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SAIL की मेगा विस्तार योजना: ₹1.20 लाख करोड़ का निवेश, 35 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य; 2031 तक 26 हजार रह जाएंगे कर्मचारी

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • स्टील सेक्टर में अपनी उत्पादन क्षमता और औद्योगिक ढांचे को नई ऊंचाई देने की तैयारी में जुटी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है।
  • कंपनी ने अगले तीन से चार वर्षों में लगभग ₹1.20 लाख करोड़ के पूंजी निवेश की योजना बनाई है।
  • इसके जरिए मौजूदा 20 मिलियन टन उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 35 मिलियन टन करने का लक्ष्य है।
  • इस विस्तार योजना में भिलाई, बोकारो और बर्नपुर स्टील प्लांट की अहम भूमिका होगी।
  • वहीं, दूसरी ओर कंपनी की मानव संसाधन नीति में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है, जिसके तहत वर्ष 2031 तक नियमित कर्मचारियों की संख्या घटाकर 26 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

SAIL के विस्तार की बड़ी योजना, भिलाई-बोकारो-बर्नपुर पर विशेष फोकस

👉स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ संयंत्रों के आधुनिकीकरण और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश करने जा रही है। कंपनी ने वर्तमान 20 मिलियन टन की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 35 मिलियन टन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस योजना के तहत बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट (ISP), बोकारो स्टील प्लांट (BSL) और भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा राउरकेला स्टील प्लांट (RSP) को भी संभावित विस्तार योजना में शामिल किया गया है। SAIL के चेयरमैन अशोक कुमार पांडा ने निवेशकों के साथ बातचीत के दौरान कंपनी की भावी रणनीति, उत्पादन क्षमता विस्तार, पूंजीगत निवेश, कर्मचारियों की संख्या और वित्तीय प्रदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि कंपनी अगले तीन से चार वर्षों में लगभग ₹1.20 लाख करोड़ का पूंजीगत निवेश करेगी।


ISP में विस्तार कार्य शुरू, भिलाई और बोकारो में भी आगे बढ़ रही तैयारी

👉SAIL की विस्तार परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रही हैं। चेयरमैन के मुताबिक, बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट में विस्तार का काम शुरू हो चुका है। परियोजना के महत्वपूर्ण पैकेजों के लिए ऑर्डर भी जारी किए जा चुके हैं। वहीं, बोकारो स्टील प्लांट में टेंडर प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। भिलाई स्टील प्लांट में भी जल्द ही टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। राउरकेला स्टील प्लांट के संबंध में चेयरमैन ने बताया कि वहां की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार है, जिसे सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस तरह SAIL के प्रमुख स्टील प्लांट्स में प्रस्तावित विस्तार परियोजनाओं के माध्यम से कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


चार वर्षों में ₹1.20 लाख करोड़ का निवेश, हर साल बढ़ेगा पूंजीगत व्यय

👉कंपनी ने अपनी विस्तार योजनाओं को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में भी लगातार बढ़ोतरी की रणनीति तैयार की है। चालू वित्त वर्ष के लिए SAIL ने ₹15 हजार करोड़ के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य रखा है। इसमें से पहली छमाही में कंपनी लगभग ₹5,500 करोड़ खर्च कर चुकी है। तीसरी और चौथी तिमाही में अतिरिक्त ₹9 हजार से ₹10 हजार करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष में पूंजीगत व्यय का लक्ष्य ₹20 हजार करोड़ से अधिक रखा गया है, जबकि इसके अगले वर्ष यह बढ़कर लगभग ₹25 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है। इस निवेश में बर्नपुर स्थित ISP की विस्तार परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके बाद बोकारो और भिलाई स्टील प्लांट के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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2031 तक SAIL में सिर्फ 26 हजार नियमित कर्मचारी रह जाएंगे

