SAIL कर्मियों के साथ दोहरा अन्याय, सुविधाएँ घटी और अधिकार दबे

-DIGITAL BHILAI NEWS-

“वेतन समझौते से लेकर नन-स्टैच्यूटरी सुविधाओं तक, SAIL कर्मियों की उपेक्षा पर गंभीर सवाल?”

  • Steel Authority of India Limited (SAIL) के नन-एग्जीक्यूटिव (अनाधिशासी) कर्मचारी आज खुद को ऐसे मोड़ पर खड़ा महसूस कर रहे हैं….
  • जहाँ उनका वेतन समझौता भी अधूरा है और वर्षों से चली आ रही सुविधाएँ भी या तो समाप्त हो चुकी हैं या समय के अनुरूप अपडेट नहीं की गई हैं।
  • यह केवल आर्थिक असंतोष का मामला नहीं, बल्कि न्याय, समानता और औद्योगिक लोकतंत्र से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।
  • बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ द्वारा निदेशक (कार्मिक) को लिखे गए पत्र ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है…
  • क्या SAIL में कर्मियों और अधिकारियों के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं?
  • आइए जानते है क्या है कर्मियों के असंतोष के ये महत्वपूर्ण विषय?👇

नन-स्टैच्यूटरी सुविधाओं की कटौती!

👉SAIL कर्मी पहले ही 9 साल से अधूरे वेतन समझौते की उम्मीद लगाए बैठे है… पर कर्मियों को दौहरी मार तब लगी जब उनकी नन-स्टैच्यूटरी सुविधाएँ या तो बंद कर दी गईं या वर्षों से संशोधित नहीं हुईं।

👉जबकि SAIL की कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट 2010–11 में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि 2011–12 तक ये सुविधाएँ कर्मचारियों को उपलब्ध थीं।

📌 क्या है नन-स्टैच्यूटरी सुविधाएँ?

नन-स्टैच्यूटरी सुविधाएँ वे अतिरिक्त लाभ होते हैं, जो किसी कानून या अधिनियम के तहत अनिवार्य नहीं होते, बल्कि कंपनी अपनी नीतियों, परंपराओं और कर्मचारी कल्याण के उद्देश्य से प्रदान करती है।

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इनमें आवास ऋण, वाहन अग्रिम, चिकित्सा सहायता, शिक्षा सुविधा, छात्रवृत्ति, बीमा योजनाएँ, सेवानिवृत्ति सम्मान, दीर्घ सेवा पुरस्कार जैसी सुविधाएँ शामिल होती हैं।

इन सुविधाओं का उद्देश्य कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और बेहतर जीवन स्तर प्रदान करना होता है। लेकिन जब इन्हें वर्षों तक संशोधित नहीं किया जाता या बंद कर दिया जाता है,
तो इसका सीधा असर कर्मचारियों की आजीविका और मनोबल पर पड़ता है।

👉कालांतर में अधिकतर सुविधाओं का आर्थिक भार या तो कर्मचारियों पर डाल दिया गया या स्थगित कर दिया गया है या उन्हे संशोधित नही किया गया है ।

👉जबकि SAIL अधिकारी वर्ग की विशेष सुविधाओं (मोबाईल सेट खरीद, फर्निचर एडवांश, कंप्यूटर/लैपटॉप एडवांश , ड्रेस में आयकर छूट) को लगातार नए दर के हिसाब से संशोधित किया जा रहा है ।


कर्मियों की प्रमुख सुविधाएँ: अब वास्तविकता में नहीं…❌

1. सामूहिक दुर्घटना बीमा

  • दुर्घटना रोकथाम की जिम्मेदारी नियोक्ता की होने के बावजूद, प्रीमियम का पूरा भार कर्मचारियों पर डाल दिया गया है। दुर्घटनाओं में वृद्धि के साथ प्रीमियम भी बढ़ता जा रहा है।

2. अनुकंपा नियुक्ति और EFBS

  • सामान्य मृत्यु पर अनुकंपा नियुक्ति बंद कर दी गई, कार्यस्थल पर दुर्घटना तथा सलेक्टेड बिमारी से मृत्यु होने पर ही अनुकंपा नियुक्ति दिया जा रहा है । जबकि Coal India जैसे PSU में यह आज भी (समान्य मौत में भी) लागू है। इसके स्थान पर लाई गई EFBS योजना को कर्मचारी अपर्याप्त मानते हैं।

📌 क्या है EFBS योजना?

