DPS मरोदा में 1000 से अधिक बच्चों को मिला हेल्थ मंत्र! यौवन, मानसिक स्वास्थ्य और स्क्रीन की लत पर हुई अहम चर्चा!

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव केवल अच्छी शिक्षा से नहीं, बल्कि सही स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन-कौशल से भी तैयार होती है।
  • इसी उद्देश्य के साथ भिलाई के दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), मरोदा में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) की राष्ट्रीय पहल आईएपी प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान 2026 के अंतर्गत प्री-टीन मॉड्यूल पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
  • कार्यक्रम में 1000 से अधिक विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लिया, जहां बच्चों के शारीरिक विकास, संतुलित पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, सहपाठियों के दबाव और स्क्रीन टाइम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

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आईएपी प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान 2026 के तहत हुआ आयोजन

👉इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की प्रमुख राष्ट्रीय पहल आईएपी प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान 2026 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्री-टीन आयु वर्ग के बच्चों को स्वास्थ्य, शारीरिक विकास और भावनात्मक चुनौतियों के प्रति जागरूक करना था। यह कार्यक्रम इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, छत्तीसगढ़, दुर्ग-भिलाई एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एवं डीपीएस, जूनियर विंग, भिलाई के संयुक्त तत्वावधान में आईएपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष 2026 डॉ. नीलम मोहन के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित किया गया।


डीपीएस प्रबंधन के मार्गदर्शन में सफल आयोजन

👉यह कार्यक्रम डीपीएस, भिलाई के प्रभारी प्राचार्य श्री ए.एच. जुनजानी के गतिशील नेतृत्व एवं अनुकरणीय मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ स्वास्थ्य शिक्षा को एकीकृत करने की उनकी दूरदर्शी सोच ने इस आयोजन को संभव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, डीपीएस जूनियर विंग की प्रधानाध्यापिका डॉ. (श्रीमती) गीता जुनजानी के सूक्ष्म मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी नेतृत्व का भी कार्यक्रम को सशक्त संबल प्राप्त हुआ। उन्होंने विद्यालय स्तर पर इस कार्यक्रम की परिकल्पना और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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डॉ. उदय कुमार ने बताया 8 से 12 वर्ष की आयु का महत्व

👉समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. उदय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र तथा चिकित्सा सेवा प्रमुख, भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपने उद्बोधन में बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए प्री-टीन आयु को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि 8 से 12 वर्ष की आयु भविष्य के स्वास्थ्य की आधारशिला है। यदि इस आयु में बच्चों को सही दिशा और मार्गदर्शन दिया जाए, तो मोटापा, चिंता और स्क्रीन की लत जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र, सेल का चिकित्सा परिवार अस्पताल की चारदीवारी से परे समाज के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।


बच्चों के लिए जीवन-कौशल टूलकिट है प्री-टीन मॉड्यूल: डॉ. रजनीश मल्होत्रा

👉कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं आईएपी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रजनीश मल्होत्रा ने बच्चों के सामने आ रही नई चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे समय-पूर्व यौवन, सहपाठियों के दबाव और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में यह शोध-आधारित मॉड्यूल उनके लिए एक जीवन-कौशल टूलकिट के समान है, जो उन्हें जीवन की चुनौतियों को समझने और उनसे बेहतर तरीके से निपटने में मदद कर सकता है।


शारीरिक विकास, पोषण और स्क्रीन टाइम पर दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

👉कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों का संचालन राष्ट्रीय संकाय सदस्यों द्वारा किया गया। इन सत्रों में बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। डॉ. अरविंद सावंत ने यौवन के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तनों, शारीरिक वृद्धि और संतुलित पोषण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने प्रतिदिन 60 मिनट शारीरिक गतिविधि करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इसके साथ ही उन्होंने स्क्रीन टाइम को संतुलित रखने के लिए 3S नियम — अध्ययन, निद्रा और सामाजिक भोजन के दौरान स्क्रीन से दूरी के बारे में जानकारी दी। इस नियम के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई, नींद और परिवार के साथ भोजन जैसे महत्वपूर्ण समय में स्क्रीन के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने के लिए प्रेरित किया गया।


भावनात्मक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान पर डॉ. माला चौधरी ने किया मार्गदर्शन

👉कार्यक्रम के दौरान भावनात्मक स्वास्थ्य और मानसिक मजबूती से जुड़े विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। डॉ. माला चौधरी, मुख्य परामर्शदाता, बाल रोग विभाग, जे.एल.एन.एच.आर.सी. ने बच्चों को भावनात्मक स्वास्थ्य, क्रोध प्रबंधन और सहपाठियों के अनुचित दबाव का सामना करने के तरीकों के बारे में बताया। उन्होंने अनुचित दबाव के सामने ‘ना’ कहने की क्षमता, आत्म-सम्मान और तार्किक चिंतन के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही, माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर संवाद करने को भी बच्चों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।


1000 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने लिया हिस्सा

👉इस स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में 1000 से अधिक विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की मौजूदगी ने बच्चों के स्वास्थ्य, शारीरिक विकास और मानसिक कल्याण से जुड़े विषयों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में इस पहल के महत्व को दर्शाया। कार्यक्रम का गरिमामय संचालन एवं कुशल समन्वय सुश्री हैंसी पोथेन एवं सुश्री गौरी कुमार द्वारा अत्यंत दक्षता एवं शालीनता के साथ किया गया। उनके उत्कृष्ट समन्वय से कार्यक्रम का निर्बाध प्रवाह और शानदार सफलता सुनिश्चित हुई। अंत में डीपीएस जूनियर विंग की प्रधानाध्यापिका डॉ. (श्रीमती) गीता जुनजानी ने हार्दिक एवं गरिमामय आभार व्यक्त किया।


बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

👉आईएपी प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान 2026 के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों को केवल शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भावनात्मक मजबूती, आत्म-सम्मान, संतुलित जीवनशैली और सही निर्णय लेने की क्षमता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी सामने लेकर आया। विद्यालय और चिकित्सा विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस पहल ने बच्चों के समग्र विकास में स्वास्थ्य शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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