अमर बलिदानी गोविन्द गुरु की पुण्यतिथि पर BSP ST Employees Welfare Association ने दी श्रद्धांजलि
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- अमर बलिदानी एवं आदिवासी जननायक गोविन्द गुरु (Govind guru) की पुण्यतिथि/बलिदान दिवस पर, Bhilai Steel Plant Scheduled Tribe Employees Welfare Association द्वारा आज श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
- कार्यक्रम में आदिवासी समाज, वीर शहीदों के इतिहास, संस्कृति और उनके सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की गई।
- आइए जानते है अमर बलिदानी Govind guru जी के बारे में 👇

कौन थे Govind guru ? — एक संक्षिप्त परिचय
👉गोविन्द गुरु जी का जन्म 20 दिसंबर 1858 बांसिया, डूंगरपुर (राजस्थान) में हुआ था।
👉वे बंजारा/भील समुदाय के अग्रणी समाज सुधारक, आध्यात्मिक नेता और स्वतंत्रता आंदोलन के योद्धा थे।
👉उन्होंने आदिवासी समाज को शिक्षा, नशामुक्ति, संगठन और आत्मसम्मान की राह दिखाते हुए, सामंती अत्याचार और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का संचालन किया।
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सम्प सभा आंदोलन और सामाजिक जागरण
👉गोविन्द गुरु जी ने वर्ष 1883 में “सम्प सभा” की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य था—
- शराबबंदी
- जुआ-निरोध
- चोरी-दमन
- सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन
- शिक्षा का प्रसार
- समुदाय की स्वावलंबन यात्रा
👉इस आंदोलन ने हजारों भील/आदिवासियों को एक सूत्र में बाँधा। ब्रिटिश सत्ता व स्थानीय जमींदारों द्वारा किए गए शोषण के विरुद्ध यह एक ऐतिहासिक सामाजिक-राजनीतिक क्रांति थी।
मानगढ़ धाम: दूसरी जलियाँवाला बाग
👉17 नवंबर 1913 — यह केवल तारीख नहीं, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे हृदय विदारक घटनाओं में से एक का प्रतीक है।
👉मानगढ़ पहाड़ी पर शांतिपूर्वक एकत्रित हुए निहत्थे आदिवासी पुरुष-महिलाओं और बच्चों पर ब्रिटिश सेना ने गोलियाँ बरसाईं, जिसमें 1500+ से अधिक लोग शहीद हुए।
👉इसे आज “आदिवासियों का जलियाँवाला बाग” भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस नरसंहार के बाद भी गोविन्द गुरु का साहस और स्वाभिमान अडिग रहा।
👉उनकी आध्यात्मिक धारा भगत पंथ ने आदिवासी संस्कृति, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा दी। वे 30 अक्टूबर 1931 को वीरगति को प्राप्त हुए।

भिलाई में श्रद्धांजलि कार्यक्रम
👉30 अक्टूबर 2025 को आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में एसोसिएशन के सदस्यों ने 🪔 दीप प्रज्वलित कर 🌺 पुष्प अर्पित कर 🙏 मौन रखकर बलिदानी गोविन्द गुरु को नमन किया।

👉कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि उनकी शिक्षाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षण गतिविधियाँ, स्मृति आयोजन और सामाजिक उत्थान कार्य आगे बढ़ाए जाएँगे।

अध्यक्ष प्रदीप टोप्पो ने क्या कहा?
👉अध्यक्ष प्रदीप टोप्पो ने कहा—
“महान क्रांतिकारी, समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी शहीद गोविन्द गुरु जी का जीवन हमें बताता है कि संघर्ष, त्याग और संगठन से ही परिवर्तन संभव है। आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान के प्रतीक गोविन्द गुरु सदैव हमारे प्रेरणा-स्त्रोत रहेंगे।”
👉उन्होंने आगे कहा कि — “मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने की माँग हम निरंतर जारी रखेंगे। इस अभियान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”
संकल्प — आदिवासी उत्थान की दिशा में आगे बढ़ना
👉कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने यह सामूहिक संकल्प लिया—
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आदिवासी समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आर्थिक उन्नति सुनिश्चित करेंगे
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मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की माँग तेज की जाएगी
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गोविन्द गुरु के जीवन व बलिदान को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की पहल होगी
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डिजिटल अभिलेखागार व संग्रहालय स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित
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श्री प्रदीप टोप्पो — अध्यक्ष
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श्री अजय कुमार — कार्यकारी अध्यक्ष
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श्री श्याम सुंदर मुर्मू — महासचिव
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श्री बी.बी. सिंह — उपाध्यक्ष (प्रथम)
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श्री ललित कुमार बघेल — संयुक्त महासचिव (प्रथम)
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श्री भिमांशु कच्छप — कोषाध्यक्ष
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श्री हेमलाल करमाली — सह-कोषाध्यक्ष
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श्री नरेश हांसदा — जोनल सचिव
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श्री राम सिंह मरकाम — कार्यकारिणी सदस्य
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श्री हरीशचंद्र — संयोजक (पर्यावरण, मौलिक अधिकार एवं सुरक्षा)
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अन्य सदस्य — धरमवीर मरकाम
आदिवासी इतिहास में गोविन्द गुरु का महत्व
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उनका जीवन आदिवासी समाज में सामाजिक-धार्मिक सुधारों की आधारशिला है
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उन्होंने ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध जन-विद्रोह की अगुवाई की
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मानगढ़ नरसंहार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अनदेखा अध्याय है
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उनका आंदोलन, महात्मा गाँधी की ग्रामीण जागरण नीति जैसा जनकेंद्रित था
निष्कर्ष
गोविन्द गुरु का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—
“शिक्षा, स्वाभिमान और संगठन ही मुक्ति का मार्ग है।”
भिलाई स्टील प्लांट ST Employees Welfare Association द्वारा आयोजित यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम एक प्रेरक पहल है, जो सामाजिक चेतना, ऐतिहासिक स्मृति और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास है।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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