SAIL के 4 बड़े अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी सुविधा नहीं? — Sector 9 Hospital सहित सभी में “सुविधाओं की कमी” और “मरीजों की बढ़ती परेशानियां”
– Digital Bhilai News – SECTOR 9 HOSPITAL (BHILAI) –
- SAIL (Steel Authority of India Limited) के भिलाई, बोकारो, राउरकेला और दुर्गापुर के अस्पताल, जिनका इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी मजबूत है, आज इन अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज में सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं का सबसे ज्यादा अभाव है।।
- विशेषकर भिलाई का पं. जवाहर लाल नेहरू sector 9 Hospital जो कभी मध्य भारत का सबसे बड़ा अस्पताल था, अब केवल एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है।
- विशेषज्ञ चिकित्सकों, टेक्निशियंस और अत्याधुनिक जांच मशीनों की कमी के कारण बीएसपी के कर्मचारी और आसपास के मरीज – निजी अस्पतालों की ओर मजबूर हो रहे हैं, जहां सुविधाएं कम होने के बावजूद विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।

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अस्पतालों का गौरवशाली इतिहास Vs. वर्तमान स्थिति👎🏻
👉🏻लगभग एक दशक पहले, Sector 9 Hospital सहित सेल के अन्य अस्पताल 1000 से अधिक बेड क्षमता के साथ मध्य भारत के सबसे बड़े और भरोसेमंद अस्पतालों में से थे।
👉🏻छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड जैसे सीमावर्ती राज्यों के मरीज यहां इलाज के लिए आते थे।
👉🏻परंतु अब हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी और पैरामेडिकल स्टाफ की तंगी से अस्पताल अपनी मूल भूमिका निभाने में असमर्थ हो रहे हैं।
वर्तमान स्थिति :-

यह Sector 9 Hospital के मेडिसिन OPD का बदहाल हाल है, जहां हर रोज सैकड़ों मरीजों का ताता लगा रहता है, टोकन के लिए वे आपस में लड़ते है और घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों का नंबर नहीं आता…. ऐसे में जब डॉक्टर के ऊपर भी काफी मरीजों को देखने का भार रहता है तो क्या वो हर मरीज को पर्याप्त समय दे पाते होंगे? परिणाम इलाज की गुणवत्ता में कमी और मरीजों के लिए परेशानी का बढ़ना आम बात हो गई है।
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विशेषज्ञता की कमी :-
Sector 9 Hospital में कई महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।
- हार्ट स्पेशलिस्ट उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को दिल्ली या रायपुर के निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
- न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, सर्जरी, और पेडियाट्रिक सर्जरी जैसे विभागों में डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है।
- मनोरोग विभाग में पहले आधा दर्जन डॉक्टर थे, अब सिर्फ एक महिला विशेषज्ञ बची हैं।
- रात के समय अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति रहती है, जिससे आपातकालीन सेवा प्रभावित होती है।

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पैरामेडिकल स्टाफ की समस्या‼️
- पैरामेडिकल स्टाफ के भी लगातार रिटायरमेंट और नई भर्ती न होने से अस्पताल में कार्यरत स्टाफ पर भारी दबाव है।
- फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण नर्सिंग ट्रेनिंग कर रहे छात्रों पर निर्भरता बढ़ गई है। ये ट्रेनीज कई बार मरीजों के हाथ से blood sample निकालने में असमर्थ दिखते है और मरीजों को बार बार तकलीफ होती है।
- एक्स-रे और MRI के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि हो गई है, जिससे मरीजों को अतिरिक्त कष्ट उठाना पड़ रहा है।
- जिन लोगों को तकलीफ असहनीय होती है उन्हें मजबूरन प्राइवेट संस्था से भारी पैसे देकर करवाना पड़ता है। इससे कर्मचारियों को हॉस्पिटल सुविधा तो नाम भर की रह जाती है।।

Sector 9 hospital के कैजुअल्टी की यह तस्वीर दिखाती है कि कैसे ट्रेनी छात्रों पर निर्भरता हर जगह बढ़ गई है। जो पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दर्शाता है।
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सेल के अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा लेकिन विशेषज्ञता कम📉
- SAIL के 4 अस्पतालों — भिलाई, बोकारो, राउरकेला और दुर्गापुर — के भवन और मेडिकल उपकरणों का स्तर उच्च गुणवत्ता का है। लेकिन केवल भौतिक संरचना होना पर्याप्त नहीं है।
- योग्य चिकित्सकों की कमी के कारण ये अस्पताल गंभीर बीमारियों के इलाज में असमर्थ हैं।
- इसी वजह से मरीजों को बाहर के निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जहां सुविधाएं भले कम हों, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद हैं।

मरीजों से पता चला है कि Sector 9 hospital के डॉक्टर्स यहां काम करते हुए भी घर में अपना क्लीनिक चलाते है; ऐसे ही यहां के एक विभाग के डॉक्टर जिनका उनके विभाग में एकछत्र राज है – वे अपने उन मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार रखते है जो हर हफ्ते उन्हें उनके घर में चेकअप करवाते है। घर में मरीजों को देखने का साहब 600 से 700 रुपए फीस लेते है।
और मरीज भी अच्छे विशेषज्ञ और सुविधाओं के अभाव में और बाहर अच्छे इलाज की आस में इन साहब से बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में रेफर करवाने का जुगाड़ लगाते है।
भर्ती नीति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का कारण❓
झारखंड सरकार ने चिकित्सकों की भर्ती के लिए टेंडर सिस्टम लागू किया है, जिसमें डॉक्टर स्वयं अपना वेतन प्रस्ताव करते हैं। इससे कम वेतन की मांग करने वाले चिकित्सकों की नियुक्ति होती है, जो पलायन को रोकने में सहायक साबित हो रही है।
फिर भी,
- SAIL HOSPITALS में पर्याप्त डॉक्टरों की भर्ती नहीं हो पा रही है।
- तकनीशियनों की नियुक्ति भी लंबित है।
- पुराने मैनपावर को ट्रेनिंग देने की आवश्यकता है ताकि वे आधुनिक तकनीकों के साथ तालमेल बिठा सकें।
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विशेषज्ञता आधारित सुपर स्पेशलिटी केंद्रों की जरूरत ‼️
👉🏻सेल के अस्पतालों में प्रमुख बीमारियों के लिए सुपर स्पेशलिटी केंद्र स्थापित करना आवश्यक है।
👉🏻हार्ट, न्यूरो, कैंसर, किडनी, सर्जरी, हड्डी, फेफड़ों आदि क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति जरूरी है।
👉🏻यह केंद्र न केवल मरीजों को बेहतर इलाज देंगे, बल्कि निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी कम करेंगे।
👉🏻इससे सेल अस्पतालों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और कर्मचारियों तथा जनता को राहत मिलेगी।
निष्कर्ष✍🏻
भिलाई और अन्य सेल अस्पतालों का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीशियनों की कमी के कारण ये अस्पताल अपनी भूमिका में असफल साबित हो रहे हैं। यदि भर्ती प्रक्रिया को तेजी से लागू किया जाए, पुराने स्टाफ को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग दी जाए और प्रत्येक प्रमुख अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो मरीजों की परेशानियां कम होंगी और सेल की प्रतिष्ठा भी बरकरार रहेगी।
अब वक्त है कि सेल प्रबंधन, सरकारी अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग मिलकर इन समस्याओं का त्वरित समाधान निकालें, ताकि अस्पताल रेफरल सेंटर से बहुमुखी उपचार केंद्र बन सकें।
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✍🏻रिपोर्ट : Digital Bhilai News
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K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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