कर्मियों के मनोबल से ही उद्योग की प्रगति संभव : BSP प्रबंधन की अस्पष्टता पर सांसद विजय बघेल ने जताई चिंता

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • भिलाई इस्पात संयंत्र में संभावित स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, अनिवार्य रिटायरमेंट और कर्मचारियों की संभावित छंटनी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल का बड़ा बयान सामने आया है।
  • सांसद ने संयंत्र प्रबंधन की ओर से अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आने पर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे कर्मियों और अधिकारियों के बीच भ्रम एवं असुरक्षा का वातावरण बन रहा है।
  • उन्होंने कहा कि किसी भी उद्योग की प्रगति उसके कर्मियों के मनोबल, विश्वास और स्थिरता पर निर्भर करती है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

“भिलाई इस्पात संयंत्र देश की औद्योगिक पहचान”

👉सांसद विजय बघेल ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की औद्योगिक प्रगति का प्रतीक है। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में यहां के लाखों कर्मियों एवं अधिकारियों का वर्षों का परिश्रम, समर्पण और त्याग निहित है। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता का वातावरण बनना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विगत दिनों से संयंत्र में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति तथा 33 प्रतिशत तक संभावित छंटनी जैसी खबरें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इन गंभीर विषयों पर संयंत्र प्रबंधन द्वारा अब तक कोई स्पष्ट एवं आधिकारिक स्थिति सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच असमंजस की स्थिति निर्मित हो रही है।


उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने के बीच कर्मचारियों में बढ़ रही चिंता

👉सांसद ने कहा कि वर्तमान समय में संयंत्र के अधिकांश नियमित कर्मियों की सेवा अवधि में केवल तीन से चार वर्ष का समय शेष है। इसी दौरान संयंत्र की उत्पादन क्षमता को 7.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 10.5 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे संक्रमणकालीन दौर में यदि इस प्रकार की नीतियों या संभावनाओं को लेकर अस्पष्टता बनी रहती है, तो यह न केवल कार्यक्षमता को प्रभावित करेगा, बल्कि कर्मियों एवं अधिकारियों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी उद्योग की प्रगति उसके मानव संसाधन के उत्साह, विश्वास और स्थिरता पर निर्भर करती है और इस प्रकार का नकारात्मक वातावरण उस आधार को कमजोर करता है।


ठेका श्रमिकों की स्थिति पर भी जताई गंभीर चिंता

👉सांसद विजय बघेल ने केंद्र सरकार की श्रमिक हितैषी नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लगातार श्रमिकों के वेतन, स्वास्थ्य सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर जीवन-स्तर सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है। इसके विपरीत, संयंत्र प्रबंधन की वर्तमान कार्यप्रणाली कई मामलों में अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है। उन्होंने विशेष रूप से ठेका श्रमिकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी अनेक श्रमिकों को उनका पूरा वेतन समय पर प्राप्त नहीं हो पा रहा है। श्रम कानूनों का समुचित पालन नहीं हो रहा है तथा औद्योगिक दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं किया जा सका है। सांसद ने कहा कि ठेका श्रमिक संयंत्र की उत्पादन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, किंतु उन्हें आवश्यक सुविधाएं, सुरक्षा उपकरण, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य बुनियादी अधिकार पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। यह स्थिति न केवल श्रमिकों के हितों के विरुद्ध है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी गंभीर चिंता का विषय है।

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BSP टाउनशिप की सुविधाओं पर भी उठाए सवाल

👉सांसद विजय बघेल ने कहा कि केवल ठेका श्रमिक ही नहीं, बल्कि नियमित कर्मी एवं अधिकारी भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। संयंत्र की टाउनशिप, जो कभी अनुकरणीय मानी जाती थी, आज अनेक समस्याओं से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, पेयजल, सड़कों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं एवं अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। इन बुनियादी मुद्दों पर ध्यान दिए बिना किसी भी बड़े औद्योगिक लक्ष्य की प्राप्ति अधूरी ही रहेगी।


“संवाद, पारदर्शिता और विश्वास ही सफलता का आधार”

👉सांसद ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और सामाजिक भावना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। यहां के कर्मियों और स्थानीय जनता के बीच एक आत्मीय संबंध है, जिसे बनाए रखना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। ऐसे में संवादहीनता और दबाव की नीति अपनाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संयंत्र की उन्नति के लिए सभी पक्षों — प्रबंधन, कर्मियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों — को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। केवल दबाव, भय या अनिश्चितता का वातावरण बनाकर किसी भी उद्योग को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इससे असंतोष और निराशा उत्पन्न होती है, जिसका सीधा असर उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ता है।


कर्मचारियों के हितों की रक्षा का दिया भरोसा

👉सांसद विजय बघेल ने संयंत्र प्रबंधन से आग्रह किया कि वह तत्काल प्रभाव से इन सभी विषयों पर अपनी स्पष्ट और पारदर्शी नीति सार्वजनिक करे, ताकि कर्मियों एवं अधिकारियों के बीच व्याप्त भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। उन्होंने कहा कि संवाद, पारदर्शिता और विश्वास ही किसी भी बड़े संगठन की सफलता के आधार स्तंभ होते हैं और इन्हें सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है। अपने बयान के अंत में सांसद विजय बघेल ने आश्वस्त किया कि यदि संयंत्र के कर्मियों एवं अधिकारियों के हितों को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाने का प्रयास किया जाता है, तो वे क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के रूप में उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर संभव मंच पर अपनी आवाज बुलंद करेंगे और आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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