स्वामी विवेकानन्द के विचारों में छिपा है मानव-उत्कर्ष का मार्ग, भिलाई में युवाओं की भूमिका और राष्ट्र निर्माण पर हुआ सारगर्भित विमर्श

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • मानव-उत्कर्ष का वास्तविक अर्थ केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, ज्ञान और सामर्थ्य का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास के लिए करना भी है।
  • स्वामी विवेकानन्द के विचारों में निहित इसी संदेश को केंद्र में रखते हुए भिलाई में स्वामी आत्मानन्द स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया।
  • इस दौरान शिक्षा, चरित्र निर्माण, युवा शक्ति, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित विमर्श हुआ।
  • वक्ताओं ने स्वामी विवेकानन्द के विचारों को वर्तमान समय की चुनौतियों के संदर्भ में प्रासंगिक बताते हुए मानव-निर्माण पर जोर दिया।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

स्वामी आत्मानन्द स्मृति व्याख्यान में जुटे प्रमुख वक्ता

👉आफिसर्स एसोसिएशन, भिलाई इस्पात संयंत्र एवं श्री रामकृष्ण सेवा मंडल, भिलाई के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी आत्मानन्द जी की जयंती के उपलक्ष्य में ‘मानव-उत्कर्ष और स्वामी विवेकानन्द’ विषय पर स्वामी आत्मानन्द स्मृति व्याख्यान का आयोजन सिविक सेंटर स्थित प्रगति भवन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामकृष्ण मिशन विवेकानन्द आश्रम, रायपुर की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘विवेक ज्योति’ के संपादक श्रीमत् स्वामी प्रपत्त्यानन्द जी ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले डेक्सटेरिटी ग्लोबल, पटना के सीईओ एवं संस्थापक श्री शरद विवेक सागर तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में विवेकानंद विद्यापीठ, रायपुर के सचिव एवं पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. ओमप्रकाश वर्मा उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द एवं स्वामी आत्मानन्द के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

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स्वामी आत्मानन्द के जीवन और सेवा कार्यों पर डाला प्रकाश

👉श्री बंछोर ने ब्रम्हलीन स्वामी आत्मानन्द जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वामी आत्मानन्द जी रामकृष्ण मिशन विवेकानन्द आश्रम, रायपुर तथा रामकृष्ण मिशन आश्रम, नारायणपुर (छत्तीसगढ़) के संस्थापक थे। उन्होंने सन् 1951 में नागपुर विश्वविद्यालय से प्योर मैथिमेटिक्स (शुद्ध गणितशास्त्र) में एम.एस-सी. की उपाधि प्राप्त की तथा सर्वाधिक गुणांक पाने के कारण स्वर्ण पदक के अधिकारी हुए। इसके तुरन्त बाद ही उन्होंने सुविख्यात रामकृष्ण मठ-मिशन में प्रवेश ले लिया और तब से लेकर अन्त तक उनका जीवन श्रीरामकृष्ण और स्वामी विवेकानन्द के चरणों में समर्पण और सेवा का रहा।

स्वामीजी अत्यन्त प्रतिभाशाली वक्ता और लेखक थे। वे वाणी के साथ ही कलम के भी धनी थे तथा अध्यात्म एवं अन्य सम्बन्धित विषयों पर अपने सारगर्भित एवं प्रभावी व्याख्याओं, प्रवचनों और लेखों के लिए देश भर में विख्यात थे। श्रीमद्भगवद्गीता पर हुए कुल 213 प्रवचनों में से प्रथम 78 प्रवचनों का संग्रह ‘गीतातत्त्व-चिन्तन’ के नाम से दो खण्डों में प्रकाशित हुआ है जो उनके गहन आध्यात्मिक पैठ तथा प्रकाण्ड ज्ञान को प्रदर्शित करता है। स्वामीजी का संगठन-कौशल अपूर्व था। उनके कुशल निर्देशन और संरक्षण में प्रारम्भ हुए मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा और राजस्थान में रामकृष्ण-विवेकानन्द के नाम पर लगभग बीस आश्रम परिचालित हो रहे हैं।

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शरद विवेक सागर बोले—स्वामी विवेकानन्द के विचारों में निहित है मानव-उत्कर्ष का मार्ग

👉कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए आफिसर्स एसोसिएशन, भिलाई इस्पात संयंत्र के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र कुमार बंछोर ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। उन्होंने कहा कि श्री शरद विवेक सागर भारत के प्रख्यात सामाजिक उद्यमी, विचारक और ओजस्वी वक्ता हैं। वे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त गैर-लाभकारी संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक हैं, जो युवाओं को शिक्षा एवं नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कार्य करता है। उन्होंने बताया कि कम उम्र में सामाजिक बदलाव के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों एवं प्रभावशाली वक्तृत्व के कारण श्री सागर को अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आमंत्रित किया जाता रहा है। उन्हें फोर्ब्स द्वारा विश्व के 30 सबसे प्रभावशाली युवाओं की सूची में शामिल किया गया है तथा रॉकफेलर फाउंडेशन द्वारा अगली सदी के 100 इनोवेटर्स की सूची में स्थान दिया गया है।

