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एक युग का अंत: पंडवानी की अमर स्वर-सम्राज्ञी तीजन बाई का निधन, छत्तीसगढ़ सहित देशभर में शोक की लहर

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • भारत की लोक एवं पारंपरिक कला जगत के लिए रविवार का दिन बेहद दुखद साबित हुआ।
  • पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित महान लोक कलाकार तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
  • जानकारी के अनुसार उन्होंने रविवार तड़के लगभग 3:15 बजे एम्स रायपुर में अंतिम सांस ली।
  • उनके निधन की खबर सामने आते ही छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
  • परिवार, कलाकारों, सांस्कृतिक संस्थाओं और उनके प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

पंडवानी गायन की सबसे बड़ी पहचान थीं तीजन बाई

👉तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को गांवों की चौपाल से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और महाभारत के पात्रों को जीवंत कर देने वाली प्रस्तुति ने उन्हें विश्वभर में अलग पहचान दिलाई। वे “कापालिक शैली” की सबसे प्रमुख कलाकारों में गिनी जाती थीं। अपने पारंपरिक तंबूरे के साथ मंच पर अकेले ही भीम, अर्जुन, द्रौपदी, दुर्योधन और अन्य पात्रों का अभिनय करते हुए महाभारत की कथा सुनाना उनकी अनूठी कला थी, जिसने लाखों लोगों को वर्षों तक मंत्रमुग्ध किया।


रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस

👉प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीजन बाई का उपचार रायपुर स्थित एम्स में चल रहा था। रविवार तड़के लगभग 3 बजकर 15 मिनट पर उनका निधन हो गया। इस दुखद समाचार की पुष्टि उनकी पोती भावना ने की। उनके निधन के बाद लोककला और सांस्कृतिक जगत से जुड़े अनेक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोक संस्कृति की अपूरणीय क्षति बताया है।


ग्राम गनियारी में होगा अंतिम संस्कार

👉तीजन बाई दुर्ग जिले की अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गनियारी की निवासी थीं। जानकारी के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 5 जुलाई को उनके पैतृक गांव गनियारी के मुक्तिधाम में किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।

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देश-विदेश में बिखेरा पंडवानी का जादू

👉तीजन बाई ने अपने लंबे सांस्कृतिक जीवन में देश और विदेश के हजारों मंचों पर पंडवानी की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुतियों ने भारतीय लोक परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई। माना जाता है कि उन्होंने 1000 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। उनकी गायकी केवल लोक मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत पहचान बन गई।


मिले अनेक राष्ट्रीय सम्मान

👉भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया, जिनमें प्रमुख हैं—

  • पद्मश्री (1987)
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995)
  • पद्मभूषण (2003)
  • पद्मविभूषण (2019)

इन सम्मानों ने उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए उन्हें प्रेरणा का स्रोत बना दिया।


छत्तीसगढ़ ने खो दिया अपनी सांस्कृतिक पहचान का एक मजबूत स्तंभ

👉तीजन बाई का जाना केवल एक कलाकार का निधन नहीं, बल्कि भारतीय लोक परंपरा के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान माना जा रहा है। उन्होंने अपने संघर्ष, प्रतिभा और समर्पण के बल पर पंडवानी जैसी पारंपरिक कला को विश्व मंच तक पहुंचाया। उनकी आवाज, उनकी शैली और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। भारतीय लोक संस्कृति में उनका योगदान सदैव अमर रहेगा।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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