BSP Retention Policy: नए नियम लागू, 6 महीने बाद किराया 3 गुना! Ex-Employees में बढ़ी चिंता
– DIGITAL BHILAI NEWS – (NEW RETENTION POLICY) –
- भिलाई स्टील प्लांट ने कंपनी क्वार्टर रिटेंशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 2020 की पुरानी नीति को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है।
- नए आदेश के मुताबिक अब सेपरेशन के बाद कंपनी क्वार्टर रखने की अवधि, किराया और अतिरिक्त शुल्क पूरी तरह बदल दिए गए हैं।
- खास बात यह है कि 6 महीने बाद किराया तीन गुना बढ़कर ₹24 प्रति वर्गफुट हो जाएगा।
- आदेश जारी होते ही रिटायर कर्मचारियों और आगे रिटायर होने वाले कर्मियों, उनके परिवारों में बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि नई नीति में क्वार्टर के किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है और रिटेंशन अवधि भी काफी कम कर दी गई है।
- इसी बिच संयंत्र की BSP वर्कर्स यूनियन ने इस नए आदेश को अनुचित बताते हुए एक खास विकल्प का सुझाव रखा है।
- आइये जानते है क्या है विस्तृत आदेश👇
बैकग्राउंड:-
👉2020 में “Retention of Company Quarters after Separation” नाम से पॉलिसी लागू हुई थी। इसका उद्देश्य रिटायर/सेपरेट हुए कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद कुछ समय के लिए राहत देना था। पुरानी पॉलिसी के चलते कई BSP रिटायर्ड कर्मचारी क्वार्टर लंबे समय तक रखते रहे, जिससे कार्यरत कर्मचारियों को अच्छे आवास allotment में परेशानिया होती थी। अब प्रबंधन ने नई, ज्यादा सख्त और हाई-कॉस्ट रिटेंशन नीति लागू की है।
नए आदेश की मुख्य बातें (Office Order O&M/Procedure/1613)
👉17 नवंबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार नई गाइडलाइन तुरंत लागू।
1. केवल 2 महीने का Grace Period – सेपरेशन के बाद अधिकतम 2 महीने तक क्वार्टर रखा जा सकेगा।
2. 3–6 महीने की अवधि में नया किराया – ₹8 प्रति sqft 2 महीने बाद यदि कोई ex-employee क्वार्टर रखता है, तो ₹8 प्रति वर्गफुट (Third Party Rate) लागू होगा।
3. 6 महीने के बाद किराया: ₹24 प्रति sqft (तीन गुना बढ़ोतरी) यह आदेश का सबसे बड़ा बिंदु है। उदाहरण: यदि क्वार्टर का Plinth Area 650 sqft है तो 6 महीने बाद किराया ₹15,600 प्रति माह होगा।
4. जिनका रिटेंशन पहले से चल रहा है उनकी मौजूदा अवधि पुरानी स्कीम के अनुसार रहेगी। लेकिन 6 महीने पूरा होते ही नए रेट (₹24/sqft) लागू हो जाएंगे।
5. 1 दिसंबर 2025 से नए रेट लागू होंगे अर्थात आदेश आने के सिर्फ 14 दिन बाद नियम लागू।
6. बिना अनुमति के क्वार्टर रखने पर दंडात्मक कार्रवाई PP Act 1971 के तहत अवैध कब्जे पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान।
किराया तुलना तालिका (Rent Comparison Table)
| अवधि | लागू किराया | विवरण |
|---|---|---|
| 0 से 2 महीने | मौजूदा कर्मचारी के बराबर सामान्य किराया | रिटायरमेंट के तुरंत बाद की अवधि |
| 3 से 6 महीने | ₹8 प्रति वर्गफुट प्रति माह | थर्ड पार्टी रेट के अनुसार |
| 6 महीने के बाद | ₹24 प्रति वर्गफुट प्रति माह | अत्यधिक उच्च दर, विवाद का मुख्य कारण |
| पुरानी स्कीम के भीतर | पुरानी नीति की दर | अवधि समाप्त होने तक लागू |

Impact Analysis: किस पर क्या असर पड़ेगा?
