राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भिलाई स्टील प्लांट के प्रभारी निदेशक को जारी किया नोटिस!

– DIGITAL BHILAI NEWS –

“ST एसोसिएशन ने प्रबंधन पर लगाया भेदभाव और अनदेखी का आरोप!”

  • भिलाई स्टील प्लांट में अनुसूचित जनजाति कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने ST कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए BSP प्रबंधन को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
  • ST एसोसिएशन ने प्रबंधन पर भेदभाव, अनदेखी और कर्मचारियों के अधिकारों की उपेक्षा जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद यह मामला अब संवैधानिक अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

लंबे समय से उठाए जा रहे थे ST कर्मचारियों के मुद्दे!

जानकारी के अनुसार भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल्ड ट्राइब एम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन ने कई बार एस.सी./एस.टी. कर्मचारियों के सम्पर्क अधिकारी (Liaison Officer) के द्वारा उचित माध्यम से प्रबंधन को पत्राचार कर अपनी मांगों को/कर्मचारियों को हो रही समस्याओं को समाधान करने हेतू संवैधानिक व वैध रूप से बातों को रखा है। इसके बावजूद भी प्रबंधन के द्वारा ST एसोसिएशन के साथ जानबूझकर भेदभावपूर्ण व्यवहार, अनदेखी व पक्षपात किया जा रहा है। किसी भी पत्रों का अब तक न तो कोई लिखित प्रत्युत्तर दिया गया है न ही किसी प्रकार के कार्यवाही की जानकारी एसोसिएशन को प्रेषित की गई है/दी जाती है।


राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य से की गई थी शिकायत

बताया गया कि जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. (श्रीमती) आशा लकड़ा छत्तीसगढ़ दौरे पर आई थीं, तब ST एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। डॉ. आशा लकड़ा को राज्यमंत्री के समकक्ष दर्जा प्राप्त है। एसोसिएशन के अनुसार आयोग की सदस्य ने मामले में जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST), नई दिल्ली ने 28 अप्रैल 2026 को सेल भिलाई स्टील प्लांट के प्रभारी निदेशक को नोटिस जारी कर शिकायत के संबंध में 30 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। इस नोटिस के बाद BSP प्रबंधन और ST कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।


एसोसिएशन की शिकायत के मुख्य बिंदु

  • प्रबंधन द्वारा भिलाई स्टील प्लांट में अनुसूचित जनजाति कर्मचारियों के वैध व बी.एस.पी. क्वार्टर के नियमों का पालन करते हुए पंजीकृत व सक्रिय संगठन (भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल्ड ट्राइब एम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन) को औपचारिक मान्यता नहीं दी जा रही है।
  • ST कर्मचारियों के मुद्दों पर होनेवाली त्रैमासिक बैठकों व अन्य महत्वपूर्ण बैठकों में संगठन के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जा रहा है। जिससे ST कर्मचारियों के मुद्दे (जैसे – आरक्षण रोस्टर, प्रोमोशन में वरिष्ठता का समुचित ध्यान, स्वास्थ्य संबंधी, सुरक्षा संबंधी, वेलफेयर संबंधी इत्यादि) उचित मंच पर उठ नहीं पा रहे हैं। जिससे ST कर्मचारी प्रभावित व पीड़ित हैं।
  • रावघाट माइंस में कर्मचारियों को हो रही समस्याओं से अवगत कराने के बाद भी समस्याओं का समाधान प्रबंधन द्वारा अब तक नहीं किया गया है। जिससे कर्मचारी प्रभावित व पीड़ित हैं।
  • ST कर्मचारियों के संगठन को किसी भी प्रकार का सहयोग कार्यक्रमों हेतू एवं कार्यालय भवन की सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। जोकि भेदभावपूर्ण व्यवहार को दर्शाता है।

आयोग ने दी सिविल न्यायालय की शक्तियों के उपयोग की चेतावनी

👉आयोग ने पत्र में स्पष्ट कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो आयोग संविधान के अनुच्छेद 338A के तहत प्रदत्त सिविल न्यायालय की शक्तियों का उपयोग कर सकता है तथा संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से या प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग के समक्ष समन (summons) जारी कर सकता है।

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अनुसूचित जनजाति समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा मामला

👉राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एक सुरक्षा कवच है। जिसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों (STs) के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों तथा सुरक्षा उपायों की रक्षा, निगरानी और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है। अब आगे देखना है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अपने उद्देश्यों की पूर्ति ST एसोसिएशन के साथ किस प्रकार न्याय दिलाकर करेगी।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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