SRU के “स्वर्णिम भविष्य” की बड़ी तैयारी! कार्यपालक निदेशक पी. के. रथ के दौरे में जॉइंट वेंचर पर मंथन
– DIGITAL BHILAI NEWS –
“यूनियनों के साथ हाईलेवल बैठक में खुला भविष्य का रोडमैप, बड़े जॉइंट वेंचर और कर्मचारियों के हितों पर हुई अहम चर्चा..”
- भिलाई में सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट (SRU) को लेकर एक महत्वपूर्ण और भविष्य तय करने वाली बैठक आयोजित की गई, जिसने कर्मचारियों से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
- Steel Authority of India Limited की सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट के कार्यपालक निदेशक पी. के. रथ के भिलाई दौरे के दौरान एसआरयू के भविष्य, बड़े जॉइंट वेंचर मॉडल, उत्पादन क्षमता विस्तार और कर्मचारियों के हितों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
- बैठक में प्रबंधन और यूनियनों के बीच सकारात्मक संवाद देखने को मिला, जहां आने वाले वर्षों में एसआरयू को देश की अग्रणी रिफ्रैक्टरी इकाइयों में शामिल करने की दिशा में योजनाओं पर मंथन किया गया।
- आइए विस्तार से जानते है 👇

भिलाई दौरे के दौरान हुई उच्च स्तरीय बैठक!
👉Steel Authority of India Limited की सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट (एसआरयू) के कार्यपालक निदेशक पी. के. रथ का भिलाई दौरा काफी महत्वपूर्ण एवं भविष्य की दृष्टि से ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस दौरान उन्होंने Bhilai Steel Plant के डायरेक्टर इंचार्ज चितरंजन महापात्रा एवं कार्यपालक निदेशक राकेश कुमार के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट की वर्तमान स्थिति, उत्पादन क्षमता, भविष्य की योजनाओं एवं प्रस्तावित जॉइंट वेंचर को लेकर विस्तृत चर्चा की।
👉इसके पश्चात एसआरयू प्रबंधन एवं विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसआरयू के मुख्य महाप्रबंधक विशाल शुक्ला सहित सभी वरिष्ठ महाप्रबंधक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
“स्वर्णिम युग” की शुरुआत बन सकता है प्रस्तावित जॉइंट वेंचर
👉बैठक के दौरान कार्यपालक निदेशक पी. के. रथ ने यूनियन प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट आने वाले समय में एक बड़े जॉइंट वेंचर की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो एसआरयू के लिए “स्वर्णिम युग” की शुरुआत साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल भिलाई ही नहीं बल्कि देश के रिफ्रैक्टरी उद्योग के लिए भी एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम होगा। उन्होंने बताया कि रिफ्रैक्टरी उद्योग अत्यंत चुनौतीपूर्ण उद्योगों में से एक है। इस क्षेत्र में उपयोग होने वाले अधिकांश महत्वपूर्ण रॉ मटेरियल विदेशों से आयात करने पड़ते हैं, जिनकी उपलब्धता सीमित एवं लागत अत्यधिक होती है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों एवं आयात पर निर्भरता के कारण उत्पादन लागत लगातार बढ़ती रहती है। इसके अतिरिक्त रिफ्रैक्टरी निर्माण में उपयोग होने वाली आधुनिक मशीनरी एवं उन्नत तकनीक भी देश में सीमित रूप से उपलब्ध है, जिसके कारण इस प्रकार के प्लांट को लगातार प्रतिस्पर्धी बनाए रखना आसान नहीं होता।
सरकार और सेल प्रबंधन मिलकर तैयार कर रहे बड़ा मॉडल
👉पी. के. रथ ने कहा कि इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार एवं सेल प्रबंधन कुछ बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर मॉडल पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह योजना अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। प्रस्तावित जॉइंट वेंचर के लागू होने के बाद एसआरयू भिलाई में सेल की विभिन्न इकाइयों, भिलाई इस्पात संयंत्र तथा देश के अन्य बड़े उद्योगों के लिए बड़े पैमाने पर रिफ्रैक्टरी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे वर्तमान समय में रिफ्रैक्टरी उत्पादों की बढ़ती मांग एवं सप्लाई संबंधी समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इस नई परियोजना के माध्यम से एसआरयू देश की अग्रणी रिफ्रैक्टरी इकाइयों में शामिल हो सकता है। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ेगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
कर्मचारियों को मिलेगा विकल्प, यूनियन ने जताया समर्थन
👉पी. के. रथ ने कहा कि जॉइंट वेंचर लागू होने के बाद वर्तमान में सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट में कार्यरत नियमित कर्मियों को यह विकल्प दिया जाएगा कि वे सेल में बने रहना चाहते हैं अथवा जॉइंट वेंचर में कार्य करना चाहते हैं। यह निर्णय पूरी तरह कर्मचारियों की व्यक्तिगत इच्छा एवं सहमति पर आधारित होगा। बैठक में उज्ज्वल दत्ता ने यूनियन की ओर से अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि जॉइंट वेंचर के माध्यम से एसआरयू को नई पहचान, आधुनिक तकनीक एवं आर्थिक मजबूती मिलती है तो यूनियन इसका स्वागत करेगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अपनी इच्छा के अनुसार सेल अथवा जॉइंट वेंचर में कार्य करने का अधिकार देना सकारात्मक एवं स्वागत योग्य कदम है।
ठेका श्रमिकों के हित और सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
👉बैठक में उपस्थित SRU यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से ठेका श्रमिकों के हितों एवं सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यूनियन किसी भी प्रकार की छंटनी को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि वर्षों से कार्य कर रहे ठेका श्रमिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी प्लांट को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए उनके रोजगार एवं भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित जॉइंट वेंचर को धरातल पर आने में अभी लगभग दो से तीन वर्षों का समय लग सकता है। ऐसे में वर्तमान समय में प्लांट के नियमित मेंटेनेंस, मशीनों की सुरक्षा, कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था एवं उत्पादन की निरंतरता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि प्लांट सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संचालित होता रहे।
तकनीकी और श्रमिक हितों से जुड़े विषयों पर भी हुई चर्चा
👉बैठक के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों एवं प्रबंधन के बीच विभिन्न तकनीकी, उत्पादन एवं श्रमिक हितों से जुड़े विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। बैठक का वातावरण सकारात्मक एवं भविष्य उन्मुख रहा, जहां प्रबंधन एवं यूनियनों ने एसआरयू के विकास एवं कर्मचारियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर सहमति व्यक्त की।
यूनियन की तरफ से बैठक में अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता के साथ शेख महमूद, शिव बहादुर सिंह, युवराज डहरिया, अजय प्रभाकर, एन. के. चौहान, कार्तिक हजारा, टिकेश्वर लाल साहू एवं श्रीनिवास राव विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

