Bhilai Steel Plant: गेट पर नाम दर्ज करने की प्रक्रिया पर यूनियन का विरोध, प्रबंधन से समाधान की मांग”

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– DIGITAL BHILAI NEWS – (BHILAI STEEL PLANT)

  • भिलाई इस्पात संयंत्र में कर्मचारियों की कार्य-संस्कृति सदैव आपसी विश्वास, संवाद और सहयोग पर आधारित रही है।
  • कर्मियों ने समय-समय पर प्रबंधन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्थाओं को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है और संयंत्र हित में पूर्ण सहयोग प्रदान किया है।
  • ऐसे में हाल ही में गेट पर कर्मियों के नाम लिखने की व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों में जो असहजता उत्पन्न हुई है, वह एक गंभीर विचारणीय विषय बनकर सामने आई है।
  • इस मुद्दे को लेकर अब बीएसपी वर्कर्स यूनियन खुलकर सामने आ गई है और प्रबंधन से स्पष्ट जवाब व समाधान की मांग कर रही है।
  • आइये विस्तार से जानते है क्या है पूरा मामला👇


क्या है पूरा मामला ? गेट पर नाम नोट करने की व्यवस्था ?

👉संयंत्र में कार्यरत कई कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान विभिन्न आधिकारिक कारणों से प्लांट परिसर से बाहर जाना पड़ता है।

👉इनमें प्रमुख रूप से सेक्टर-9 अस्पताल में मेडिकल कार्य, इस्पात भवन में प्रशासनिक कार्य, HRDC, IR विभाग या अन्य अधिकृत विभागीय काम शामिल होते हैं।

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👉यूनियन का कहना है कि ऐसे मामलों में भी गेट पर CISF के माध्यम से कर्मियों के नाम और पर्सनल नंबर नोट किए जा रहे हैं।


कर्मियों में बढ़ती असहजता और अविश्वास की भावना

👉यूनियन के अनुसार, ड्यूटी समय के दौरान संयंत्र से बाहर जाने वाले कर्मचारियों के नाम गेट पर नोट किए जाने की वर्तमान व्यवस्था ने कर्मचारियों में निराशा और मानसिक दबाव की स्थिति उत्पन्न कर दी है।

👉कर्मियों का मानना है कि इस प्रकार की प्रक्रिया प्रबंधन द्वारा अपने ही कर्मचारियों के प्रति विश्वास की कमी को दर्शाती है।

👉यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक निगरानी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इससे कर्मचारियों में अनावश्यक भय और पैनिक की स्थिति बन रही है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव उनके व्यक्तिगत जीवन, मानसिक संतुलन और कार्य-शैली पर भी पड़ रहा है। यूनियन का स्पष्ट मत है कि यह तरीका भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापित कार्य-संस्कृति के अनुरूप नहीं है।


जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद यूनियन का सख्त रुख

👉हाल ही में सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे के साथ बीएसपी के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी, जिसमें कर्मचारियों से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी बैठक के बाद बीएसपी वर्कर्स यूनियन ने कर्मियों के समर्थन में पूरी मजबूती से मोर्चा संभाल लिया है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर यूनियन का पक्ष-

  • बी.एस.पी. वर्कर्स यूनियन ने कहा है कि सांसद श्री विजय बघेल एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमप्रकाश पांडे द्वारा कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से उठाना एक सकारात्मक कदम है। यूनियन ने उनके इस प्रयास के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। यूनियन का विश्वास है कि जनप्रतिनिधियों, प्रबंधन एवं श्रमिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से ही संयंत्र में सुरक्षित, सम्मानजनक एवं सकारात्मक कार्य-वातावरण स्थापित किया जा सकता है।

👉यूनियन अध्यक्ष उज्जवल दत्ता के नेतृत्व में यूनियन प्रतिनिधिमंडल ने IR विभाग के माध्यम से निदेशक प्रभारी के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें कर्मचारियों की समस्याओं और उनके व्यावहारिक समाधान को स्पष्ट रूप से रखा गया।