👉इसका सीधा प्रभाव Ex-employees पर पड़ेगा – किराया बढ़ने से आर्थिक दबाव के कारण अधिकतर लोग 2–3 महीने में ही क्वार्टर खाली कर देंगे।
👉इन EX कर्मचारियों की सेक्टर-9 की चिकित्सा सुविधा पर निर्भरता एवं अन्य कारणों से वे BSP क्वार्टर को अपने पास रिटेंशन पालिसी के तहत रखते थे।
👉आगे रिटायर होने वाले कर्मियों की भी चिंता बढ़ गयी है…. बहुत से कर्मी ऐसे भी है जिन्होंने अपने बच्चो की उच्च शिक्षा पर पैसा लगाया और खुद का मकान नहीं बना पाए उनके लिए पुरानी रिटेंशन POLICY एक सहारा थी।
BSP Workers Union की सख्त आपत्ति: “मकान खाली करवाने की मंशा साफ दिख रही है।
👉नई पॉलिसी के बाद BSP Workers Union की ओर से प्रतिक्रिया आई है। यूनियन ने कहा है कि किराया बढ़ाना समाधान नहीं है, बल्कि यह निर्णय स्पष्ट रूप से क्वार्टर खाली करवाने की मंशा दर्शाता है।
👉यूनियन का कहना है कि प्रबंधन थर्ड पार्टी को बड़े-बड़े आवास लाइसेंस पर दे सकता है, लेकिन अपने ही रिटायर कर्मचारियों के सामने इतनी कठोर शर्तें रख रहा है—यह उचित नहीं है।
👉BSP Workers Union का तर्क है कि कई रिटायर कर्मचारी सेक्टर-9 अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं पर निर्भर हैं। बुजुर्ग आयु, पुरानी बीमारियाँ और नियमित इलाज उन्हें अन्य जगह जाने कीअनुमति नहीं देते।
👉इसके अलावा अनेक परिवारों के बच्चे बाहर नौकरी कर रहे हैं, जिससे बुजुर्ग दंपति अकेले रहते हैं और उनके लिए सुरक्षा व सुविधा सबसे प्राथमिक मुद्दा है। ऐसे में अचानक किराए में भारी वृद्धि सिर्फ आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि एक मानसिक दबाव भी है।
👉यूनियन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि पहले रिटेंशन अवधि के लिए सुरक्षा राशि लगभग नौ लाख रुपये जमा रहती थी, जिससे प्रबंधन को किसी भी बकाया की रिकवरी का पर्याप्त आधार मिल जाता था। लेकिन अब नए आदेश में फाइनल पेमेंट रोककर रिकवरी करने का उल्लेख किया गया है, जिससे कर्मचारियों में भय और असुरक्षा बढ़ गई है।
👉यूनियन का कहना है कि फाइनल सेटलमेंट रोकना किसी भी रिटायर कर्मचारी के लिए सबसे ज्यादा कष्टदायक स्थिति होती है, क्योंकि वही धन उसकी सुरक्षित वृद्धावस्था का आधार है।
यूनियन का समाधान प्रस्ताव: “650 sq ft लाइसेंस मॉडल ही वास्तविक विकल्प”
👉BSP Workers Union ने प्रबंधन को एक ठोस और व्यावहारिक सुझाव दिया है। उनके मुताबिक, यदि रिटायर कर्मचारियों को 650 वर्गफुट तक के क्वार्टर लाइसेंस आधार पर उपलब्ध करा दिए जाएँ, तो यह समस्या बड़े पैमाने पर हल हो सकती है। इससे प्रबंधन पर कोई अतिरिक्त बोझ भी नहीं बनेगा।
👉यूनियन का कहना है कि इस मॉडल से रिटायर कर्मचारी सुरक्षित घर में रह सकेंगे और उन्हें अत्यधिक किराए का बोझ नहीं झेलना पड़ेगा।
👉यूनियन ने इसे “मानवीय और न्यायपूर्ण समाधान” बताया है, जो न केवल आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक है बल्कि भावनात्मक रूप से भी उचित है।
यूनियन की दूसरी मांग: जर्जर क्वार्टरों के बीच नए कर्मचारियों के लिए 3-BHK फ्लैट बनाने का प्रस्ताव :
👉BSP Workers Union ने रिटायर कर्मचारियों की समस्याओं के साथ एक और अहम मुद्दा उठाया है। यूनियन का कहना है कि भिलाई टाउनशिप में मौजूद अधिकांश पुराने क्वार्टर वर्षों की उपेक्षा और रखरखाव की कमी के कारण अब जर्जर हो चुके हैं। ऐसे क्वार्टरों का आवंटन न तो सुरक्षित है और न ही नए कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक आवास व्यवस्था का प्रतीक माना जा सकता है।
👉इसी कारण यूनियन ने प्रबंधन से आग्रह किया है कि आने वाले समय में नए कर्मचारियों के लिए कम से कम तीन बेडरूम वाले आधुनिक फ्लैटों का निर्माण किया जाए ताकि न केवल रहने की सुविधा बेहतर हो, बल्कि कर्मचारियों के समाज में प्रतिष्ठा और सरोकार भी बढ़ें।
👉BSP WORKERS यूनियन का मानना है कि मजबूत, आधुनिक और सुरक्षित आवास व्यवस्था नए कर्मचारियों में विश्वास पैदा करेगी और संयंत्र की छवि को भी बेहतर बनाएगी।
निष्कर्ष
नए किराया नियमों के चलते ex-employees के लिए लंबे समय तक क्वार्टर रोकना कठिन हो जाएगा। रिटायर कर्मचारी सिर्फ “क्वार्टर धारक” नहीं हैं—वे वे लोग हैं जिन्होंने 30-35 साल संयंत्र को दिया है। उनके लिए क्वार्टर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि जीवन भर की दिनचर्या और सुविधा का केंद्र है। सेक्टर-9 की चिकित्सा सुविधा उनके लिए जीवनरेखा है। उम्र के इस पड़ाव में नया घर ढूँढना, स्थान बदलना और आर्थिक व्यवस्था संभालना—ये सब असंभव जैसा होता है। इसलिए यह मुद्दा केवल प्रशासनिक नीति का नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी है।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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