SAIL कर्मियों के हाथ से फिसला 39 महीने का Arrear — क्या अब कभी मिलेगा? जानें 4 संभावित रास्ते

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– DIGITAL BHILAI NEWS – (SAIL ARREAR UPDATE)

मीटिंग में बड़ा झटका: एरियर पर रोक, उम्मीदों पर विराम!

  • नई दिल्ली में 9 दिसंबर को आयोजित NJCS SUB कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में सेल प्रबंधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि कर्मियों के 39 महीनों के बकाया एरियर का भुगतान किसी भी स्थिति में संभव नहीं है।
  • इस निर्णय का तर्क उन्होंने मंत्रालय द्वारा लागू किए गए Affordability Clause पर आधारित बताया, जिसके कारण कर्मचारियों की कई महीनों से जुड़ी अपेक्षाएँ एक ही क्षण में धराशायी हो गईं।
  • बैठक में यूनियनों ने पुराने समझौते की देनदारियों पर तत्काल निर्णय की मांग की, किंतु प्रबंधन ने नए वेज रिवीजन की तैयारी का संकेत देते हुए कहा कि कंपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति में इतनी बड़ी देनदारी वहन करने की क्षमता नहीं रखती।
  • ज्ञात हो की SAIL कर्मियों का 2017 वेज रिवीजन लगभग 9 वर्षो से अधूरा है और अब बकाया एरियर की भी उम्मीद टूट गयी है…. वही दूसरी और SAIL का अधिकारी वर्ग पहले ही पर्क्स का एरियर ले चूका है। 
  • यही बात सबसे ज्यादा असंतोष और असमानता की भावना को जन्म देती है!
  • आइये विस्तार से जानते है इस मामले को👇

अफोर्डेबिलिटी क्लॉज़ क्या है और यह अड़चन इतनी बड़ी क्यों है?

👉अफोर्डेबिलिटी क्लॉज़ वह महत्वपूर्ण नीति है जिसे भारत सरकार के लोक उद्यम विभाग (DPE) ने वर्ष 2017 में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के वेतन संशोधन के लिए अनिवार्य रूप से लागू किया था, जिसके तहत किसी भी सीपीएसई को वेतन वृद्धि, एरियर और पर्क्स जैसे आर्थिक लाभ तभी देने की अनुमति होती है जब उसकी वित्तीय स्थिति इतनी सुदृढ़ हो कि वह इन देनदारियों को बिना किसी बाहरी सहायता के अपने संसाधनों से पूरा कर सके और इस प्रक्रिया में न तो संस्था पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़े और न ही उसके उत्पादों या सेवाओं की कीमतों में अनियंत्रित वृद्धि हो।

👉इस क्लॉज़ की सबसे जटिल और कर्मचारियों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण शर्त यह है कि यदि कोई सार्वजनिक उपक्रम लगातार तीन वर्षों तक घाटे में रहता है या उसकी प्रति यूनिट श्रम लागत उत्पादन क्षमता से अधिक हो जाती है तो उसे वेतन संशोधन या बकाया एरियर के भुगतान से छूट मिल जाती है, और चूँकि सरकार इस पूरी प्रक्रिया में कोई बजटीय सहयोग उपलब्ध नहीं कराती तथा अंतिम स्वीकृति मंत्रालय से लेनी होती है, इसलिए यह क्लॉज़ आज SAIL कर्मियों के 39 महीनों के एरियर के रास्ते में सबसे बड़ा अवरोध बन गया है।

Affordability Clause
Affordability Clause

क्यों टूटी कर्मचारियों की उम्मीदें और विश्वास को सबसे अधिक चोट कहाँ लगी?

👉कर्मचारियों को लगातार यह भरोसा दिलाया जाता रहा था कि बकाया एरियर किसी न किसी रूप में अवश्य दिया जाएगा क्योंकि मुख्य श्रमायुक्त तक मामले को पहुंचने के बाद सभी यूनियनों ने सकारात्मक संकेत दिए थे, और कई दौर की बैठकों में यह आश्वासन भी दिया गया था कि भुगतान रोका नहीं जाएगा बल्कि उचित समय पर जारी कर दिया जाएगा।

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👉किंतु एनजेसीएस बैठक में अचानक यह कहना कि मंत्रालय का अफोर्डेबिलिटी क्लॉज़ लागू है और कंपनी 2027 के वेज रिवीजन की तैयारी में जुटना चाहती है।

👉 कर्मचारियों को यह संदेश दे गया कि पुराने एरियर के मुद्दे को योजनाबद्ध ढंग से ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में यह भावना गहरी हो गई कि यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि विश्वास पर लगा गहरा आघात है।

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इतिहास का सबसे असामान्य कदम: 13 महीने पहले Charter of Demands क्यों?