EFBS (Employee Family Benefit Scheme) एक ऐसी योजना है, जिसे सामान्य मृत्यु की स्थिति में अनुकंपा नियुक्ति के विकल्प के रूप में लागू किया गया है।

इस योजना के अंतर्गत यदि किसी कर्मचारी की सामान्य मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रितों कोकर्मचारी की शेष सेवा अवधि तक अंतिम मूल वेतन (Basic) + महंगाई भत्ता (DA) का भुगतान किया जाता है।

3. चिकित्सा व्यवस्था

  • SAIL के पास अपने अस्पताल, भवन और इंफ्रास्ट्रक्चर हैं, लेकिन डॉक्टर, उपकरण और स्टाफ की भारी कमी के कारण कर्मचारियों को SAIL के यूनिटो से देश के अन्य निजी/सरकारी अस्पतालों में भारी संख्या में मरीजो को रेफर किया जा रहा है। जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

4. शिक्षा सुविधा…

  • सेल के लगभग सभी यूनिटो में उसके द्वारा संचालित विद्दालय बंद कर दिए गए है या निजी विद्दालयों को सौंप दिए गए है ।
  • सेल की जमीन पर सैकड़ो की संख्या में निजी विद्दालय ट्रस्टो के माध्यम से संचालित है। जिसमें सेल के उच्च अधिकारी ट्रस्टी है।
  • साथ ही सेल के अधिकारीगणों के रिश्तेदार निजी विद्दालयों में कार्यरत है।
  • परंतु अधिकतर निजी विद्दालयों का शुल्क काफी अधिक (डीपीएस राँची को छोड़कर) है।
  • सेल के कर्मचारी डीपीएस राँची के तर्ज पर निजी विद्दालयों के शुल्क तय करने का मांग कर रहे है, परंतु प्रबंधन के अधिकारी निजी विद्दालयों के ट्रस्ट में ट्रस्टी रहने के बावजुद नही करवा रहे है।
  • सेल की तरफ से काफी कम दर पर निजी स्कुलो को जमीन, आवास दिया गया है । इसके अलावा बाजार दर से कम दर पर बिजली पानी की सप्लाई दिया जा रहा है ।

5 . मेडिक्लेम योजना –

  • यह योजना सेवानिवृत कर्मियों से प्रिमियम का भुगतान लेकर दी जा रही है।

6 . चाईल्ड केयर लीव –

  • यह योजना महिला कार्मिको तथा पुरुष कार्मिको के लिए लागु है ।

7.वाहन अग्रीम –

  • सेल कारपोरेट कार्यालय द्वारा इसको 2012 से स्थगित रखा गया है, जबकि पिछले 6 वित्त वर्षो से सेल को भारी मुनाफा हो रहा है तथा कुल कार्मिको की संख्या 50000 से नीचे आ गई है ।

8. आवास निर्माण अग्रीम –

  • सेल कारपोरेट कार्यालय द्वारा इसको 2012 से स्थगित रखा गया है।
  • इसमें बैंको के मुकाबले काफी कम दर पर आवास ऋण उपलब्ध कराया जाता था।
  • कर्मचारी अपने वेतन से कटौती कराकर आसानी से आवास ऋण समाप्त करा लेते थे। जब तक यह ऋण चालु था तब तक सेल के स्टील सिटी के बाहरी इलाको में काफी तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ था।
  • इस योजना के स्थगित होने से कर्मचारियों को निजी आवास लेने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
  • कोल इंडिया, एनटीपीसी, नालको, तेल पीएसयु, एनएमडीसी में यह योजना अभी भी चालु है ।

9. त्योहार अग्रीम –

  • अंतीम बार वर्ष 2008 में इस योजना को ₹2000 से बढ़ाकर ₹5000 किया गया। तब से अभी तक इतनी ही राशी, त्योहार अग्रीम के रुप में दी जा रही है। जो सेल कारपोरेट प्रबंधन की गलत नीतियों को प्रदर्शित कर रहा है ।

