BSP Workers Union की पहल: स्वास्थ्य सुविधाओं पर सेक्टर-9 अस्पताल प्रबंधन से मैराथन बैठक, हर मुद्दे पर रखी गई विस्तार से बात-
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“सेक्टर-9 अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर मैराथन चर्चा…”
- भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सेक्टर-9 स्थित जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में मंगलवार (31 मार्च) को एक विस्तृत और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें BSP Workers Union के प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (CMO I/C ) डॉ. विनीता द्विवेदी से मुलाकात कर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जमीनी समस्याओं को विस्तार से रखा।
- बैठक में बर्न यूनिट हेड व CMO डॉ उदय कुमार व CMO डॉक्टर कौशलेंद्र ठाकुर भी मौजूद रहे।
- यह बैठक केवल औपचारिक संवाद नहीं रही, बल्कि हर मुद्दे को जिम्मेदारी के साथ, संबंधित पदाधिकारियों द्वारा विस्तार से प्रस्तुत किया गया। चर्चा का स्वर संतुलित, तथ्यों पर आधारित और समाधान केंद्रित रहा।
- आइए विस्तार से जानते हैं इस खबर को 👇

Referral सिस्टम पर अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने रखी विस्तृत बात
👉यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने सबसे अहम मुद्दों में से एक — Referral System — पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि SAIL के अन्य प्लांट्स जैसे राउरकेला, दुर्गापुर और दिल्ली में रेफरल की संख्या अधिक है, जबकि भिलाई में यह काफी कम दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जब रोबोटिक सर्जरी जैसी सुविधाएं अन्य अस्पतालों में उपलब्ध हैं, तब मरीजों को बेहतर उपचार के लिए रेफरल मिलना चाहिए। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात यह भी उठाई कि अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच रेफरल में अंतर दिखाई देता है, जिसे संतुलित किया जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई गंभीर मरीजों को भी रेफरल नहीं मिल पाता, जिससे उनके परिवारों को परेशानी होती है। मरीजों को रेफरल करने के लिए भिलाई स्टील प्लांट के समस्त यूनियनों को कई बार डॉक्टर से विवाद तक करना पड़ रहा है! गंभीर मरीजों के मामले में सभी डॉक्टर कृपया मानवता रखें और उन्हें स्वत ही रेफरल करें। उज्ज्वल दत्ता ने एक महत्वपूर्ण आंकलनात्मक पहलू भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि संयंत्र में लगभग 3000 एग्जीक्यूटिव है और लगभग 11000 वर्कर्स है, उनके बीच रेफरल के प्रतिशत (ratio) की तुलना की जाए, तो स्पष्ट रूप से अंतर दिखाई देता है। उन्होंने संकेत दिया कि एग्जीक्यूटिव वर्ग को अधिक अनुपात में रेफरल मिल रहा है, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद वर्कर्स को अपेक्षाकृत कम रेफरल मिल पा रहा है। इस पर प्रबंधन ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए समीक्षा का आश्वासन दिया।
Dialysis मशीनों की स्थिति पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित बर्मन ने दी गंभीर जानकारी!