👉सेल प्रबंधन द्वारा वेतन संशोधन प्रक्रिया शुरू होने से पूरे तेरह महीने पहले ही Charter of Demands (COD) की मांग करना अपने आप में इस बात का संकेत देता है कि पुराने एरियर के मुद्दे को समाप्त करने की तैयारी पहले से ही की जा रही है,

👉क्योंकि 2007, 2012 और 2017 के वेज रिवीज़न के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि समझौते की प्रक्रिया आरंभ होने से एक वर्ष पहले ही COD की मांग कर ली गई हो।

👉इस असामान्य कदम का उद्देश्य कर्मचारियों का ध्यान नए वेज रिवीजन की संभावनाओं की ओर मोड़ देना और पुराने एरियर की लड़ाई को कमजोर करना प्रतीत होता है, जिससे कर्मचारियों के बीच अविश्वास का स्तर और गहरा हो गया है।


क्या 39 महीने का एरियर अब भी मिल सकता है? जानिए वास्तविक संभावना

👉यद्यपि सेल प्रबंधन ने इस समय एरियर देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है, किंतु संभावनाएँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं क्योंकि मंत्रालय यदि चाहे तो DPE की नीति में उपलब्ध “exceptional situation clause” के आधार पर विशेष अनुमति प्रदान कर सकता है, मुख्य श्रमायुक्त यदि आवश्यक समझें तो प्रबंधन तथा मंत्रालय से विस्तृत जवाबदेही मांग सकते हैं।

👉फुल एनजेसीएस बैठक यदि बुलाई जाती है तो वहाँ लिए गए निर्णय अधिक बाध्यकारी होते हैं, और यदि कर्मचारी तथा यूनियनें व्यापक स्तर पर एकजुट होकर दबाव बनाते हैं तो सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है।

👉इस प्रकार तकनीकी, प्रशासनिक और आंदोलनात्मक—तीनों ही मोर्चों पर अभी भी संभावनाएँ खुली हुई हैं, यद्यपि इनका परिणाम समय, दबाव और एकजुटता पर निर्भर करेगा।

कर्मचारियों के लिए अब कौन से चार रास्ते बचे हैं?

  1. फुल एनजेसीएस बैठक बुलवाने पर दबाव बढ़ाना, क्योंकि वही बैठक अंतिम और बाध्यकारी निर्णय प्रदान कर सकती है।

  2. मुख्य श्रमायुक्त से हस्तक्षेप की मांग, ताकि अफोर्डेबिलिटी क्लॉज़ के नाम पर हो रही देरी की विस्तृत जांच की जा सके।

  3. मंत्रालय से विशेष अनुमति की मांग, जिससे एरियर भुगतान को ‘exceptional case’ के रूप में स्वीकृति मिल सके।

  4. एकजुट आंदोलन का विकल्प, जो पीएसयू इतिहास में कई बार निर्णायक साबित हुआ है और सरकार को नीतिगत पुनर्विचार के लिए बाध्य कर सकता है।


बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता का बड़ा बयान

👉बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने इस पूरी स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि प्रबंधन और एनजेसीएस नेतृत्व के बीच कहीं न कहीं एक मौन सहमति विकसित हो गई है, जिसके कारण महीनों की देरी, सीएलसी के हस्तक्षेप और लगातार बैठकों के बावजूद वेतन समझौते, एरियर, एचआरए और पर्क्स जैसे मुद्दों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

👉दत्ता ने दावा किया कि पुराने एरियर को रोककर नया वेज रिवीजन शुरू करने की यह रणनीति कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर करने और उनकी मेहनत की कमाई को कम करने का संगठित प्रयास है, तथा यदि प्रबंधन इसी रवैये पर अड़ा रहा तो बीएसपी वर्कर्स यूनियन हर स्तर पर संघर्ष के लिए तैयार है।


निष्कर्ष: लड़ाई कठिन है, पर समाप्त नहीं

👉39 महीनों का एरियर फिलहाल अवरुद्ध अवश्य हुआ है, किंतु कर्मचारियों के लिए रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं क्योंकि प्रशासनिक हस्तक्षेप, मंत्रालयीय पुनर्विचार, फुल एनजेसीएस बैठक और संभावित आंदोलन चारों ही ऐसे विकल्प हैं जिनके माध्यम से एरियर की लड़ाई आगे भी मजबूती से बढ़ाई जा सकती है, और आने वाले कुछ महीनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या SAIL और BSP कर्मचारियों को उनकी वैध देनदारी वापस दिलाई जा सकेगी या यह मुद्दा और लंबा खिंचता चला जाएगा।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़ 

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