दुर्ग में UCC पर बड़ा सवाल? आदिवासी समाज ने कहा—“हमें समान नागरिक संहिता से पूरी तरह रखा जाए बाहर!
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- दुर्ग में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय परिचर्चा बैठक में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए UCC से आदिवासी समुदाय को पूरी तरह बाहर रखने की मांग उठाई।
- प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी रूढ़िगत परंपराएं, विवाह पद्धति, उत्तराधिकार व्यवस्था और जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकार संविधान की 5वीं अनुसूची तथा PESA कानून के तहत संरक्षित हैं।
- ऐसे में इन पर UCC लागू करना उनके अनुसार असंवैधानिक होगा।
- आइए विस्तार से जानते है 👇
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दुर्ग में आयोजित हुई राज्य स्तरीय परिचर्चा बैठक
👉आज 08 सितंबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय दुर्ग द्वारा लोक निर्माण विभाग के सभाकक्ष में समान नागरिक संहिता (UCC) पर राज्य स्तरीय परिचर्चा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और UCC से जुड़े अपने मंतव्य, सुझाव एवं आपत्तियां समिति के समक्ष रखीं। बैठक के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे UCC का विरोध करते हैं और आदिवासी समाज को इसकी परिधि से पूरी तरह बाहर रखा जाना चाहिए।
“UCC से आदिवासियों को पूरी तरह बाहर रखा जाए”
👉आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि उनकी रूढ़िगत परम्पराएं, विवाह पद्धति और उत्तराधिकार से जुड़ी व्यवस्थाएं लंबे समय से समुदाय की सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था का हिस्सा रही हैं। प्रतिनिधियों के अनुसार, आदिवासी समुदाय के जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकार भी संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के तहत संरक्षित हैं।
प्रतिनिधियों ने कहा कि 5वीं अनुसूची और PESA कानून के तहत आदिवासी क्षेत्रों और समुदायों के लिए विशेष प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे में UCC के दायरे में इन व्यवस्थाओं को शामिल करने से आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकार और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री के बयान का भी दिया हवाला
👉बैठक में आदिवासी नेताओं ने मुख्यमंत्री के पूर्व बयान का भी हवाला दिया। प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री जी ने स्वयं कहा था कि UCC से आदिवासी समाज बाहर रहेगा। आदिवासी प्रतिनिधियों ने शासन से मांग की कि सरकार अपने इस कथन और आश्वासन पर कायम रहे तथा इसे केवल बयान तक सीमित न रखते हुए UCC के प्रस्तावित प्रारूप में स्पष्ट कानूनी प्रावधान किया जाए।
UCC के प्रारूप में स्पष्ट प्रावधान की मांग
👉बैठक में आदिवासी समाज की ओर से प्रमुख मांग रखी गई कि समान नागरिक संहिता के प्रारूप में स्पष्ट रूप से यह लिखा जाए—
“यह संहिता अनुसूचित जनजाति समुदाय पर लागू नहीं होगी।”
प्रतिनिधियों का कहना है कि इस तरह के स्पष्ट प्रावधान से भविष्य में UCC को लेकर किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक अस्पष्टता की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी और अनुसूचित जनजाति समुदाय के मौजूदा संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
छत्तीसगढ़ में UCC को लेकर सुझाव आमंत्रित
👉छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के क्रियान्वयन की आवश्यकता का परीक्षण करने तथा तद्नुसार उक्त विधि की रूपरेखा अनुशंसित करने हेतु एक समिति का गठन किया गया है। समिति राज्य के निवासियों के व्यक्तिगत सिविल विषयों के विनियमन से संबंधित प्रचलित विधियों की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही इस महत्वपूर्ण विषय से संबंधित सभी प्रासंगिक पक्षों का समुचित परिशीलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आम नागरिकों और विभिन्न संगठनों से मंतव्य, सुझाव एवं अभ्यावेदन आमंत्रित किए गए हैं। इनमें शासकीय अभिकरण, गैर-शासकीय संगठन, सामाजिक समूह एवं समुदाय, धार्मिक संस्थाएं तथा राजनीतिक दल भी शामिल हैं।
15 अक्टूबर 2026 तक भेज सकते हैं सुझाव
👉UCC से संबंधित अपने मंतव्य, सुझाव एवं अभ्यावेदन समिति के समक्ष निर्धारित माध्यमों से प्रस्तुत किए जा सकते हैं। इसके लिए ई-मेल, वेब पोर्टल अथवा डाक के माध्यम से सुझाव भेजने की सुविधा दी गई है।
ई-मेल: ucc-chhattisgarh@cg.gov.in
वेब पोर्टल: https://ucc.cgstate.gov.in/
डाक का पता:
यूनिफॉर्म सिविल कोड समिति कार्यालय,
न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन,
रायपुर, छत्तीसगढ़ – 492001
मंतव्य, सुझाव एवं अभ्यावेदन 15 अक्टूबर 2026 अथवा उससे पूर्व प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
आदिवासी समाज की मांग से UCC पर बढ़ी चर्चा
👉दुर्ग की बैठक में आदिवासी समाज द्वारा उठाई गई मांग ने UCC को लेकर चल रही चर्चा में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और सामाजिक पक्ष को सामने रखा है। आदिवासी प्रतिनिधियों का जोर इस बात पर है कि समान नागरिक संहिता तैयार करते समय अनुसूचित जनजाति समुदाय की विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक व्यवस्थाओं तथा मौजूदा संवैधानिक संरक्षण को ध्यान में रखा जाए।
अब देखना होगा कि UCC समिति आदिवासी समाज की इन आपत्तियों और सुझावों को अपनी रिपोर्ट एवं प्रस्तावित प्रारूप में किस तरह शामिल करती है।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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