SAIL NPS में दोहरा खेल? क्यों नहीं मिल रहा कर्मचारियों को पूरा 9% पेंशन योगदान | जानिए SAIL की Profit-Linked Pension पॉलिसी का सच
– DIGITAL BHILAI NEWS EXPLAINER – (SAIL NPS) –
- स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के कर्मचारियों के बीच एक बार फिर पेंशन अंशदान (NPS Contribution) को लेकर असंतोष तेज़ हो गया है।
- हाल ही में कंपनी ने कर्मचारियों के National Pension System (NPS) खातों में 4.38% एरियर की राशि जमा की है।
- लेकिन सवाल यह है कि — जब बाकी PSUs में कंपनी का NPS योगदान 9% फिक्स है, तो SAIL में यह हर साल क्यों असमान है? और क्यों कर्मचारियों को पूरा 9% अंशदान नहीं मिल रहा?
- आइये जानते है इस खास न्यूज़ एक्सप्लेनेर में 👇
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SAIL का NPS सिस्टम – Profit से जुड़ा Pension
👉NPS (National Pension System) एक सरकारी रिटायरमेंट स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों हर महीने एक निश्चित हिस्सा जमा करते हैं। (कंपनी द्वारा जमा किया अंशदान “कंपनी कंट्रीब्यूशन” कहलाता है।)
👉परंतु SAIL में यह योगदान Profit-Linked System से जुड़ा हुआ है —यानि कंपनी ने जितना मुनाफा (Profit Before Tax – PBT) कमाया, उसी के अनुपात में कंपनी का पेंशन योगदान तय होगा।
नियम क्या कहता है?
👉“यदि कंपनी का PBT नेटवर्थ का 8% या उससे अधिक है, तो पेंशन योगदान 9% होगा। यदि 8% से कम है, तो योगदान अनुपातिक रूप से घटेगा।”

(Ref: SAIL Pension Circular, June 2022)
हर माह 3% और साल के अंत में तय होता है “असली योगदान”
👉कंपनी हर महीने कर्मचारियों के Basic + DA का 3% NPS में जमा करती है।
👉साल के अंत में जब कंपनी का Profit Before Tax (PBT) तय होता है, तो यह देखा जाता है कि साल का कुल अंशदान कितना होना चाहिए।
📊 उदाहरण:
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यदि किसी कर्मचारी का वेतन (BASIC+DA) ₹50,000 है — कंपनी हर माह ₹1,500 (3%) जमा करेगी → ₹18,000 सालाना। (₹1500×12 = ₹18000)
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अब अगर उस वर्ष कंपनी का कुल अंशदान 8% तय हुआ, तो कर्मचारी को कुल ₹48,000 मिलना चाहिए। (₹50,000×8%x12 = ₹48000)
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कंपनी पहले ही ₹18,000 जमा कर चुकी है, तो शेष ₹30,000 एरियर के रूप में बाद में जमा किया जाता है। (₹48000-₹18000 = ₹30,000)
👉इसी तरह वित्तीय वर्ष 2024–25 में कंपनी ने 7.38% कुल अंशदान तय किया और 4.38% एरियर अक्टूबर 2025 में कर्मचारियों के NPS खातों में जमा किया।
अब सबसे बड़ा सवाल: अगर PBT 8% से ऊपर चला जाए तो क्या 9% से ज़्यादा मिलेगा❓
👉नहीं ❌ कंपनी के नियम के अनुसार — “If PBT to average Networth is 8% or above, contribution shall be limited to 9%.”
👉इसका मतलब यह है कि – चाहे कंपनी का मुनाफा नेटवर्थ का 10%, 12% या 20% भी क्यों न हो, पेंशन योगदान 9% से ज़्यादा नहीं होगा।
👉यानी जब लाभ घटा, तो पेंशन घटा; लेकिन जब लाभ बढ़ा, तो कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिला।
👉कर्मचारियों के बीच यही व्यवस्था “SAIL NPS का दोहरा खेल” कही जा रही है — जहाँ “Profit Link” का बहाना सिर्फ पेंशन घटाने के लिए है, बढ़ाने के लिए नहीं।❌
2012 से 2021 तक की असमानता — एक ही कंपनी में दो नियम
👉SAIL में 2012 से अक्टूबर 2021 तक Non-Executives के लिए कंपनी का पेंशन अंशदान सिर्फ 6% था, जबकि Executives को उसी अवधि में 9% मिल रहा था।