प्रबंधन के समक्ष रखी गई 7 व्यावहारिक मांगें

यूनियन अध्यक्ष उज्जवल दत्ता के नेतृत्व में बी.एस.पी. वर्कर्स यूनियन ने औद्योगिक संबंध (IR) विभाग के माध्यम से निदेशक प्रभारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए निम्नलिखित सुझाव और मांगें रखी हैं—

1. दुर्घटनाओं की जड़ तक जाने की आवश्यकता

👉संयंत्र के भीतर घटित हो रही दुर्घटनाओं के मूल कारणों की पहचान हेतु प्रबंधन और यूनियन की संयुक्त बैठक आयोजित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

2. सुरक्षित आवागमन के लिए पृथक पाथवे

👉दुर्गापुर स्टील प्लांट की तर्ज पर पैदल और साइकिल से आने वाले कर्मियों के लिए अलग एवं सुरक्षित पाथवे का शीघ्र निर्माण किया जाए।

3. सुरक्षा सुझावों को समय और गंभीरता

👉जब यूनियन सुरक्षा के नाम पर किसी विभाग प्रमुख से मिलकर सुझाव देती है, तो उसे औपचारिकता के बजाय गंभीरता से लिया जाए। यूनियन का कहना है कि पूर्व में ओएचपी विभाग में जिन बिंदुओं की अनदेखी की गई, उन्हीं चिन्हित स्थलों पर बाद में दुर्घटनाएँ हुईं, जिनके दुष्परिणाम सभी के सामने हैं।

4. बोरिया गेट समय में यथार्थ सुधार

👉बोरिया गेट का समय वर्तमान 6:30 बजे से बढ़ाकर 7:00 बजे किया जाए तथा नाइट शिफ्ट में गेट एंट्री 9:30 बजे के स्थान पर 9:00 बजे निर्धारित की जाए, क्योंकि 30 किमी/घंटा की गति सीमा में विभाग तक समय पर पहुँचना कर्मचारियों के लिए कठिन हो जाता है।

5. अस्पताल समय में कर्मचारियों को राहत

👉जनरल शिफ्ट के कर्मचारियों को ड्यूटी के बाद डॉक्टर को दिखाने में कठिनाई होती है, अतः अस्पताल का शाम का समय 5:00 बजे से 7:00 बजे तक किया जाए। (अभी 4 बजे से 6 बजे तक है।)

6. संयंत्र क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएँ

👉संयंत्र के भीतर समुचित कैंटीन व्यवस्था की जाए तथा इस्पात भवन की तर्ज पर प्लांट क्षेत्र में भी कॉफी हाउस की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

7. ठेका श्रमिकों के अधिकार सुनिश्चित हों

👉ठेका श्रमिकों को उनका निर्धारित वेतन एवं सभी वैधानिक सुविधाएँ पूर्ण रूप से उपलब्ध कराई जाएँ।


यूनियन का स्पष्ट संदेश

👉बी.एस.पी. वर्कर्स यूनियन ने यह स्पष्ट किया है कि वह सदैव संयंत्र हित, समयबद्ध कार्य निष्पादन और अनुशासन की समर्थक रही है। लेकिन भय और दबाव के वातावरण में कार्य कराना न तो उचित है और न ही यह भिलाई इस्पात संयंत्र की पहचान रही है। यूनियन ने अपेक्षा जताई है कि कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रबंधन शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगा।


ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से शामिल

इस अवसर पर यूनियन अध्यक्ष उज्जवल दत्ता,
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित बर्मन, शेख महमूद,
कार्यकारी महासचिव शिव बहादुर सिंह,
अतिरिक्त महासचिव दिलेश्वर राव,
प्रदीप सिंह, विमल पांडे, मनोज डडसेना, नरसिंह राव, राजकुमार सिंह, धनंजय गिरि, दीपेश कुमार चुघ, अभिषेक सिंह, ईमान सिन्हा, संदीप सिंह, रोशन पगार, संतोष पांडा एवं सौमित्र विश्वास उपस्थित रहे।


निष्कर्ष

👉यह पूरा मामला किसी एक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के विश्वास, सम्मान और कार्य-संस्कृति से जुड़ा विषय है। अब यह प्रबंधन पर निर्भर करता है कि वह संवाद और समन्वय के माध्यम से समाधान की दिशा में कदम बढ़ाता है या नहीं।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़ 

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