SAIL में हर तीन महीने पर यूनियनों से अनिवार्य बैठक हो, इस्पात मंत्रालय जारी करे आदेश: बीएकेएस की बड़ी मांग
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- भारत सरकार द्वारा नए श्रम कानूनों को अधिसूचित किए जाने के बाद सेल (SAIL) में औद्योगिक संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है।
- BSP अनाधिशासी कर्मचारी संघ (BAKS) ने इस्पात मंत्रालय से मांग की है कि वित्त मंत्रालय की तर्ज पर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और उसकी सभी इकाइयों को प्रत्येक तीन माह में ट्रेड यूनियनों के साथ संस्थागत बैठक आयोजित करने का निर्देश जारी किया जाए।
- संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान होगा और प्रबंधन तथा यूनियनों के बीच संवाद एवं विश्वास मजबूत होगा।
- आइए विस्तार से जानते हैं 👇
नए श्रम कानूनों का हवाला देते हुए उठाई मांग
👉भारत सरकार द्वारा सभी श्रम कानूनों को 08 मई 2026 को अधिसूचित कर दिया गया है, जिसमें औद्योगिक संबंध संहिता 2026 भी शामिल है। इस संहिता के तहत इसके दायरे में आने वाले सभी प्रतिष्ठानों के प्रबंधन को प्रत्येक तीन माह में एक बार कर्मचारी/यूनियनों और प्रबंधन के बीच बैठक आयोजित करनी है।
👉इसी के आलोक में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अपने अधीन आने वाले सभी सरकारी बैंकों के चेयरमैन एवं सीईओ को पत्र जारी कर प्रभावी रिकॉगनाइज्ड कर्मचारी यूनियनों सहित अन्य सभी यूनियनों के साथ प्रत्येक तीन माह में बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है।
👉बीएकेएस ने इसी संदर्भ में इस्पात सचिव, श्रम सचिव तथा मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) को पत्र लिखकर मांग की है कि इस्पात मंत्रालय के अधीन आने वाले सभी सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के प्रबंधन को भी निर्देशित किया जाए कि वे अपने-अपने कारखानों में सक्रिय सभी ट्रेड यूनियनों एवं एसोसिएशनों के साथ प्रत्येक तीन माह में बैठक आयोजित करें तथा लंबित मुद्दों का समाधान करें।
वित्त मंत्रालय के पत्र में क्या कहा गया है?
👉वित्त मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि:
- विभाग के 10.07.2026 के पत्र के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सभी मान्यता प्राप्त यूनियनों एवं एसोसिएशनों के साथ औद्योगिक संबंध (IR) बैठकों को संस्थागत बनाने की सलाह दी गई थी। इसका उद्देश्य परामर्श के लिए नियमित एवं व्यवस्थित मंच उपलब्ध कराना तथा औद्योगिक संबंधों में सामंजस्य बनाए रखना था। बैंकों को ऐसी बैठकों का वार्षिक कैलेंडर पहले से जारी करने की भी सलाह दी गई थी। हालांकि देखा गया कि कई सरकारी बैंकों ने केवल बहुमत वाली यूनियनों के साथ ही बैठकें निर्धारित की हैं।
- मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस सलाह का उद्देश्य सभी यूनियनों एवं एसोसिएशनों को अपने विचार रखने का अवसर देना है, ताकि परामर्श की संस्थागत व्यवस्था विकसित हो, मुद्दों का समय पर समाधान हो तथा प्रबंधन और यूनियनों के बीच आपसी विश्वास मजबूत हो सके। हालांकि, यूनियनों की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रत्येक यूनियन के साथ अलग-अलग बैठक आयोजित करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है।
- इसी कारण सरकारी बैंकों को सलाह दी गई है कि बहुमत वाली यूनियनों के साथ नियमित आईआर बैठकों के अतिरिक्त मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक यूनियनों एवं एसोसिएशनों के साथ बातचीत के लिए प्रत्येक तिमाही में अलग से एक दिन निर्धारित किया जाए। संबंधित श्रेणी की सभी मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक यूनियनों एवं एसोसिएशनों को उसी दिन एक साथ आमंत्रित किया जा सकता है। साथ ही संशोधित कैलेंडर 05.08.2026 तक विभाग को भेजने तथा तिमाही अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बीएकेएस ने इस्पात मंत्रालय से रखीं ये प्रमुख मांगें
1. सीक्रेट बैलेट से रिकॉगनाइज्ड यूनियन का चुनाव
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड तथा उसकी सभी इकाइयों को निर्देश दिया जाए कि श्रम कानूनों के अनुरूप निश्चित अंतराल पर सीक्रेट बैलेट चुनाव के माध्यम से रिकॉगनाइज्ड यूनियन का चयन कराया जाए।
2. प्रत्येक तीन माह में अनिवार्य आईआर बैठक
सेल की सभी इकाइयों में मान्यता प्राप्त यूनियनों एवं एसोसिएशनों के साथ प्रत्येक तीन माह में कम से कम एक संस्थागत आईआर बैठक आयोजित करने का निर्देश जारी किया जाए। साथ ही ऐसी बैठकों का वार्षिक कैलेंडर पहले से जारी करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
3. अन्य पंजीकृत यूनियनों को भी मिले संवाद का अवसर
बीएकेएस ने मांग की है कि सेल प्रबंधन केवल बहुमत वाली यूनियनों तक सीमित न रहे, बल्कि मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक यूनियनों एवं अन्य पंजीकृत यूनियनों के साथ भी प्रत्येक तिमाही में अलग से बैठक आयोजित करे। इन बैठकों को वार्षिक कैलेंडर में शामिल किया जाए, निर्धारित तिथि तक इसकी जानकारी इस्पात मंत्रालय को भेजी जाए तथा मंत्रालय को नियमित तिमाही अनुपालन रिपोर्ट भी सौंपी जाए।
सेल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
👉जारी बयान में बीएकेएस के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर कुमार ने आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन के एचआर विभाग के उच्च अधिकारियों ने एक अघोषित नीति बना रखी है, जिसके तहत न तो यूनियनों के साथ बैठक की जाती है, न ही यूनियन प्रतिनिधियों से वार्ता होती है, न उनके फोन उठाए जाते हैं, न मांग पत्रों पर कार्रवाई की जाती है और न ही कर्मचारी कल्याण से जुड़े मुद्दों पर कोई प्रभावी कदम उठाया जाता है।
👉उन्होंने आरोप लगाया कि सेल में केवल अधिकारी कल्याण की नीतियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनमें पे रिवीजन, पीआरपी, मोबाइल, इंटरनेट, फर्नीचर एडवांस, लैपटॉप एडवांस और हाउस पर्क्विजिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भेदभाव को प्रदर्शित करती हैं।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