👉अमित बर्मन ने नेफ्रोलॉजी विभाग की स्थिति पर विस्तार से बात रखते हुए बताया कि अस्पताल में मौजूद Dialysis मशीनें काफी पुरानी हो चुकी हैं। कई बार ये मशीनें अचानक शटडाउन हो जाती हैं, जिससे मरीजों को खतरे की स्थिति का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसी स्थिति में मरीजों का ब्लड रिवर्स होने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आती हैं। इस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जानकारी दी कि 7 नई Dialysis मशीनों की खरीद प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और वे आने वाले कुछ महीनों में अस्पताल में स्थापित कर दी जाएंगी।
CT Scan मशीन पर शिव बहादुर सिंह और शेख महमूद ने उठाई ठोस बात
👉कार्यकारी महासचिव शिव बहादुर सिंह ने CT Scan मशीन की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वर्तमान मशीन पुरानी हो चुकी है, जिससे मरीजों को समय पर जांच नहीं मिल पा रही है और कई बार उन्हें बाहर जाना पड़ता है। मशीन पुरानी होने के कारण बार-बार ब्रेकडाउन हो रही है जिससे गंभीर मरीज को भी इंतजार करना पड़ रहा है। इस पर CMO डॉ. विनीता द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि नई CT Scan मशीन के लिए IPO (Indent Purchase Order) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और मशीन जल्द मंगाई जाएगी, हालांकि इसमें कुछ समय लगेगा। इसके बाद कार्यकारिणी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शेख महमूद ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब तक नई मशीन नहीं आती, तब तक अस्पताल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, जैसे मरीजों को बाहर से जांच कराने की अधिकृत सुविधा दी जाए, ताकि उन्हें परेशानी न हो।
दवा रिपीट सिस्टम पर शिव बहादुर सिंह की अहम मांग
👉शिव बहादुर सिंह ने दवाओं के रिपीट सिस्टम को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पहले संयंत्र के main medical post से दवाओं की रिपीट सुविधा उपलब्ध थी, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। वर्तमान में कर्मचारियों को केवल दवा रिपीट के लिए सेक्टर-9 अस्पताल आना पड़ता है, जिससे समय की बर्बादी और भीड़ दोनों बढ़ती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि फेस रीडिंग अटेंडेंस लागू होने के बाद कर्मचारियों के पास इतना समय नहीं होता कि वे घंटों लाइन में लगकर दवा रिपीट करवा सकें। इस पर CMO ने स्पष्ट किया कि main medical post मुख्यतः आपातकालीन स्थितियों के लिए निर्धारित है, और कर्मचारियों को सेक्टर-6, सेक्टर-7, सेक्टर-1 जैसे अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से दवा रिपीट की सुविधा लेने का सुझाव दिया गया।
सेक्टर-1 में पदस्थ सेवानिवृत्त चिकित्सक द्वारा सीमित मरीज देखने की व्यवस्था को लेकर यूनियन ने जताया कड़ा विरोध!
👉यूनियन के सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि रिटायरमेंट के बाद पुनः नियुक्त किए गए मेडिसिन विभाग के जाने माने डॉक्टर केवल 10 मरीजों को ही प्रतिदिन देखते हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा कौन सा नियम या क्लॉज है जो उन्हें सीमित संख्या में मरीज देखने की अनुमति देता है? यूनियन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत आलोचना नहीं है, बल्कि सिस्टम की समस्या है। जहां कुछ रिटायर डॉक्टर काफी बेहतरीन कार्य कर रहे हैं वहीं कुछ डॉक्टर अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे है और सिर्फ गिनती के मरीज ही देख रहे हैं। जिससे प्लांट एवं कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। इस पर CMO ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई क्लॉज निर्धारित नहीं है और डॉक्टरों को पूरे 8 घंटे मरीजों को देखना है। इस पर यूनियन ने सुझाव दिया कि इस व्यवस्था को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए या संबंधित डॉक्टर को निर्देशित किया जाए।
मोतियाबिंद ऑपरेशन नियमों में राहत: अब बाहर ऑपरेशन कराने वालों को भी मिलेगा अनफिट
