सेक्टर-6 के जर्जर क्वार्टरों में फंसे लीजधारी! 20 साल बाद भी नहीं मिला बेहतर आवास का विकल्प!

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • बीएसपी टाउनशिप में करीब दो दशक पहले अपनी मेहनत की कमाई से लाखों रुपए खर्च कर लीज पर आवास लेने वाले रिटायर संयंत्रकर्मी अब परेशानी में हैं।
  • सेक्टर-6 के 70 लीज आवासों को अनफिट घोषित किए जाने के बावजूद इनके रहवासियों को अब तक बेहतर वैकल्पिक आवास नहीं मिल पाया है।
  • जर्जर मकानों के बीच रहने को मजबूर लीजधारी अब प्रबंधन से नजदीकी और बेहतर आवास देने की मांग कर रहे हैं।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

अनफिट 70 मकानों के बदले रिसाली का प्रस्ताव, लेकिन लीजधारी संतुष्ट नहीं

👉सेक्टर-6 में बीएसपी प्रबंधन ने 70 लीज क्वार्टरों को अनफिट घोषित किया है। यूनियनों के अनुसार, इन मकानों के बदले प्रबंधन ने लीजधारियों को करीब दो किलोमीटर दूर रिसाली सेक्टर में लाइसेंस स्कीम के तहत आवास देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि लीजधारी इस विकल्प से सहमत नहीं हैं। उनकी मांग है कि उन्हें आसपास के सेक्टर में ही बेहतर आवास उपलब्ध कराया जाए। उनका तर्क है कि उन्होंने इन मकानों को लीज पर लिया था, जबकि अब उन्हें लाइसेंस स्कीम के तहत आवास देने की बात कही जा रही है। सेक्टर-6 के सभी 70 मकान एनक्यू-1 और एनक्यू-2 श्रेणी के हैं और रिसाली में प्रस्तावित मकान भी इसी ग्रेड के बताए जा रहे हैं।

इस्पात कर्मचारी सोसायटी

बारिश में भी जर्जर मकानों में रहने की मजबूरी

👉लीजधारियों के अनुसार, अब तक वैकल्पिक आवास नहीं मिलने के कारण उन्हें बारिश के मौसम में भी अनफिट घोषित मकानों में रहना पड़ रहा है। मकानों की हालत लगातार खराब हो रही है और कई जगह टूट-फूट की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में रहवासियों के सामने सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हो गया है।


दो दशक पहले 4,500 क्वार्टरों की हुई थी लीज

👉वर्ष 2000 से 2005 के बीच सेल की हाउस लीज योजना के तहत बीएसपी के करीब 4,500 क्वार्टर आवंटित किए गए थे। इस दौरान रिटायर बीएसपी कर्मचारियों ने लगभग 2 लाख से 5 लाख रुपए तक खर्च कर टाउनशिप के अलग-अलग सेक्टरों में क्वार्टर लिए थे। ये अधिकांश आवास बीएसपी के निर्माण के शुरुआती दौर यानी 1960 के दशक में बनाए गए थे। कई लीजधारियों ने बाद में अपनी ओर से लाखों रुपए खर्च कर इन मकानों का विस्तार भी कराया।

Join WhatsApp

सेक्टर-6 में उजड़ते ब्लॉक के बीच अकेले रह गए लीजधारी

👉सेक्टर-6 की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। पुराने मकानों के जर्जर होने के बाद प्रबंधन पहले ही बड़ी संख्या में क्वार्टरों को अनफिट घोषित कर चुका है और कई आवासों को डिस्मेंटल भी किया जा चुका है। कई 18 यूनिट वाले ब्लॉक में अब सिर्फ एक-दो लीज आवास ही बचे हैं। ऐसे में लीजधारियों को लगभग खंडहर में तब्दील हो चुके ब्लॉकों के बीच अकेले रहना पड़ रहा है।


खंडहरों के बीच अंधेरा, गंदगी और असामाजिक तत्वों का खतरा

👉रहवासियों के अनुसार सेक्टर-6 का बड़ा हिस्सा अब उजड़ चुका है। यहां 300 से अधिक अनफिट और कब्जे वाले आवासों को प्रबंधन सुरक्षा की दृष्टि से जमींदोज कर चुका है। कई मकानों की खिड़कियां और दरवाजे तक निकाले जा चुके हैं। इन खंडहरों में अंधेरा, गंदगी, मलबा और आवारा मवेशियों की समस्या बनी हुई है। रहवासियों का कहना है कि खाली पड़े हिस्सों में असामाजिक तत्वों की आवाजाही भी परेशानी का कारण बन रही है।


लीजधारियों की मांग—नजदीक मिले बेहतर आवास

👉लीजधारी अब प्रबंधन से जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि जर्जर मकानों के बदले ऐसा आवास दिया जाए जो न केवल बेहतर स्थिति में हो, बल्कि मौजूदा क्षेत्र के आसपास भी हो। वहीं यूनियनों का आरोप है कि निजीकरण और मुद्रीकरण की नीति के दौर में सेल की रिटेंशन और लाइसेंस स्कीम को खत्म कर क्वार्टरों को डिस्मेंटल कर जमीन बिल्डरों को देने की तैयारी की जा रही है।

फिलहाल सेक्टर-6 के इन 70 लीजधारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अनफिट घोषित किए जा चुके मकानों के बीच वे आखिर कब तक रहने को मजबूर रहेंगे और उन्हें उनके लीज अधिकारों के अनुरूप सुरक्षित एवं बेहतर आवास का विकल्प कब मिलेगा?


अगली खबर पढ़े 👉 BSP SMS-2 की SAJAG QC टीम ने HCCQC 2026 में जीता Gold Award, Safety Improvement Project को मिला सम्मान


रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *