एसआरयू भिलाई में राजभाषा हिंदी की प्रासंगिकता पर कार्यशाला, डॉ. सुधीर शर्मा ने बताया हिंदी को आगे बढ़ाने का मंत्र
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- बदलते वैश्विक परिदृश्य और बहुभाषी कार्य संस्कृति के बीच राजभाषा हिंदी की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सेल रिफ्रेक्ट्री यूनिट (एसआरयू), भिलाई में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
- “वर्तमान समय में राजभाषा हिंदी की प्रासंगिकता” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व, उसके प्रचार-प्रसार तथा सरकारी संस्थानों में उसके व्यापक उपयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
- कार्यशाला में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ठेका श्रमिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
- आइए विस्तार से जानते हैं 👇

मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए डॉ. सुधीर शर्मा
👉सेल रिफ्रेक्ट्री यूनिट, भिलाई में दिनांक 30 मई 2026 को “वर्तमान समय में राजभाषा हिंदी की प्रासंगिकता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाप्रबंधक (एसआरयू, भिलाई)-मा.संसा. श्री होमन कुमार साहू ने की। कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री साहू ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया।

एसआरयू में हिंदी के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों की दी जानकारी
👉श्री मधुसुधन राव, उप महाप्रबंधक (मा.संसा./विद्युत/राजभाषा) ने अपने स्वागत भाषण में डॉ. सुधीर शर्मा को एसआरयू भिलाई में किए जा रहे हिंदी संबंधी कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मुख्य महाप्रबंधक श्री विशाल शुक्ल के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संयंत्र ने नई उपलब्धियां हासिल की हैं तथा नराकास स्तर पर कई पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं।
👉श्री राव ने डॉ. सुधीर शर्मा के व्यक्तित्व और योगदान का परिचय देते हुए बताया कि उन्होंने दो विषयों में पीएचडी की है तथा वे विगत 30 वर्षों से हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति की सेवा में सतत कार्यरत हैं। इस दौरान वे छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के संचालक सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए वे 30 से अधिक देशों की सांस्कृतिक यात्राएं भी कर चुके हैं तथा हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा में अनेक पुस्तकें लिख चुके हैं।
“हमें हमारी राजभाषा कितनी आती है, यह मायने रखता है”
👉अपने विस्तृत उद्बोधन में डॉ. सुधीर शर्मा ने हिंदी की अहमियत बताते हुए कहा कि “हमें कितनी भाषाएँ आती हैं, यह मायने नहीं रखता बल्कि हमें हमारी राजभाषा कितनी आती है, यह मायने रखता है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि हमें हमारी राष्ट्रभाषा को आगे बढ़ाना है तो इसकी शुरुआत बैंक जैसी सरकारी संस्थाओं से करनी होगी। उन्होंने कहा कि हमें केवल हिंदी में बोलने और लिखने की शुरुआत करनी है तथा इसे निरंतर आगे बढ़ाना है। डॉ. शर्मा ने हिंदी भाषा के उपयोग को अत्यंत लाभदायक बताते हुए कहा कि हिंदी इतनी सरल भाषा है कि वह जैसे बोली जाती है, वैसे ही लिखी भी जाती है।
डॉ. शर्मा से सीखने को मिला बहुत कुछ: होमन कुमार साहू
👉कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री होमन कुमार साहू ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. सुधीर शर्मा जैसे विलक्षण प्रतिभा संपन्न व्यक्ति से इतने कम समय में भी बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन कर्मचारियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्मृति चिन्ह भेंट कर किया सम्मान
👉कार्यक्रम के समापन अवसर पर एसआरयू, भिलाई की ओर से श्री होमन कुमार साहू द्वारा मुख्य अतिथि डॉ. सुधीर शर्मा को स्मृति स्वरूप भेंट प्रदान की गई। इस दौरान डॉ. शर्मा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए एसआरयू प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि “हिन्दी भाषा को अग्रणी बनाने हेतु कुछ अंतराल में इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए, जिससे संयंत्र की उत्कृष्टता और निखरेगी।”
अधिकारियों, कर्मचारियों और श्रमिकों की रही सहभागिता
👉कार्यक्रम में एसआरयू के अधिकारी, कर्मचारी एवं ठेका श्रमिक वर्ग के सभी लोगों की सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यशाला के दौरान राजभाषा हिंदी के महत्व, उसके प्रभावी उपयोग तथा कार्यस्थल पर हिंदी को बढ़ावा देने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