10 . लाईफ cover योजना –

  • इस योजना को सामुहिक ग्रुप दुर्घटना बीमा में ही मर्ज कर दिया गया है।

11 . दिर्घ सेवा पुरस्कार –

  • कई दशक से इस योजना में पुरस्कार सामाग्री को संशोधित नही किया गया है।
  • पुरे सर्विस काल में 25 वर्ष की सेवा पुरा करने के बाद सेलम स्टील का एक बर्तन सेट (औसतन मूल्य ₹4000) दिर्घ सेवा पुरस्कार के रुप में दिया जा रहा है ।
  • इसके विपरित इस्पात मंत्रालय की नवरत्ना कंपनी एनएमडीसी में 15 वर्ष से 40 वर्ष तक की नौकरी में कुल 5 बार 2 ग्राम स्वर्ण मुद्रा से लेकर 15 ग्राम स्वर्ण मुद्रा दिर्घ सेवा पुरस्कार के उपहार के रुप में दिया जा रहा है ।

12. सेवानिवृती सम्मान –

  • इस योजना मे भी वर्षो से उपहार के रुप में सेलम स्टील का बर्तन सेट (₹2500) दिया जा रहा है । जबकि नालको , एनएमडीसी में ₹40000 से अधिक का गिफ्ट कुपन दिया जाता है ।

13. छात्रवृत्ति योजना –

  • सेल कार्मिकों के मेधावी बच्चो को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई इस योजना में वर्षो से छात्रवृत्ति राशी को संशोधित नही किया गया है।
  • अभी भी मात्र ₹150—500 प्रति माह छात्रवृत्ति राशी तय है। जबकि टाटा स्टील से लेकर कई पीएसयु ₹5000—20000 तक अपने कार्मिकों के मेधावी बच्चो को छात्रवृत्ति दे रहे है ।

यूनियन की मांग: समानता और सम्मान…

👉उपरोक्त स्सटेनिबिलिटी रिपोर्ट 2011 में वर्णित नन स्टैचुअरी लाभो का लिस्ट ही वर्तमान सेल प्रबंधन की गलत नीतियों को बयाँ कर रहे है ।

बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ की मांग स्पष्ट है:-

  • नन-स्टैच्यूटरी सुविधाओं को कंपनी खर्च पर समयानुकूल संशोधित किया जाए!
  • नन-एग्जीक्यूटिव कर्मियों को भी मोबाइल, लैपटॉप, फर्नीचर एडवांस मिले…
  • बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए ऋण सुविधा हो
  • निःसंतान कर्मियों के लिए IVF जैसी मानवीय सुविधा जोड़ी जाए।

न्याय की लड़ाई जारी…

  • यूनियन का कहना है कि SAIL के कर्मी केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि कंपनी के वास्तविक स्टेकहोल्डर हैं।
  • वेतन समझौते और सुविधाओं में यह भेदभाव समाप्त नहीं हो रहा है इसीलिए यूनियन ने नीचे अंकित मुद्दों पर न्यायालय का रुख पहले ही कर रखा है…

⚖️ सेल कर्मियों से जुड़े प्रमुख न्यायिक मामले

  • वेज रीविजन केस (कैट प्रिंसिपल बेंच नई दिल्ली)-
  • NJCS में सिर्फ निर्वाचित यूनियन प्रतिनिधियों को सदस्य बनाने का केस —
  • NJCS को RTI के दायरे में रखने का केस —
  • बोकारो इस्पात संयंत्र यूनियन चुनाव वाला केस —
  • भिलाई इस्पात संयंत्र में यूनियन चुनाव वाला केस-
  • बोनस केस (प्रिंसिपल बेंच कैट नई दिल्ली ) —

निष्कर्ष: यह सिर्फ वेतन का मुद्दा नहीं, सम्मान का सवाल है

  • SAIL जैसे महारत्न PSU में कर्मियों और अधिकारियों के बीच बढ़ती खाई औद्योगिक शांति के लिए खतरे की घंटी है।
  • वेतन समझौते की अधूरी कहानी और सुविधाओं की कटौती यह संकेत देती है कि कर्मियों की आवाज को गंभीरता से सुनने की जरूरत है।
  • अब सवाल यह नहीं है कि कर्मी क्या मांग रहे हैं, सवाल यह है कि क्या उन्हें वह मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं?

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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज 

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