मैत्री बाग जू को आउटसोर्स पर देने की फाइल हुई बंद, बीएसपी प्रबंधन ही खुद करेगा भिलाई के इस ऐतिहासिक जू का संचालन!
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- भिलाई के ऐतिहासिक और प्रदेश के पहले जू ‘मैत्री बाग’ को निजी एजेंसी के हवाले करने की योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।
- लंबे समय से चल रही आउटसोर्सिंग प्रक्रिया आखिरकार बंद कर दी गई है और अब भिलाई स्टील प्लांट (BSP) प्रबंधन ने खुद ही जू का संचालन जारी रखने का फैसला लिया है।
- हालांकि इस फैसले के पीछे आर्थिक दबाव, कर्मचारियों की कमी और कड़ी तकनीकी शर्तों जैसी कई बड़ी वजहें सामने आ रही हैं।
- दूसरी तरफ BSP के सेक्टर-9 अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी तेज होने से कर्मचारियों और शहरवासियों के बीच नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
- आइए विस्तार से जानते हैं 👇
कड़ी शर्तों ने बिगाड़ा आउटसोर्सिंग का पूरा प्लान
👉सूत्रों के मुताबिक BSP प्रबंधन ने मैत्री बाग के संचालन के लिए निजी एजेंसियों से रुचि मांगी थी, लेकिन जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Central Zoo Authority) की सख्त शर्तें निजी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गईं। नियमों के अनुसार वही एजेंसी संचालन कर सकती थी, जिसे मान्यता प्राप्त जू संचालन का पूर्व अनुभव हो। यही वजह रही कि कई निजी एजेंसियां शुरुआती दौर में ही रेस से बाहर हो गईं और आखिरकार पूरी प्रक्रिया को बंद करना पड़ा। बताया जा रहा है कि BSP प्रबंधन को उम्मीद थी कि आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की कमी दूर होगी और जू के रखरखाव का बोझ भी कम होगा, लेकिन तकनीकी और कानूनी अड़चनों ने योजना को आगे नहीं बढ़ने दिया।
हर साल करोड़ों का घाटा झेल रहा है मैत्री बाग
👉करीब 140 एकड़ में फैला मैत्री बाग छत्तीसगढ़ का पहला जू माना जाता है। यहां लगभग 400 वन्य प्राणी मौजूद हैं, जिनकी देखभाल, भोजन, मेडिकल सुविधा और रखरखाव पर हर साल भारी खर्च आता है। जानकारी के अनुसार जू के संचालन में सालाना करीब 4 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि टिकट और अन्य स्रोतों से केवल करीब 1.5 करोड़ रुपये की ही आय हो पाती है। यानी BSP प्रबंधन को हर साल लगभग 2.5 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।आर्थिक दबाव के बावजूद BSP प्रबंधन फिलहाल इस ऐतिहासिक जू को अपने नियंत्रण में ही रखना चाहता है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में प्रबंधन संचालन व्यवस्था को आधुनिक बनाने और खर्च कम करने के लिए नई रणनीति तैयार कर सकता है।
कर्मचारियों की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
👉मैत्री बाग में लंबे समय से कर्मचारियों की कमी की समस्या बनी हुई है। वन्य प्राणियों की देखभाल से लेकर सुरक्षा और सफाई व्यवस्था तक कई विभाग सीमित स्टाफ के भरोसे चल रहे हैं। इसी कारण आउटसोर्सिंग का विचार सामने आया था। हालांकि अब योजना रद्द होने के बाद BSP को आंतरिक स्तर पर ही नई व्यवस्था तैयार करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जू के संचालन में प्रशिक्षित और अनुभवी स्टाफ सबसे अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में अगर जल्द नई नियुक्तियां या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में संचालन संबंधी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
सेक्टर-9 अस्पताल को निजी हाथों में देने की तैयारी
👉इधर BSP के प्रतिष्ठित सेक्टर-9 अस्पताल को लेकर भी बड़ी हलचल शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार अस्पताल के संचालन को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। डिलाइट कंपनी द्वारा टेंडर का ड्राफ्ट तैयार किए जाने की खबर सामने आई है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में अस्पताल की व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि BSP प्रबंधन की ओर से इस मामले में अभी कोई आधिकारिक विस्तृत घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे सुविधाओं के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

