सेफ्टी से लेकर करियर ग्रोथ तक: डिप्लोमा इंजीनियर्स की चार बड़ी मांगें, BSP प्रबंधन को सौंपा गया मांग-पत्र
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत Diploma इंजीनियर्स ने अपनी सेवा संरचना और करियर प्रगति से जुड़े अहम मुद्दों को एक बार फिर मजबूती से उठाया है।
- डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन, भिलाई ने चार प्रमुख मांगों को लेकर माननीय कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन) के नाम एक विस्तृत मांग-पत्र महाप्रबंधक (IR) विकास चन्द्र को सौंपा।
- यह मांग-पत्र केवल पदनाम या प्रमोशन तक सीमित नहीं है, बल्कि सेफ्टी कल्चर, उत्पादकता और संगठनात्मक मजबूती से सीधे जुड़ा हुआ है।
- एसोसिएशन का कहना है कि डिप्लोमा इंजीनियर्स वर्षों से संयंत्र के उत्पादन, ऑपरेशन, मेंटेनेंस, सेफ्टी और क्वालिटी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी भूमिका के अनुरूप सेवा संरचना में आवश्यक सुधार अब तक नहीं हो पाया है।
- आइए विस्तार से जानते है बैठक के अहम बिंदुओं को👇
मांग-पत्र की पहली बड़ी मांग: पृथक सुपरवाइजरी कैडर!
👉मांग-पत्र की सबसे अहम मांग Diploma इंजीनियर्स के लिए पृथक सुपरवाइजरी कैडर की स्थापना से जुड़ी है। एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में तकनीकी सुपरविजन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट विभाजन नहीं होने से कई बार सेफ्टी और क्वालिटी प्रभावित होती है।
👉पृथक सुपरवाइजरी कैडर बनने से:
- शॉप फ्लोर पर सेफ्टी कल्चर मजबूत होगा।
- ऑपरेशन और मेंटेनेंस में जवाबदेही तय होगी।
- ब्रेकडाउन की घटनाओं में कमी आएगी।
- उत्पादकता और क्वालिटी में स्थायी सुधार होगा।
👉एसोसिएशन का मानना है कि यह कदम न केवल कर्मचारियों के लिए बल्कि प्रबंधन के लिए भी लॉन्ग-टर्म फायदे लेकर आएगा।
सेक्शन ऑफिसर की तर्ज पर ‘सेक्शन इंजीनियर’ पदनाम की मांग!
👉दूसरी प्रमुख मांग वर्क्स एरिया में “सेक्शन ऑफिसर” की तर्ज पर “सेक्शन इंजीनियर” पदनाम लागू करने से संबंधित है।
👉एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान पदनाम तकनीकी कार्यों की गंभीरता और जिम्मेदारी को सही तरीके से परिलक्षित नहीं करता।
👉वर्तमान व्यवस्था में कई सीनियर डिप्लोमा इंजीनियर्स रिटायरमेंट से ठीक पहले ‘जूनियर इंजीनियर’ बनते हैं, जो उनके लंबे अनुभव और योगदान के बावजूद डिमोटिवेशन का कारण बनता है। इसीलिए एसोसिएशन ने मांग की है कि ‘सेक्शन इंजीनियर’ पदनाम लागू किया जाए, ताकि करियर के अंतिम पड़ाव पर तकनीकी अधिकारियों को सम्मान और स्पष्ट पहचान मिल सके।
👉यदि “सेक्शन इंजीनियर” पदनाम लागू होता है, तो:
- तकनीकी भूमिकाओं को स्पष्ट पहचान मिलेगी।
- जिम्मेदारियों और अधिकारों में स्पष्टता आएगी।
- शॉप फ्लोर और मैनेजमेंट के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन बनेगा।
- यह बदलाव छोटे स्तर का दिख सकता है, लेकिन इसका प्रभाव कामकाज की संस्कृति पर गहरा पड़ सकता है।
10 वर्ष की सेवा के बाद अधिकारी वर्ग में पदोन्नति का प्रस्ताव…
👉तीसरी मांग Diploma इंजीनियर्स के करियर ग्रोथ से सीधे जुड़ी हुई है। एसोसिएशन ने प्रस्ताव रखा है कि 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी करने वाले Diploma इंजीनियर्स को अधिकारी वर्ग में पदोन्नति का अवसर दिया जाए।
👉एसोसिएशन के अनुसार:
- इससे अनुभवी और दक्ष कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।
- संगठन को ग्राउंड-लेवल अनुभव वाला नेतृत्व मिलेगा।
- कर्मचारियों में लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।
👉यह मांग केवल व्यक्तिगत प्रमोशन की नहीं, बल्कि संगठन के लिए भविष्य का मजबूत तकनीकी नेतृत्व तैयार करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
कनिष्ठ अधिकारी पदों की संख्या बढ़ाने की मांग और PSU उदाहरण
👉चौथी और महत्वपूर्ण मांग कनिष्ठ अधिकारी पदों की संख्या से संबंधित है। वर्तमान में S6 से S11 ग्रेड के बीच कनिष्ठ अधिकारी पदों की सीमा केवल 2% तक सीमित है। एसोसिएशन ने इसे बढ़ाकर कुल नॉन-एक्जीक्यूटिव (S1 से S11) कर्मचारियों की संख्या के 10% तक करने का प्रस्ताव दिया है।
👉एसोसिएशन ने उदाहरण देते हुए बताया कि Indian Oil Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू है। वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जैसे:
- कर्मचारियों की उत्पादकता में वृद्धि
- जिम्मेदारियों के प्रति स्वामित्व भाव
- कार्य संतोष और संगठन के प्रति जुड़ाव
प्रबंधन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
👉Diploma इंजीनियर्स एसोसिएशन ने विश्वास व्यक्त किया है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक और समयबद्ध निर्णय लिया जाता है, तो इसका लाभ केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे भिलाई इस्पात संयंत्र की तकनीकी दक्षता, सेफ्टी परफॉर्मेंस और संगठनात्मक मजबूती को दीर्घकालिक फायदा मिलेगा।
👉एसोसिएशन के महासचिव श्री मोहम्मद रफी ने प्रबंधन से अपील की कि इन न्यायोचित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र निर्णय लिया जाए। इस दौरान उपाध्यक्ष उषाकर चौधरी, कोषाध्यक्ष रमेश कुमार, श्रवण पांडे, किरण वैद्य, सुमित कुमार सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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