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डॉ. तीजन बाई को सांसद विजय बघेल की भावभीनी श्रद्धांजलि, कहा— उनकी अमर कला आने वाली पीढ़ियों को करती रहेगी प्रेरित

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली पंडवानी की अमर स्वर सम्राज्ञी डॉ. तीजन बाई के निधन पर शोक की लहर है।
  • इसी क्रम में दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल उनके पैतृक ग्राम गनियारी पहुंचे, जहां उन्होंने पार्थिव शरीर के दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
  • उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई का योगदान केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

तीजन बाई


गनियारी पहुंचकर दी श्रद्धांजलि, परिजनों से की मुलाकात

👉दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ की महान लोक कलाकार, पंडवानी की अमर स्वर सम्राज्ञी, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई के ग्राम गनियारी पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर के दर्शन किए तथा पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर गहरी संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।


पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने में रहा अतुलनीय योगदान

👉सांसद विजय बघेल ने कहा कि 8 अगस्त 1956 को जन्मी डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, अथक साधना और लोककला के प्रति अटूट समर्पण से छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली, सशक्त वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया तथा भारतीय लोककला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

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भारतीय लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति

👉उन्होंने कहा कि तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय लोककला जगत और देश की सांस्कृतिक चेतना के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके स्वर में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की महक, लोकजीवन की आत्मा और हमारी सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक समाहित थी। उनका संपूर्ण जीवन लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने के लिए समर्पित रहा।


संघर्ष और समर्पण की विरासत सदैव रहेगी जीवित

👉सांसद विजय बघेल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला, उनका संघर्ष, उनका समर्पण और उनकी अमर आवाज़ सदैव लोगों के हृदयों में जीवित रहेगी। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि प्रतिभा और कठिन परिश्रम के बल पर गांव की मिट्टी से निकलकर भी विश्व के सर्वोच्च मंचों तक पहुंचा जा सकता है।


आने वाली पीढ़ियों के लिए रहेंगी प्रेरणा

👉उन्होंने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने आज अपनी एक ऐसी महान सांस्कृतिक विभूति को खो दिया है, जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी। तीजन बाई का अविस्मरणीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, लोककला और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।


जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और ग्रामीणों ने भी दी श्रद्धांजलि

👉इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों एवं ग्रामीणों ने भी नम आंखों से महान लोक कलाकार डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को नमन किया।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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