👉फिर 1 नवंबर 2021 से नियम बदला गया और Non-Executives को भी Executives के बराबर “9% तक” का लाभ देने का प्रावधान किया गया।
👉परंतु यह संशोधन पूर्व-प्रभाव (retrospective) से लागू नहीं किया गया। यानी 2012 से 2021 के बीच काम करने वाले हज़ारों कर्मचारियों को उन 9 वर्षों का अतिरिक्त 3% अंशदान कभी नहीं मिला।
कर्मचारियों का तर्क बिल्कुल स्पष्ट है-
“जब ग्रेज्यूटी की सीलिंग सभी के लिए ₹20 लाख (पहले) – वर्तमान 25 लाख – कर दी गई, तो पेंशन अंशदान में भी 2012 से समानता क्यों नहीं?”
👉 दोनों योजनाएँ (Gratuity और Pension) Superannuation Benefit के हिस्से हैं। फिर एक को समान करना और दूसरे को पीछे छोड़ना स्पष्ट भेदभाव है।

अक्टूबर 2021 के बाद रिटायर हुए कर्मियों का दोहरा घाटा❗
👉उन्हें 2012–2021 के दौरान कम अंशदान (6%) का असर भुगतना पड़ा।
👉और अब Profit-Linked मॉडल के कारण हर साल घटते PBT से उनका पेंशन फंड और छोटा हो रहा है।
📉 यानी रिटायरमेंट के बाद उन्हें दोहरी मार — Gratuity limit हुई, पर Pension Contribution आधा रह गया।
Superannuation Benefit पर इसका असर❗
👉Superannuation Benefit (जो कुल रिटायरमेंट पैकेज का लगभग 30% होता है) का बड़ा हिस्सा NPS Contribution पर निर्भर करता है। यदि किसी कर्मचारी को हर साल 3% कम योगदान मिलता है, तो 25–30 साल की सेवा अवधि में यह अंतर
₹15–20 लाख तक पहुँच सकता है। यही कारण है कि कर्मचारी अब इसे “लॉस टू फ्यूचर पेंशन” कह रहे हैं।
कर्मचारियों की मांग — पारदर्शी और समान नीति
कर्मचारी संगठन अब यह मांग कर रहे हैं कि:
👉NPS अंशदान को 9% पर फिक्स किया जाए, ताकि Profit-Linked अनिश्चितता खत्म हो।
👉2012 से 2021 तक के Non-Executives के लिए पेंशन अंशदान का 3% Arrear Adjustment दिया जाए।
👉Post-2021 Retirees को कम अंशदान वाले वर्षों के आधार पर मिलने वाले घाटे की भरपाई की जाए।
सूत्रों के अनुसार, कुछ यूनियनें इस मामले में कानूनी कार्रवाई (Court Case) की तैयारी कर रही हैं।
निष्कर्ष: Profit से नहीं, नीति से जुड़ा होना चाहिए Pension
👉SAIL जैसी महारत्न कंपनी में कर्मचारियों के रिटायरमेंट बेनिफिट को “Profit Report” से जोड़ना
एक अस्थिर व्यवस्था है।
👉कर्मचारियों की मांग है कि NPS को एक नीतिगत अधिकार (Policy Right) बनाया जाए, ना कि “Profit-Based Variable” योजना।
👉”क्योंकि जब कर्मचारी अपनी पूरी सेवा स्थायी रूप से देते हैं, तो उनकी पेंशन भी स्थायी होनी चाहिए, मुनाफे के उतार-चढ़ाव पर नहीं।”
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K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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