खेरधा में ही बनेगा CBG प्लांट, BPCL ने पूरी की 7.5 एकड़ जमीन की घेराबंदी; रोज 150 टन कचरे से बनेगा जैव ईंधन!

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • भिलाई के प्रस्तावित कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट को लेकर अब स्थिति स्पष्ट होती नजर आ रही है।
  • जामुल और कुरुद में विरोध के बाद खेरधा में चिन्हित जमीन पर ही प्लांट निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
  • नगर निगम के अनुसार खेरधा में आवंटित करीब 7.5 एकड़ जमीन के चारों तरफ BPCL द्वारा घेराबंदी का काम पूरा कर लिया गया है और अब प्लांट का निर्माण कार्य अतिशीघ्र शुरू होने की बात कही गई है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

13 मार्च 2024 को हुआ था त्रिपक्षीय समझौता

👉छत्तीसगढ़ में नगरीय ठोस अपशिष्ट से जैव ईंधन तैयार करने की योजना के तहत CBG प्लांट स्थापित करने की पहल की गई है। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) के प्रयासों से 13 मार्च 2024 को नगर पालिक निगम, CBDA और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के बीच CBG संयंत्रों की स्थापना को लेकर त्रिपक्षीय MoU किया गया था। इसके बाद भिलाई निगम, CBDA और BPCL के बीच Concession Agreement पर भी हस्ताक्षर हुए।

इस्पात कर्मचारी सोसायटी

150 टन जैविक कचरे से बनेगा 12-15 टन CBG

👉खेरधा में स्थापित होने वाले प्लांट में भिलाई के साथ दुर्ग, रिसाली, भिलाई-चरोदा, कुम्हारी, जामुल और उतई से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग किया जाएगा। निगम के मुताबिक करीब 150 मीट्रिक टन जैविक अपशिष्ट प्रतिदिन प्लांट में पहुंचाया जाएगा, जिससे लगभग 12 से 15 मीट्रिक टन प्रतिदिन जैव ईंधन (CBG) के उत्पादन की संभावना है।


करीब 60 करोड़ रुपए का निवेश करेगा BPCL

👉इस परियोजना के लिए लगभग 60 करोड़ रुपए का निवेश BPCL द्वारा किया जाएगा। निगम के अनुसार परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 30 हजार मानव दिवस प्रतिवर्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। प्लांट के पूरी क्षमता से संचालन और CBG की बिक्री होने पर प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ रुपए GST प्राप्त होने की भी जानकारी निगम ने दी है।

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जामुल और कुरुद के बाद खेरधा में पहुंची परियोजना

👉CBG प्लांट के लिए पहले जामुल क्षेत्र में जमीन का प्रस्ताव सामने आया था, जहां स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ। इसके बाद कुरुद में विकल्प तलाशा गया, लेकिन वहां भी स्थानीय महिलाओं ने प्लांट के विरोध में प्रदर्शन और चक्काजाम किया था। इसके बाद खेरधा में जमीन चिन्हित की गई। खेरधा में भी जमीन को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई थी और इसे सामुदायिक उपयोग की जमीन बताते हुए विभिन्न मुद्दे उठाए थे।


गीले कचरे से ईंधन और जैविक खाद

👉CBG प्लांट का उद्देश्य गीले एवं जैविक कचरे का उपयोग कर जैव ईंधन तैयार करना है। परियोजना से निकलने वाले सह-उत्पाद के रूप में जैविक खाद का उपयोग जैविक खेती को बढ़ावा देने में किया जा सकेगा। इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने और पर्यावरणीय स्वच्छता को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।


अब निर्माण शुरू होने का इंतजार

👉खेरधा में करीब 7.5 एकड़ जमीन पर BPCL द्वारा चारों तरफ घेराबंदी का काम पूरा किया जा चुका है। ऐसे में करीब ढाई साल पहले शुरू हुई इस परियोजना की प्रक्रिया अब निर्माण चरण की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। हालांकि, परियोजना को लेकर पहले सामने आए स्थानीय विरोध के कारण आगे की प्रक्रिया पर भी लोगों की नजर बनी रहेगी।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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