👉यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित बर्मन ने मोतियाबिंद (Cataract) ऑपरेशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि अब तक बाहर से ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को अपना EL (Earned Leave) उपयोग करना पड़ता था, जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता था। इसके विपरीत, सेक्टर-9 अस्पताल से ऑपरेशन करवाने पर मरीजों को अनफिट सर्टिफिकेट मिलता है, जिसके आधार पर वे कम्यूटेड लीव (Commuted Leave) का लाभ ले पाते हैं। इसी असमानता को ध्यान में रखते हुए अमित बर्मन ने मांग रखी कि बाहर से ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को भी सेक्टर-9 अस्पताल से नियमानुसार 30 से 40 दिनों का अनफिट सर्टिफिकेट प्रदान किया जाए। इस मांग को प्रबंधन द्वारा स्वीकार कर लिया गया, जिससे अब बाहर ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को भी राहत मिल सकेगी और उनका अनावश्यक अवकाश नुकसान होने से बच जाएगा।
Test Kits और OPD व्यवस्था पर मनोज डडसेना और दिलेश्वर राव ने रखी बात
👉मनोज डडसेना ने जांच (Pathology) से जुड़ी समस्याओं को विस्तार से रखते हुए बताया कि HbA1c, Thyroid और Vitamin B12 जैसी जरूरी टेस्ट किट्स की कमी बनी रहती है, जिससे मरीजों को बार-बार वापस भेजा जाता है। उन्होंने OPD में मरीजों के लंबे इंतजार, डॉक्टरों के असंतुलित शेड्यूल और वेटिंग हॉल के सही उपयोग न होने की समस्या भी उठाई। वहीं टी. दिलेश्वर राव ने गैस्ट्रो विभाग में डॉक्टरों की समय पर उपलब्धता का मुद्दा उठाया और बताया कि डॉक्टर अक्सर निर्धारित समय से देर से उपलब्ध होते हैं, जिससे मरीजों को परेशानी होती है।
नर्सिंग स्टाफ और आउटसोर्स कर्मचारियों के व्यवहार पर भी उठी आवाज
👉मनोज डडसेना और टी. दिलेश्वर राव दोनों ने नर्सिंग स्टाफ और आउटसोर्स कर्मचारियों के व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कई बार मरीजों के साथ रूखा व्यवहार किया जाता है और अपमानजनक भाषा का उपयोग होता है, जो विशेष रूप से वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए अस्वीकार्य है।
दिव्यांग कर्मचारियों की समस्याओं पर प्रदीप सिंह ने दिया सुझाव
👉प्रदीप सिंह ने दिव्यांग कर्मचारियों के लिए अस्पताल में अलग से टॉयलेट और फार्मेसी/OPD में प्राथमिकता व्यवस्था की मांग रखी। इस पर प्रबंधन ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आवश्यक सुधार करने की सहमति जताई।
अन्य महत्वपूर्ण सुझाव: एम्बुलेंस, कैंटीन और दवा वितरण
- शेख महमूद ने सुझाव दिया कि कैंटीन क्षेत्र में डॉक्टरों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए, ताकि वहां अनावश्यक भीड़ न लगे।
- यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने सेक्टर-1 और आसपास दुर्घटनाओं के लिए main medical post की एम्बुलेंस को तत्काल भेजने की मांग रखी।
- अमित बर्मन ने लंबे समय तक एक जैसी दवा लेने वाले मरीजों को 2 महीने की दवा देने का सुझाव दिया, हालांकि प्रबंधन ने इसे इन्वेंटरी सीमाओं के कारण फिलहाल संभव नहीं बताया।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे प्रमुख पदाधिकारी
👉इस बैठक में यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता के नेतृत्व में कार्यकारी महासचिव शिव बहादुर सिंह, अतिरिक्त महासचिव टी. दिलेश्वर राव, ठेका प्रकोष्ठ कार्यकारी अध्यक्ष अमित बर्मन, उप महासचिव प्रदीप सिंह, उप महासचिव विमल कांत पांडे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शेख महमूद, उप महासचिव मनोज डड़सेना, ठेका प्रकोष्ठ उप महासचिव धनंजय गिरी, उप महासचिव संदीप सिंह, युवा शाखा महासचिव दीपेश कुमार चुघ एवं कार्यकारिणी सदस्य रविन्द्र व रामचंद्र सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने स्तर पर विभिन्न विभागों और कर्मचारियों की समस्याओं को विस्तार से रखा।
निष्कर्ष: संवाद बना समाधान का माध्यम
👉यह बैठक इस बात का उदाहरण रही कि यदि समस्याओं को व्यवस्थित और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। BSP Workers Union के पदाधिकारियों ने हर मुद्दे को तथ्य के साथ रखा, वहीं अस्पताल प्रबंधन ने भी सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और आवश्यक सुधार के संकेत दिए। आने वाले समय में नई मशीनों की उपलब्धता, बेहतर प्रबंधन और संवेदनशील व्यवहार के साथ सेक्टर-9 अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

