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सेल कर्मचारियों के मुद्दे: वर्षों से लंबित 40 से अधिक मांगों पर BAKS ने व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल!

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • सेल गैर-कार्यपालक कर्मचारियों से जुड़े 40 से अधिक मुद्दे पिछले एक-दो दशक से लंबित है।
  • BAKS सहित सेल की विभिन्न यूनियनों ने इन मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर इस्पात मंत्रालय, सेल प्रबंधन, श्रम विभाग और जनप्रतिनिधियों तक लगातार पत्राचार किया तथा दस्तावेज और सबूत भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन आज तक किसी भी फोरम से किसी मुद्दे का समाधान नहीं हुआ।
  • यूनियन के अनुसार, लगातार आश्वासनों और पत्राचार के बावजूद समाधान नहीं निकलना पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

40 से अधिक मुद्दे वर्षों से लंबित

👉सेल गैर कार्यपालक कर्मियों के 40 से अधिक मुद्दे एक दो दशक से लंबित है जिसको लेकर सेल की यूनियनो ने प्रधानमंत्री कार्यालय, इस्पात मंत्री, इस्पात राज्य मंत्री, इस्पात सचिव, संयुक्त सचिव, इस्पात मंत्रालय के सेल डिवीजन, सेल चेयरमैन, निदेशक कार्मिक, निदेशक प्रभारी, अधिशासी निदेशक, मुख्य महाप्रबंधक, मुख्य श्रमायुक्त (कें.), उप मुख्य श्रमायुक्त, सहायक श्रमायुक्त, श्रम मंत्री, श्रम सचिव, डीपीई मंत्री, डीपीई सचिव, इस्पात नगरो से जुड़े सांसद, विधायक, इस्पात संसदिय कमिटी तक को नियमित मांग सह शिकायत पत्र लिखा। कई बार यूनियन प्रतिनिधियों ने खुद उच्च अधिकारियो से मिलकर सभी दस्तावेज के साथ मुद्दो को रखा।

👉अपने मांग के समर्थन में तथा सेल प्रबंधन की गलतियों को उजागर करने हेतु दस्तावेज रुपी सबुत भी दिया। लेकिन किसी भी फोरम से आज तक किसी भी मुद्दे का हल नही किया गया।


समाधान नहीं मिलने पर कोर्ट की शरण

👉अंत में विवश होकर बीएकेएस सहित सभी यूनियनो ने कई मुद्दे को कोर्ट में केस किया है जिस पर सुनवाई जारी है। यूनियन के अनुसार, यह पुरी व्यवस्था भारतीय ब्युरोक्रेशी तथा विधायिका, इस्पात मंत्रालय की गलत कार्यप्रणाली को प्रकट कर रहा है।

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इस्पात मंत्रालय और सेल डिविजन की कार्यप्रणाली पर सवाल

👉बीएकेएस के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर कुमार के अनुसार इस्पात मंत्रालय सभी पत्रो को सेल डिविजन को भेजकर कोरम पुरा कर देता है तो सेल डिविजन सेल कॉर्पोरेट कार्यालय को भेजकर अपना कर्तव्य निभाने का अभिनय करता है। सेल डिविजन सेल कॉर्पोरेट से जवाब तो मांगता है परंतु आज तक उसका सकारात्मक परिणाम या रिजल्ट कही दिखा नही है। कही भी कोई भी जवाबदेही लेने को तैयार नही है।


श्रम विभाग की जांच पर भी उठाए सवाल

👉वही मुख्य श्रमायुक्त कार्यालय से स्थानीय ऊप मुख्य श्रमायुक्त कार्यालय को पत्र फॉरवार्ड कर मामले की जाँच करने तथा यूनियन को जानकारी देने का फरमान दिया जाता है परंतु आज तक क्या जाँच हुई, यह सार्वजनिक नही किया गया तथा कोई भी जाँच रिपोर्ट को यूनियन से भी साझा नही किया गया।

यूनियन का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में शिकायतों और मांगों के वास्तविक समाधान के बजाय पत्रों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भेजने की प्रक्रिया ही की जा रही है।


भारतीय सिस्टम की वर्तमान खाँमियाँ

👉बीएकेएस ने अपनी बात रखते हुए वर्तमान व्यवस्था में कई खामियों को प्रमुखता से सामने रखा है—

  1. यूनियन के पत्रो का जवाब नही देना
  2. मांग पत्रो या शिकायतो पर कोई कारवाई नही करना।
  3. मंत्रियों, अधिकारियों द्वारा मिलने का समय नही देना।
  4. प्रधानमंत्री कार्यालय में किए गए शिकायतो का भी गलत या गुमराह भरा जवाब देकर केस को बंद कर देना तथा जानबुझ कर प्रथम अपील का विकल्प नही देना।
  5. RTI से भी गलत जानकारी देना।
  6. आम जन मानस की शिकायतो को निपटारे हेतु कोई प्रबंध नही करना।

BAKS के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर कुमार का बयान

“सेल के संदर्भ मे मेरा अभी तक का यही अनुभव है कि सेल भले ही कागज पर अंडर दी मिनस्ट्री ऑफ स्टील की पीएसयु है परंतु वास्तविक तौर पर मिनिस्ट्री ऑफ स्टील अंडर दी सेल है । इतने पत्र, दस्तावेज तथा सबुत देने के बावजुद मंत्रालय की चुप्पी मेरे इस कथन को मजबुत कर रहे है।”

— रणधीर कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष (बीएकेएस)


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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