दीपिका मौत मामला: संविदा लैब टेक्नीशियन बर्खास्त, लेकिन सिस्टम के बड़े चेहरे अब भी बेदाग?
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- दुर्ग। दुर्ग जिला अस्पताल में सिकलिंग पीड़िता दीपिका की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए ड्यूटी पर तैनात संविदा लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।
- विभाग ने उन पर ड्यूटी के दौरान संवेदनशीलता नहीं दिखाने और कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद भी पूरे मामले को लेकर कई गंभीर सवाल बरकरार हैं,
- क्योंकि जांच समिति द्वारा कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने के बावजूद अब तक किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है।
85 यूनिट ब्लड मौजूद था, फिर भी नहीं बच सकी दीपिका
👉यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब सिकलिंग से पीड़ित 22 वर्षीय दीपिका गाड़ा को गंभीर हालत में दुर्ग जिला अस्पताल लाया गया था। जांच में सामने आया कि घटना के समय ब्लड बैंक में ‘ओ पॉजिटिव’ ग्रुप का 85 यूनिट रक्त उपलब्ध था, लेकिन इसके बावजूद दीपिका को समय पर रक्त नहीं मिल सका। आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं होने और समय पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन नहीं किए जाने के कारण उसकी मौत हो गई।
जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
👉घटना के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा गठित दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। जांच में सिविल सर्जन, आरएमओ, ब्लड बैंक प्रभारी सहित कई स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी। इसके बाद कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए।
कार्रवाई सिर्फ संविदा कर्मचारी तक सीमित?
👉स्वास्थ्य विभाग की ताजा कार्रवाई में संविदा लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। लेकिन इस निर्णय के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब जांच रिपोर्ट में कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका सामने आई थी, तब कार्रवाई केवल एक संविदा कर्मचारी तक ही क्यों सीमित रही।
ब्लड बैंक प्रभारी को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारी
👉इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जे.पी. मेश्राम को लेकर हो रही है। जांच समिति द्वारा उनकी भूमिका पर सवाल उठने के बावजूद उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत उन्हें पूरे जिले की रक्त वितरण व्यवस्था की निगरानी और डेथ ऑडिट जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब भी जवाब का इंतजार
👉दीपिका की मौत को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या जिम्मेदार चिकित्सक पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में यह मामला केवल एक संविदा कर्मचारी की बर्खास्तगी तक सीमित रहेगा या फिर जांच रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। दीपिका के परिजन और आम जनता अब भी यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर 85 यूनिट रक्त उपलब्ध होने के बावजूद एक युवती की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी और इस चूक की वास्तविक जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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