BSP में ठेका श्रमिकों की मेडिकल जांच पर उठी बड़ी मांग! मैनपावर की कमी और दुर्घटनाओं को लेकर उज्जवल दत्ता ने उठाई आवाज

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में ठेका श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े दो अहम मुद्दे सामने आए हैं।
  • सांसद विजय बघेल के निर्देश पर बीएसपी वर्कर्स यूनियन ने ठेका श्रमिकों की मेडिकल जांच, सरकारी एवं ESI अस्पतालों की मेडिकल रिपोर्ट को मान्यता देने और संयंत्र में मैनपावर की कमी से बढ़ते कार्य दबाव का मुद्दा उठाया है।
  • यूनियन अध्यक्ष उज्जवल दत्ता ने श्रमिकों की छंटनी तत्काल बंद करने और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध कराने की मांग की है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

सांसद विजय बघेल के निर्देश पर अधिकारियों से मिला यूनियन प्रतिनिधिमंडल

👉भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत ठेका श्रमिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सांसद श्री विजय बघेल के निर्देश पर बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष श्री उज्जवल दत्ता के नेतृत्व में यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने इंडस्ट्रियल हेल्थ एवं सर्विसेज के डिप्टी डायरेक्टर श्री मनीष कुंजाम से मुलाकात की।

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प्रतिनिधिमंडल ने ठेका श्रमिकों के मेडिकल निरीक्षण, मेडिकल रिपोर्ट की मान्यता तथा संयंत्र में लगातार घटते मैनपावर के कारण बढ़ रहे कार्य दबाव और दुर्घटनाओं की आशंका सहित श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को उनके समक्ष रखा।

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत ठेका श्रमिकों का मेडिकल निरीक्षण केवल भिलाई इस्पात संयंत्र के अस्पताल तक सीमित न रखा जाए, बल्कि शासकीय अस्पताल एवं ESI अस्पताल में निर्धारित प्रक्रिया के तहत किए गए मेडिकल निरीक्षण को भी BSP में मान्यता प्रदान की जाए।

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सरकारी और ESI अस्पतालों की मेडिकल रिपोर्ट को मान्यता देने की मांग

👉बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्जवल दत्ता ने कहा कि सांसद विजय बघेल के निर्देश पर यूनियन लगातार ठेका श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और मूलभूत अधिकारों से जुड़े मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठा रही है। भिलाई इस्पात संयंत्र में हजारों ठेका श्रमिक विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं और संयंत्र के उत्पादन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

अनेक श्रमिक ऐसे कार्यों में लगे हैं, जहां उन्हें धूल, धुआं, गैस, रसायन, अत्यधिक गर्मी, शोर तथा अन्य औद्योगिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनका नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अनेक ठेका श्रमिक ESI की स्वास्थ्य सुविधा से जुड़े हुए हैं तथा उनका उपचार एवं स्वास्थ्य परीक्षण ESI अस्पताल में होता है। ऐसी स्थिति में यदि किसी श्रमिक का निर्धारित मापदंड एवं वैध प्रक्रिया के तहत मेडिकल परीक्षण ESI अथवा शासकीय अस्पताल में किया जाता है, तो उस मेडिकल रिपोर्ट को भी भिलाई इस्पात संयंत्र में मान्यता दी जानी चाहिए। इससे श्रमिकों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी और मेडिकल जांच की प्रक्रिया अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी।


मेडिकल जांच औपचारिकता नहीं, श्रमिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा का माध्यम

👉श्री उज्जवल दत्ता ने कहा कि मेडिकल जांच केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य श्रमिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और कार्यस्थल से उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान करना होना चाहिए। सरकारी एवं ESI अस्पतालों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ ठेका श्रमिकों को भी मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रमिक ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकारी अथवा ESI अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया है, तो उसकी रिपोर्ट को मान्यता देने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के साथ-साथ मेडिकल प्रक्रिया के कारण होने वाली देरी और परेशानी से भी राहत मिलेगी।


मैनपावर की कमी से बढ़ रहा काम का दबाव, दुर्घटनाओं की रोकथाम पर जोर

👉यूनियन प्रतिनिधिमंडल ने भिलाई इस्पात संयंत्र में होने वाली दुर्घटनाओं के संबंध में भी अपनी चिंता डिप्टी डायरेक्टर श्री मनीष कुंजाम के समक्ष रखी। यूनियन ने कहा कि श्रमिकों की लगातार हो रही छंटनी और मैनपावर में कमी के कारण मौजूदा श्रमिकों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर कार्यस्थल की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

उज्जवल दत्ता ने कहा कि विशेषकर ऑपरेशन एवं इलेक्ट्रिकल जैसे संवेदनशील विभागों में सुरक्षा की दृष्टि से जितने मैनपावर की आवश्यकता होती है, उतना मैनपावर उपलब्ध नहीं हो पाता है। इन विभागों में छोटी सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए इन कार्यस्थलों पर निर्धारित आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित एवं सक्षम श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि दुर्घटना होने के बाद उसके कारणों की समीक्षा करने के बजाय पहले से ही उन कारणों को दूर करना आवश्यक है, जो दुर्घटना की संभावना को बढ़ा सकते हैं। पर्याप्त मैनपावर, नियमित मेडिकल जांच, उचित सुरक्षा उपकरण और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन ही सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


श्रमिकों की छंटनी तत्काल बंद करने की मांग

👉बीएसपी वर्कर्स यूनियन ने मांग की कि श्रमिकों की छंटनी तत्काल बंद की जाए तथा जिन विभागों में मैनपावर की कमी है, वहां आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध कराए जाएं। यूनियन ने कहा कि उत्पादन का दबाव किसी भी स्थिति में श्रमिकों की सुरक्षा से ऊपर नहीं होना चाहिए।

यूनियन ने डिप्टी डायरेक्टर श्री मनीष कुंजाम से आग्रह किया कि ठेका श्रमिकों के मेडिकल निरीक्षण को BSP अस्पताल के साथ-साथ शासकीय एवं ESI अस्पतालों में भी मान्यता देने तथा संयंत्र में मैनपावर की कमी के मुद्दे पर संबंधित विभागों एवं प्रबंधन के साथ आवश्यक पहल की जाए।


श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता

👉बीएसपी वर्कर्स यूनियन ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों का स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है। सांसद विजय बघेल के निर्देश एवं मार्गदर्शन में यूनियन ठेका श्रमिकों के अधिकारों, बेहतर चिकित्सा सुविधा, पर्याप्त मैनपावर और सुरक्षित कार्यस्थल के लिए लगातार आवाज उठाती रहेगी। यूनियन ने उम्मीद जताई कि प्रबंधन इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए श्रमिक हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगा।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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