सेल के बोकारो स्टील प्लांट में 40% संविदा कर्मियों की कटौती पर BMS का कड़ा विरोध!
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- देश के सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी “सेल” (SAIL) के बोकारो स्टील प्लांट में संविदा कर्मचारियों की 40% कटौती के प्रस्ताव को लेकर भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।
- संघ के महामंत्री सुरेन्द्र कुमार पांडेय ने इस्पात महासंघ (BMS) के महामंत्री रंजय कुमार के पत्र का हवाला देते हुए इस फैसले को कठोर और अदूरदर्शी कदम बताया है।
- इस संबंध में इस्पात मंत्रालय और सेल प्रबंधन के उच्च अधिकारियों को औपचारिक रूप से पत्र भेजकर विरोध दर्ज कराया गया है।
- आइए विस्तार से जानते हैं 👇
ट्रेड यूनियन से बिना चर्चा, बढ़ी श्रमिकों में असुरक्षा!
👉भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मजदूरों से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय को ट्रेड यूनियनों से बिना चर्चा लागू करना गलत है। इससे हजारों श्रमिकों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बनता है। संघ का कहना है कि इस तरह के निर्णय न केवल औद्योगिक संबंधों को प्रभावित करते हैं, बल्कि प्रबंधन और श्रमिकों के बीच विश्वास की कमी भी पैदा करते हैं।
3,335 श्रमिकों पर असर, संविधान के अनुच्छेद 41 का उल्लंघन!
👉संघ के अनुसार, इस प्रस्तावित कटौती से लगभग 3,335 श्रमिक प्रभावित होंगे, जिनमें 2,552 श्रमिक बोकारो स्टील प्लांट (BSL) से और 783 श्रमिक SRU इकाइयों से हैं। BMS का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में छंटनी भारत के संविधान के अनुच्छेद 41 (काम का अधिकार) और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के खिलाफ है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर पड़ेगा असर
👉संघ ने यह भी रेखांकित किया है कि प्रभावित होने वाले अधिकांश श्रमिक स्थानीय या विस्थापित परिवारों से आते हैं। ऐसे में उनकी आय का अचानक समाप्त होना बोकारो क्षेत्र में आर्थिक मंदी और सामाजिक असंतोष को जन्म दे सकता है। यह कदम केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
औद्योगिक कानूनों का उल्लंघन, ‘सामूहिक छंटनी’ की श्रेणी में मामला
👉BMS ने इस निर्णय को ‘सामूहिक छंटनी’ (Retrenchment) की श्रेणी में बताया है, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धाराओं जैसे 25F और 25N का उल्लंघन हो सकता है। संघ ने यह भी कहा कि “Last In First Out” (LIFO) जैसे बुनियादी श्रम सिद्धांतों की अनदेखी की जा रही है। यदि उचित प्रक्रिया, नोटिस और मुआवजा नहीं दिया गया, तो यह मामला कानूनी विवाद में बदल सकता है।
सुरक्षा और संचालन पर गंभीर सवाल
👉संघ ने अपने पत्र में यह भी उठाया है कि बिना सुरक्षा मूल्यांकन और शेष कर्मचारियों के कार्यभार का विश्लेषण किए 40% कार्यबल कम करना अत्यंत जोखिमपूर्ण है। इससे न केवल कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ेगी, बल्कि संयंत्र के संचालन और उत्पादन क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला, श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा जरूरी
👉भारतीय मजदूर संघ ने अपने विरोध में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का भी उल्लेख किया है। ‘SAIL बनाम नेशनल यूनियन वाटरफ्रंट वर्कर्स (2001)’ मामले में यह स्पष्ट किया गया था कि सार्वजनिक उपक्रमों को एक “Model Employer” की तरह कार्य करना चाहिए। वहीं ‘सचिव, कर्नाटक राज्य बनाम उमादेवी (2006)’ मामले में अदालत ने कहा था कि राज्य श्रमिकों का शोषण नहीं कर सकता और बिना उचित प्रक्रिया के उन्हें हटाया नहीं जा सकता।
सामाजिक उत्तरदायित्व के सिद्धांतों के खिलाफ निर्णय
👉BMS का कहना है कि एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) के रूप में सेल पर सामाजिक उत्तरदायित्व की अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है। ऐसे में इस तरह की छंटनी न केवल श्रमिकों के हितों के खिलाफ है, बल्कि उस मूल उद्देश्य के भी विपरीत है जिसके तहत सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास के लिए की गई थी।
संघ की मांग: कटौती पर रोक और रिस्किलिंग का विकल्प
👉संघ ने प्रबंधन से मांग की है कि इस कटौती के निर्णय को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। इसके साथ ही, श्रमिकों को हटाने के बजाय उनके लिए पुनः कौशल विकास (Reskilling) के विकल्प तलाशे जाएं। BMS ने अपील की है कि प्रबंधन एक “आदर्श नियोक्ता” की भूमिका निभाते हुए औद्योगिक शांति और श्रमिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे और इस निर्णय पर पुनर्विचार करे।
औद्योगिक शांति बनाम प्रबंधन का निर्णय
👉यह पूरा मामला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य, क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सेल प्रबंधन इस विरोध के बाद क्या रुख अपनाता है—क्या वह अपने निर्णय पर कायम रहता है या श्रमिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर कोई संतुलित समाधान निकालता है।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

