सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट ने रचा नया कीर्तिमान – 116 हीट के साथ भिलाई स्टील प्लांट में रिकॉर्ड
– DIGITAL BHILAI NEWS –
29 – JULY – 2025 – (SAIL REFRACTORY UNIT की खबर)
सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट (SRU) ने भिलाई इस्पात संयंत्र (Bhilai Steel Plant) की स्टील मेल्टिंग शॉप-III (SMS-III) में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट (SAIL Refractory Unit – SRU) द्वारा आपूर्ति किए गए स्टील लैडल क्रमांक-15 ने 116 हीट्स पूरे करते हुए अब तक का सर्वोच्च रिकॉर्ड बनाया है। यह केवल तकनीकी जीत नहीं, बल्कि टीम वर्क, नवाचार और लागत-प्रभावी उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम है।

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🔹जानिए क्या है वो नई उपलब्धि ?
इस अभियान में लैडल क्रमांक-15 ने अब तक का सर्वाधिक 116 हीट पूरा कर ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया। यह लैडल “सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट” द्वारा आपूर्ति किया गया था।
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इस लैडल की कैपिटल रिपेयर 27 मई 2025 को की गई थी।
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30 मई 2025 को इसमें पहला हीट लिया गया।
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इसके बाद लगातार उपयोग में आने के बावजूद लैडल ने 116 हीट्स पूरे किए।
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इससे पहले का औसत लगभग 100 हीट प्रति लैडल रहा करता था, जिसे SRU ने लगातार बनाए रखा।
👉 इस उपलब्धि को खास बनाता है कि लैडल की लाइफ बढ़ने से न केवल उत्पादन सुचारू हुआ बल्कि कास्ट एफिशिएंसी और क्वालिटी दोनों में सुधार हुआ।
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🔹 बैकग्राउंड: स्टील लैडल का महत्व
स्टील उत्पादन में लैडल (Ladle) वह बर्तन है जिसमें पिघला हुआ स्टील (Molten Steel) टांपा और परिवहन किया जाता है।
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इसकी परत (Refractory Lining) उच्च तापमान और रासायनिक प्रतिक्रिया सहन करने के लिए बनाई जाती है।
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जितनी अधिक लैडल लाइफ होगी, उतनी ही कम रिपेयर और री-लाइनिंग की जरूरत पड़ेगी।
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इससे डाउन टाइम (Down Time) घटता है और उत्पादन निरंतर चलता रहता है।
भिलाई स्टील प्लांट जैसे बड़े संयंत्र में, जहाँ प्रतिदिन हजारों टन स्टील का उत्पादन होता है, वहां एक लैडल की अतिरिक्त 15–20 हीट्स की लाइफ भी उत्पादन लागत पर बड़ा फर्क डालती है।

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🔹 टीम वर्क और नेतृत्व
यह उपलब्धि केवल तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि टीमवर्क और सूझबूझ का परिणाम है।
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सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट (SRU) ने लैडल की उच्च-गुणवत्ता वाली सप्लाई और समय पर रिपेयर सुनिश्चित की।
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रिफ्रैक्टरी इंजीनियरिंग विभाग ने मरम्मत के दौरान सभी तकनीकी पहलुओं का बारीकी से ध्यान रखा।
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SMS-III टीम ने संचालन के दौरान लैडल की निगरानी में अत्यधिक सतर्कता बरती।
भिलाई स्थित SRU के मुख्य महाप्रबंधक श्री विशाल शुक्ल के मार्गदर्शन में लैडल के विभिन्न जोनों की आवश्यकता अनुसार रिपेयर की गई और निरंतर मॉनिटरिंग की गई।
कार्यपालक निदेशक (SRU) श्री पी. के. रथ ने टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कीर्तिमान भविष्य के लिए प्रेरणादायी है और SRU इसी तरह नए मानक स्थापित करता रहेगा।
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🔹 उत्पादन लागत और तकनीकी-अर्थशास्त्र पर असर
इस उपलब्धि का प्रभाव सिर्फ रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है।
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लागत में कमी (Cost Reduction): बार-बार लैडल बदलने और रिपेयर पर होने वाला खर्च घटा।
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उत्पादकता में सुधार (Productivity): कम डाउन टाइम और स्मूद प्रोडक्शन से उत्पादन दर बढ़ी।
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क्वालिटी में स्थिरता (Quality Consistency): लगातार अच्छे प्रदर्शन से स्टील की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर पड़ा।
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तकनीकी-अर्थशास्त्र में मजबूती (Techno-Economics): लैडल की अधिक लाइफ ने संयंत्र की समग्र दक्षता को बढ़ाया।
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🔹 निष्कर्ष
सेल रेफ़्रेक्ट्री यूनिट द्वारा यह रिकॉर्ड सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह बताता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, तकनीकी उत्कृष्टता और टीम वर्क से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
SRU की टीम ने साबित कर दिया कि अगर रणनीति, नेतृत्व और निष्पादन सही हो तो स्टील उत्पादन में नई ऊंचाइयाँ पाना संभव है।
👉 आने वाले समय में उम्मीद है कि SRU और भी बड़े कीर्तिमान रचकर भिलाई स्टील प्लांट को वैश्विक मानचित्र पर और ऊंचा स्थान दिलाएगा।
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रिपोर्ट – DIGITAL BHILAI NEWS
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K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

