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स्पैम और फर्जी कॉल्स पर लगेगी लगाम? 1 नवंबर से बदल सकता है फोन पर कॉल आने का अंदाज

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • मोबाइल पर आने वाली फर्जी कॉल्स, लोन के झांसे और बैंक अधिकारी बनकर ठगी करने वालों से परेशान लोगों के लिए कॉलर नेम डिस्प्ले (CNAP) सेवा अहम साबित हो सकती है।
  • इस व्यवस्था के तहत अनजान नंबर से कॉल आने पर फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम दिखाने का प्रावधान है।
  • इसका उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान को अधिक विश्वसनीय बनाना और टेलीकॉम सेवाओं में धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले (CNAP) सेवा?

👉अब तक अनजान नंबरों से आने वाली कॉल की पहचान के लिए लोग Truecaller जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स पर निर्भर रहते हैं। इन ऐप्स पर कई बार गलत नाम भी दिखाई देते हैं। CNAP व्यवस्था में कॉल करने वाले का नाम टेलीकॉम कंपनी के रिकॉर्ड और सिम खरीदते समय दिए गए KYC दस्तावेजों के आधार पर दिखाया जाएगा।

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1 नवंबर से क्या बदलेगा?

👉1 नवंबर 2026 से देशभर में कॉलर नेम डिस्प्ले (CNAP) सेवा अनिवार्य किए जाने की बात कही गई है। इस व्यवस्था के तहत:

  • अनजान नंबर की पहचान: कॉल आने पर स्क्रीन पर नंबर के साथ संबंधित व्यक्ति का आधिकारिक नाम दिखाई देगा।
  • सेव किए गए नंबर: यदि नंबर फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव है, तो सेव किया गया नाम ही दिखेगा।
  • बिजनेस कॉल्स: पात्र व्यावसायिक संस्थान निर्धारित नियमों के तहत अपने अधिकृत ट्रेड नेम का इस्तेमाल कर सकेंगे।
  • आधुनिक नेटवर्क: रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्था 4G और 5G नेटवर्क पर लागू की जा रही है।

बिजनेस कॉल्स और प्राइवेसी के लिए क्या हैं नियम?

👉व्यावसायिक संस्थानों को अपने सामान्य नाम के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकृत ट्रेड नेम प्रदर्शित करने की सुविधा दी जा सकती है। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक होगा। वहीं, प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कॉलिंग नेम से जुड़ी जानकारी के सुरक्षित प्रबंधन और शिकायतों के समाधान पर भी जोर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन उपयोगकर्ताओं ने निर्धारित नियमों के तहत नाम प्रदर्शित न करने की सुविधा ली है, उनका नाम स्क्रीन पर नहीं दिखाया जाएगा।

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क्या फर्जी कॉल्स और ऑनलाइन ठगी पर लगेगी रोक?

👉CNAP सेवा से अनजान नंबरों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिससे संदिग्ध कॉल्स को लेकर लोग अधिक सतर्क रह सकेंगे। हालांकि, केवल नाम दिखाई देने से हर फर्जी कॉल या साइबर ठगी को रोक पाना संभव नहीं है। ठग किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग भी कर सकते हैं। इसलिए किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी, OTP या निजी विवरण साझा करने से बचना जरूरी है।

नोट: 1 नवंबर 2026 से सेवा की अनिवार्यता और लागू होने की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित आधिकारिक टेलीकॉम निर्देशों से की जानी चाहिए।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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