भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में डॉ. परमेश्वरी को हिंदी विषय में PhD की उपाधि

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग के दीक्षांत समारोह में भिलाई की डॉ. परमेश्वरी को हिंदी विषय में विद्यावाचस्पति (Doctor of Philosophy – PhD) की उपाधि प्रदान की गई।
  • उन्होंने यह शोध कार्य विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकाय के अंतर्गत पूर्ण किया।
  • यह उपलब्धि उनके वर्षों के अकादमिक परिश्रम और शोध के प्रति समर्पण का परिणाम है, जिसे विश्वविद्यालय स्तर पर विधिवत मान्यता मिली है।

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  • आइए विस्तार से जानते है उनके शोध के बारे में👇

डॉ. निधि वर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ शोध कार्य

👉डॉ. परमेश्वरी ने यह शोध कार्य डॉ. निधि वर्मा के मार्गदर्शन में पूर्ण किया।

👉शोध हिंदी साहित्य के उस पक्ष पर केंद्रित रहा, जो ग्रामीण समाज, उसकी संस्कृति और जीवन मूल्यों को गहराई से प्रस्तुत करता है।

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👉शोध के दौरान साहित्य को केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और यथार्थ के सशक्त माध्यम के रूप में देखा गया।

👉मार्गदर्शक के अकादमिक अनुभव और शोधार्थी की निरंतर मेहनत ने इस शोध को एक व्यवस्थित और गंभीर अध्ययन का स्वरूप प्रदान किया।


डॉ. निशंक के कथा साहित्य पर आधारित शोध

👉डॉ. परमेश्वरी का शोध उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं साहित्यकार डॉ. निशंक के कथा साहित्य पर आधारित रहा।

👉शोध का विषय “डॉ. निशंक के कथा साहित्य में अभिव्यक्त ग्रामीण संस्कृति एवं जीवन मूल्य” रहा, जिसमें ग्रामीण जीवन की सामाजिक स्थिति, मानवीय संवेदनाएं और नैतिक मूल्यों का विश्लेषण किया गया।

👉शोध में यह रेखांकित किया गया कि डॉ. निशंक के साहित्य में ग्रामीण समाज की वास्तविक परिस्थितियाँ, सामाजिक संबंध और जीवन संघर्ष किस प्रकार सशक्त रूप से अभिव्यक्त होते हैं।

👉यह अध्ययन हिंदी साहित्य के शोध क्षेत्र में ग्रामीण चेतना को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

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परिवार के सहयोग से मिली सफलता

👉डॉ. परमेश्वरी ने अपनी इस शैक्षणिक उपलब्धि का श्रेय अपनी मार्गदर्शिका डॉ. विद्यावती को देते हुए कहा कि उनके सतत मार्गदर्शन और सहयोग से ही शोध कार्य को सही दिशा मिली।

👉इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि उनके पति डॉ. निशांत बघेल तथा उनकी सासू मां श्रीमती लता बघेल का निरंतर सहयोग, विश्वास और प्रोत्साहन इस पूरी शोध यात्रा के दौरान उनके लिए सबसे बड़ा संबल रहा।

👉परिवार के सहयोग ने उन्हें शोध कार्य को धैर्य और एकाग्रता के साथ पूर्ण करने की प्रेरणा दी।

👉लंबे समय तक चलने वाले शोध में मानसिक संतुलन और निरंतर अध्ययन की आवश्यकता होती है, जिसमें परिवार का सहयोग एक मजबूत आधार प्रदान करता है।


हिंदी साहित्य और सामाजिक अध्ययन के लिए महत्व

👉यह शोध हिंदी साहित्य के साथ-साथ सामाजिक अध्ययन के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है।

👉ग्रामीण संस्कृति और जीवन मूल्यों पर केंद्रित अध्ययन आज के समय में इसलिए भी प्रासंगिक है, क्योंकि सामाजिक परिवर्तन के दौर में पारंपरिक मूल्यों और जीवनशैली में निरंतर बदलाव देखने को मिल रहा है।

👉शोध के निष्कर्ष शिक्षाविदों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में कार्य कर सकते हैं।


भिलाई के लिए गौरव का विषय

👉PhD की उपाधि प्राप्त कर डॉ. परमेश्वरी ने न केवल अपनी अकादमिक पहचान स्थापित की है, बल्कि भिलाई शहर का नाम भी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सम्मान के साथ प्रस्तुत किया है।

👉उनकी यह उपलब्धि विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो हिंदी साहित्य और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।


निष्कर्ष

भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में डॉ. परमेश्वरी को मिली PhD की उपाधि यह दर्शाती है कि निरंतर परिश्रम, सही मार्गदर्शन और सहयोग से अकादमिक लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता है।उनका शोध हिंदी साहित्य में ग्रामीण संस्कृति और जीवन मूल्यों के अध्ययन को एक नई दृष्टि प्रदान करता है।


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रिपोर्ट: डिजिटल भिलाई न्यूज 

 

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