85 यूनिट ब्लड मौजूद था, फिर भी नहीं बच सकी दीपिका की जान! जांच रिपोर्ट से मचा हड़कंप, सिविल सर्जन सहित 8 को नोटिस

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • दुर्ग जिला अस्पताल में रक्त नहीं मिलने के कारण हुई 21 वर्षीय सिकलिंग पीड़िता दीपिका की मौत के मामले में कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा गठित दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम की रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
  • जांच में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से “अक्षम्य चूक” पाए जाने पर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज सहित 8 स्वास्थ्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

खून के इंतजार में चली गई एक बेटी की जान

👉सिकलिंग बीमारी से पीड़ित 21 वर्षीय दीपिका को गंभीर हालत में दुर्ग जिला अस्पताल लाया गया था। उसे तत्काल रक्त चढ़ाने की आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल ने परिजनो को लगातार प्रक्रिया और डोनर की व्यवस्था में उलझाए रखा। समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण दीपिका की हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था।


जांच में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

👉कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया है कि घटना के समय जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ‘ओ पॉजिटिव’ ग्रुप का 85 यूनिट रक्त उपलब्ध था। इसके बावजूद दीपिका को समय पर रक्त नहीं चढ़ाया जा सका। रिपोर्ट के अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रोटोकॉल के तहत आपातकालीन स्थिति में उपलब्ध रक्त देने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जबकि मरीज की स्थिति गंभीर बनी हुई थी।


सिविल सर्जन सहित 8 कर्मचारियों को नोटिस

👉जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज सहित कुल 8 स्वास्थ्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी से 48 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। रिपोर्ट में कई स्तरों पर प्रशासनिक और कार्यप्रणाली संबंधी चूक दर्ज की गई है, जिसे जांच टीम ने “अक्षम्य चूक” की श्रेणी में माना है

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कार्रवाई पर उठने लगे गंभीर सवाल!

👉हालांकि नोटिस जारी होने के बाद भी पूरे मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। सवाल यह उठ रहे हैं कि ब्लड बैंक की तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जे.पी. मेश्राम और विभागाध्यक्ष (एचओडी) डॉ. देवेंद्र कुमार साहू को नोटिस के दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि ब्लड बैंक संचालन और उससे जुड़े निर्णयों की जिम्मेदारी सीधे तौर पर इन्हीं अधिकारियों से जुड़ी मानी जाती है।


बड़े चेहरों को बचाने की कोशिश?

👉जांच रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि जब ब्लड बैंक में पर्याप्त रक्त उपलब्ध था और पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी तय थी, तब केवल कुछ कर्मचारियों को नोटिस जारी कर क्या वास्तविक जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है? इस मामले में जवाबदेही तय करने को लेकर प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।


अब न्याय की उम्मीद!

👉दीपिका की मौत ने सिर्फ एक परिवार की खुशियां नहीं छीनीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या नहीं। सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है—जब ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त मौजूद था, तो आखिर दीपिका को समय पर एक यूनिट खून क्यों नहीं मिल सका?


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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