉🏻
सांसद का सवाल:-
ढुल्लू महतो ने चार मुख्य बिंदु रखे:
1. क्या सरकार को जानकारी है कि अनुकम्पा नियुक्ति (Compassionate Appointment) केवल कुछ विशेष बीमारियों तक सीमित है?
2. क्या यह स्वीकार्य नहीं कि अन्य गंभीर बीमारियों पर भी समान अवसर मिलना चाहिए?
3. क्या सरकार नीति में बदलाव कर आर्थिक-सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता देगी?
4. क्या सभी PSUs के लिए समान गाइडलाइन जारी की जाएगी?

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सरकार का जवाब (एच. डी. कुमारस्वामी):-
मौजूदा नीति:—
- सेवा के दौरान मृत्यु या स्थायी अक्षमता पर आश्रितों को मदद का प्रावधान है।
- SAIL में अनुकम्पा नियुक्ति (Compassionate Appointment) गंभीर बीमारियों तक सीमित है,
- जो कार्य क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
वैकल्पिक सहायता:—
- अनुकम्पा नियुक्ति (Compassionate Appointment) न मिलने पर भी मृतक के परिवार को पेंशन, वित्तीय मदद, चिकित्सा सुविधाएं, बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता (scholarship) और वैकल्पिक रोजगार जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।
एकरूप नीति:—-
- सभी सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों के लिए समान गाइडलाइन जारी करने का कोई प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है।

विश्लेषण: राहत या सीमित समाधान?
👉🏻इस जवाब से साफ है कि सरकार ‘अनुकम्पा नियुक्ति’ (compassionate appointment) के दायरे को बढ़ाने के पक्ष में फिलहाल नहीं है।
👉🏻सकारात्मक पक्ष: आर्थिक सहायता और शैक्षिक सुविधाएं मिलने से कुछ हद तक बोझ कम होता है।
👉🏻सीमाएं: आश्रितों को प्रत्यक्ष रोजगार न मिलने से दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
👉🏻नीतिगत अंतर: अलग-अलग PSUs की नीतियों में फर्क से समान परिस्थितियों वाले परिवारों के साथ असमानता हो सकती है।
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निष्कर्ष:-
👉🏻लोकसभा में आया यह जवाब स्पष्ट करता है कि सरकार फिलहाल अनुकम्पा नियुक्ति नीति में बड़ा बदलाव नहीं करने जा रही।
👉🏻SAIL और अन्य PSUs में यह प्रावधान सीमित बीमारियों तक ही रहेगा, जबकि बाकी मामलों में वैकल्पिक सहायता योजनाएं लागू होंगी।
👉🏻कर्मचारी यूनियनों और आश्रित परिवारों के लिए यह संकेत है कि उन्हें निकट भविष्य में नीति बदलाव की उम्मीद कम ही रखनी चाहिए।
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✍🏻 रिपोर्ट : Digital Bhilai News
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K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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