श्री बंछोर ने विशिष्ट वक्ता डॉ. ओमप्रकाश वर्मा का परिचय देते हुए बताया कि वे पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त प्राध्यापक हैं तथा उन्होंने पूर्व में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित किया है। शिक्षा, सामाजिक चिंतन एवं सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

मुख्य वक्ता श्री शरद विवेक सागर ने ‘मानव-उत्कर्ष और स्वामी विवेकानन्द’ विषय पर अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानन्द का दर्शन केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं था, बल्कि वह व्यक्ति निर्माण, चरित्र निर्माण, शिक्षा, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण का व्यापक दर्शन था।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द युवाओं में असीम संभावनाएं देखते थे। उनका विश्वास था कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर अपार शक्ति विद्यमान है और सही शिक्षा, अवसर एवं मार्गदर्शन मिलने पर युवा समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। आज के समय में जब युवा अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब विवेकानन्द जी का ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको’ का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो जाता है।

श्री सागर ने कहा कि मानव-उत्कर्ष का वास्तविक अर्थ केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा एवं सामर्थ्य का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास के लिए करना है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के विचारों को आधुनिक शिक्षा, नेतृत्व और सामाजिक उद्यमिता से जोड़ते हुए कहा कि युवाओं को केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि समस्या का समाधान करने वाला और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला नेतृत्वकर्ता बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, आत्मविश्वास, अनुशासन, ज्ञान और सेवा भावना के माध्यम से व्यक्ति असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्यों को भी प्राप्त कर सकता है।


व्यक्ति से राष्ट्र तक विकास की दिशा देता है विवेकानन्द का चिंतन

👉विशिष्ट वक्ता डॉ. ओमप्रकाश वर्मा ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानन्द के जीवन-दर्शन एवं चिंतन की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करते हुए पूरी दुनिया को मानवता, सहिष्णुता और सेवा का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि विवेकानन्द जी के लिए शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना या डिग्री प्राप्त करना नहीं था, बल्कि मनुष्य के भीतर निहित शक्ति एवं चरित्र का विकास करना था। उनका मानना था कि मजबूत चरित्र वाला, आत्मविश्वासी और संवेदनशील मनुष्य ही समाज एवं राष्ट्र के लिए वास्तविक योगदान दे सकता है।

डॉ. वर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने धर्म को मानव सेवा से जोड़ा। उनके विचारों में ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और ऊर्जा का उपयोग समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान सामाजिक एवं वैश्विक परिस्थितियों में स्वामी विवेकानन्द का चिंतन हमें मानवीय मूल्यों, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और जिम्मेदार नागरिकता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।


स्वामी प्रपत्त्यानन्द बोले—विवेकानन्द का संदेश आज के समाज के लिए मार्गदर्शक

👉कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी प्रपत्त्यानन्द जी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का चिंतन कालजयी है। उन्होंने कहा कि विवेकानन्द जी ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति को विश्व के सामने स्थापित करने के साथ-साथ भारतीय समाज को आत्मविश्वास और आत्मगौरव का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानन्द जी ने भी स्वामी विवेकानन्द के विचारों को अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाया। शिक्षा, संस्कार और समाज सेवा के माध्यम से मानव निर्माण करना ही स्वामी आत्मानन्द के जीवन का प्रमुख उद्देश्य रहा। इसलिए स्वामी आत्मानन्द की जयंती के अवसर पर ‘मानव-उत्कर्ष और स्वामी विवेकानन्द’ विषय पर यह स्मृति व्याख्यान अत्यंत सार्थक एवं प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि आज समाज को ऐसी शिक्षा और नेतृत्व की आवश्यकता है जो व्यक्ति को केवल सफल ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक बनाए। स्वामी विवेकानन्द का जीवन एवं संदेश इस दिशा में सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।


आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन

👉कार्यक्रम के अंत में आफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव अंकुर मिश्रा द्वारा अतिथियों एवं उपस्थित सभी गणमान्यजनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानन्द स्मृति व्याख्यान ने स्वामी विवेकानन्द के विचारों को वर्तमान समय की चुनौतियों से जोड़ते हुए मानव-निर्माण, युवा शक्ति, शिक्षा, सेवा एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सार्थक संदेश दिया है।


कार्यक्रम का संचालन जितेन्द्र मानिकपुरी ने किया।

👉इस कार्यक्रम में आफिसर्स एसोसिएशन की ओर से कोषाध्यक्ष सौभाग्य रंजन साहू, उपाध्यक्ष रेमी थॉमस, सचिव द्वय प्रहलाद मौर्या, अनु पी., जोनल प्रतिनिधि संजय तिवारी, श्रवण कुमार शुक्ला, विकास कुमार सिन्हा, विनीत वर्मा तथा श्री रामकृष्ण सेवा मंडल, भिलाई के सचिव श्री तुषार सिंह सहित समिति के सदस्यगण एंव बड़ी संख्या में भिलाई नगर वासियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।

स्वामी विवेकानन्द के विचारों पर आधारित इस स्मृति व्याख्यान ने शिक्षा, चरित्र निर्माण, युवा नेतृत्व और समाज सेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया कि वास्तविक मानव-उत्कर्ष व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति उसकी जिम्मेदारी से भी जुड़ा है।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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