भिलाई-दुर्ग में अंबेडकर जयंती की गूंज: भव्य आयोजन, भंडारा और डोम शेड उद्घाटन ने बढ़ाई सामाजिक एकता की चमक!

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • भिलाई-दुर्ग में इस बार डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक एकता, सम्मान और जागरूकता का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई।
  • छत्तीसगढ़िया महार समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जहां श्रद्धा, सम्मान और उत्सव का अद्भुत संगम नजर आया।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

भव्य आयोजन के साथ मनाई गई अंबेडकर जयंती

👉छत्तीसगढ़िया महार समाज, भिलाई-दुर्ग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह से भव्यता और अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम स्थल को नीले और सफेद रंग की सजावट से सजाया गया, जो अंबेडकर विचारधारा के प्रतीक रंगों को दर्शाता है। बड़ी संख्या में समाज के लोग, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे इस आयोजन में शामिल हुए, जिससे पूरे वातावरण में उत्साह और गर्व की भावना स्पष्ट दिखाई दी।


भंडारा और सामाजिक एकजुटता का संदेश!

👉इस विशेष अवसर पर समाज की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया। यह केवल भोजन का आयोजन नहीं था, बल्कि सामाजिक समानता और भाईचारे का प्रतीक भी था। कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि बाबा साहब के विचार आज भी समाज को जोड़ने और समानता की दिशा में आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं


डोम शेड उद्घाटन: विकास की नई पहल

👉कार्यक्रम के दौरान भवन के प्रथम तल पर निर्मित डोम शेड की छत का उद्घाटन भी किया गया। यह निर्माण कार्य समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे भविष्य में बड़े कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों के आयोजन में सुविधा मिलेगी। इस पहल को समाज के विकास और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया।

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मुख्य अतिथियों ने किया बाबा साहब के योगदान का स्मरण

👉कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इन्द्रजीत सिंह (अध्यक्ष, सर्व कल्याण समिति) उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बंटी गिरिवर साहू (सभापति, नगर पालिका निगम भिलाई) ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके अलावा क्षेत्र के कई पार्षद जैसे भोजराम सिन्हा (वार्ड 17), संतोष मौर्या (वार्ड 15), लाल चंद वर्मा (वार्ड 18) और केशव चौबे (वार्ड 16) भी मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान, विशेष रूप से भारतीय संविधान निर्माण में उनकी भूमिका को याद किया और उनके विचारों को आज के समय में और भी प्रासंगिक बताया।


महिलाओं और समाज के लोगों की बड़ी भागीदारी

👉इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं की बड़ी और सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कुसुम सिप्पी, विद्या, सारिता, अचला सहित कई महिलाओं ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं समाज के अध्यक्ष दीपक सहारे, यशवंत लावुत्रे, नितेश लावुत्रे, हीरासिंग, राजेश, संतोष, पृथ्वी और अनिल सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।कार्यक्रम का संचालन उपाध्यक्ष अजय तामुरिया द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया।


अंबेडकर जयंती: क्यों है यह दिन इतना महत्वपूर्ण?

पहलू विवरण
जन्म तिथि 14 अप्रैल 1891
योगदान भारतीय संविधान के निर्माता
प्रमुख विचार समानता, न्याय और शिक्षा
महत्व सामाजिक सुधार और दलित अधिकारों की आवाज

विश्लेषण: समाज में बढ़ती जागरूकता और एकता का संकेत!

👉भिलाई-दुर्ग में इस तरह के आयोजन यह दर्शाते हैं कि अब समाज केवल परंपराओं को निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास और संगठन की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। डोम शेड का निर्माण और उसका उद्घाटन यह बताता है कि समाज अपनी संरचनात्मक मजबूती पर भी ध्यान दे रहा है। वहीं बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह संकेत देती है कि बाबा साहब के विचार आज भी लोगों को जोड़ने की ताकत रखते हैं।


परंपरा से प्रगति की ओर बढ़ता समाज

👉अंबेडकर जयंती का यह आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संदेश है कि समाज अब जागरूक, संगठित और विकास की ओर अग्रसर है। भिलाई-दुर्ग का यह आयोजन आने वाले समय में अन्य समाजों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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