👉SAIL की विस्तार योजना के साथ कंपनी की मानव संसाधन नीति में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। कंपनी नियमित कर्मचारियों की संख्या में चरणबद्ध तरीके से कमी लाने की रणनीति पर काम कर रही है। चेयरमैन अशोक कुमार पांडा के अनुसार, दूसरी तिमाही के अंत तक SAIL में नियमित कर्मचारियों की संख्या लगभग 48 हजार रह गई थी। चालू वित्त वर्ष के अंत तक इसे घटाकर करीब 46 हजार करने का अनुमान है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2031 तक नियमित कर्मचारियों की संख्या को घटाकर 26 हजार करना है। इसके माध्यम से मानव संसाधन लागत पर नियंत्रण रखने और परिचालन दक्षता बढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी। इस प्रकार एक ओर कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को 20 मिलियन टन से बढ़ाकर 35 मिलियन टन करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर नियमित कर्मचारियों की संख्या में भी बड़ी कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


चालू वित्त वर्ष में 21 मिलियन टन उत्पादन की उम्मीद

👉उत्पादन के मोर्चे पर भी SAIL को चालू वित्त वर्ष में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। कंपनी इस वित्त वर्ष में लगभग 21 मिलियन टन उत्पादन हासिल कर सकती है। चेयरमैन के मुताबिक, पहली छमाही में कंपनी ने 9.33 मिलियन टन उत्पादन किया है। आमतौर पर तीसरी और चौथी तिमाही में उत्पादन एवं बिक्री का प्रदर्शन बेहतर रहता है। इसी आधार पर कंपनी को निर्धारित वार्षिक उत्पादन लक्ष्य हासिल होने की संभावना है।


आयातित कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत पर दबाव

👉SAIL के वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में आयातित कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी भी शामिल रही है। कोयले की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनी की उत्पादन लागत पर दबाव पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही में कोयले की औसत कीमत ₹21,300 प्रति टन थी, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर ₹22,930 प्रति टन हो गई। अक्टूबर महीने में यह कीमत लगभग ₹24,100 प्रति टन तक पहुंच गई। हालांकि, आगे की तिमाहियों में कोयले की कीमतों में कुछ राहत मिलने की संभावना जताई गई है। अनुमान के मुताबिक, तीसरी तिमाही में इसकी कीमत लगभग ₹23,500 प्रति टन और चौथी तिमाही में करीब ₹22 हजार प्रति टन तक आ सकती है।


स्टील की कीमतों में सुधार से बेहतर मुनाफे की उम्मीद

👉कोयले की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत पर दबाव के बीच स्टील उत्पादों की बिक्री कीमतों में सुधार कंपनी के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है। दूसरी तिमाही में लॉन्ग उत्पादों का औसत शुद्ध बिक्री मूल्य (Net Sales Realisation) ₹54,400 प्रति टन रहा, जबकि फ्लैट उत्पादों का औसत मूल्य ₹57 हजार प्रति टन दर्ज किया गया। अक्टूबर महीने में इन कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। लॉन्ग उत्पादों का औसत शुद्ध बिक्री मूल्य बढ़कर ₹58,700 प्रति टन और फ्लैट उत्पादों का ₹61,700 प्रति टन हो गया। इससे कंपनी को आगे बेहतर बिक्री मूल्य मिलने की उम्मीद है। वहीं, दूसरी तिमाही में प्रति टन EBITDA लगभग ₹8,170 रहा, जबकि पहली छमाही का औसत EBITDA ₹9,561 प्रति टन दर्ज किया गया। अत्यधिक बारिश और कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी के कारण कंपनी का प्रदर्शन प्रभावित हुआ।


SAIL के सामने विस्तार और परिचालन दक्षता की दोहरी चुनौती

👉SAIL की प्रस्तावित विस्तार योजना कंपनी के औद्योगिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत देती है। अगले तीन से चार वर्षों में ₹1.20 लाख करोड़ का पूंजी निवेश कर उत्पादन क्षमता को 35 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें भिलाई, बोकारो और बर्नपुर जैसे प्रमुख संयंत्रों की अहम भूमिका होगी। हालांकि, इस विस्तार योजना के साथ कंपनी की मानव संसाधन नीति में प्रस्तावित बदलाव भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 2031 तक नियमित कर्मचारियों की संख्या 26 हजार करने का लक्ष्य बताता है कि SAIL आने वाले वर्षों में उत्पादन विस्तार के साथ मानव संसाधन लागत और परिचालन दक्षता पर भी विशेष ध्यान देने की रणनीति अपना रही है।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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