BSP में Safety Culture को नई दिशा: टॉप सेफ्टी सर्किल टीमों ने ED (Works) को कहा ‘धन्यवाद’, बढ़ रही जागरूकता और जिम्मेदारी

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
  • इसी क्रम में सेफ्टी सर्किल की शीर्ष तीन टीमों ने ईडी (वर्क्स) राकेश कुमार से सौजन्य मुलाकात कर उनके प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।
  • यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि संयंत्र में विकसित हो रही नई सुरक्षा सोच और सहभागिता आधारित कार्यसंस्कृति का प्रतीक भी बनी।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

टीमों ने व्यक्त किया आभार, सौंपा धन्यवाद पत्र

👉इस दौरान “सुरक्षा शक्ति”, “सेफ टेक इनोवेटर्स” और “अनुसंधान” टीमों के सदस्यों ने संयंत्र में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि विभिन्न प्रतियोगिताओं, जागरूकता अभियानों और टीम-आधारित गतिविधियों के कारण कर्मचारियों में सुरक्षा के प्रति समझ और जिम्मेदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। टीमों ने इस सकारात्मक बदलाव के लिए ईडी (वर्क्स) को धन्यवाद पत्र भेंट किया और मिठाई खिलाकर आभार प्रकट किया। यह पहल दर्शाती है कि अब सुरक्षा केवल नियमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कर्मचारियों के व्यवहार और कार्यशैली का हिस्सा बनती जा रही है।


ED (Works) राकेश कुमार ने दिया महत्वपूर्ण संदेश

👉ईडी (वर्क्स) राकेश कुमार ने इस अवसर पर टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संयंत्र में सुरक्षित कार्यसंस्कृति बनाए रखना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारना अधिक जरूरी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि “सुरक्षा के नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है कि हम अपने दैनिक कार्यों में सतर्कता और जिम्मेदारी को अपनाएं। जब यह हमारी आदत बन जाती है, तभी वास्तविक बदलाव दिखाई देता है।”


Unsafe Act और Unsafe Condition पर फोकस का सुझाव

👉राकेश कुमार ने सेफ्टी सर्किल टीमों को सुझाव दिया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में असुरक्षित गतिविधियों (Unsafe Acts) और असुरक्षित परिस्थितियों (Unsafe Conditions) की पहचान करें और उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है, तो उन्हें उचित मंचों पर उठाया जाना चाहिए ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके। इससे न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा, बल्कि कार्यस्थल की समग्र सुरक्षा भी बेहतर होगी।

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सुरक्षा के साथ ‘हैप्पीनेस’ पर भी जोर

👉इस पहल का एक खास पहलू यह भी है कि अब सुरक्षा के साथ-साथ कार्यस्थल पर ‘हैप्पीनेस’ यानी सकारात्मक माहौल बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। जब कर्मचारी मानसिक रूप से संतुष्ट और सुरक्षित महसूस करते हैं, तो उनकी कार्यक्षमता और उत्पादकता दोनों में वृद्धि होती है।सेफ्टी सर्किल की गतिविधियों के माध्यम से कर्मचारियों को न केवल नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, बल्कि उन्हें टीमवर्क, संवाद और जिम्मेदारी की भावना से भी जोड़ा जा रहा है।


कौन-कौन रहे उपस्थित

👉इस अवसर पर विभिन्न टीमों के सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें सुरक्षा शक्ति टीम से अंकुर राठौर, मोहम्मद रफी और पंकज राठौर, सेफ टेक इनोवेटर्स से धीरज गायकवाड़, रौनक सूर्यवंशी और मानस कुमार, तथा अनुसंधान टीम से सतीश पांडेय, ओमवीर करण और विनय पांडेय शामिल रहे। इन सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि जब कर्मचारी स्वयं सुरक्षा के प्रति जागरूक होते हैं, तब ही किसी भी उद्योग में वास्तविक बदलाव संभव होता है।


विश्लेषण: क्यों अहम है यह पहल?

भिलाई इस्पात संयंत्र जैसे बड़े औद्योगिक संस्थानों में सुरक्षा केवल एक नियम नहीं, बल्कि जीवन रक्षक प्रणाली होती है। ऐसे में सेफ्टी सर्किल जैसी पहलें कर्मचारियों को सीधे प्रक्रिया का हिस्सा बनाती हैं। इससे तीन बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं कि कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है, दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है और संगठन में सकारात्मक कार्यसंस्कृति विकसित होती है।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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