टीम “मारूति” ने MCCQC-2025, मदुरै चैप्टर में हासिल की दोहरी उपलब्धि — “Best Case Study” और “Gold Award” से सम्मानित
- भिलाई इस्पात संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस विभाग की टीम “MARUTI” ने एक बार फिर संयंत्र का नाम रोशन किया है।
- टीम ने MCCQC-2025 (Madurai Chapter Convention on Quality Concepts) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दो प्रतिष्ठित पुरस्कार — “Best Case Study Award” और “Gold Award” अपने नाम किए हैं।
- यह सफलता न केवल टीम की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है, बल्कि क्वालिटी सुधार और नवाचार के प्रति BSP के सतत प्रयासों को भी दर्शाती है।
- आइये विस्तार से जानते है उनके प्रोजेक्ट के बारे में जिसने उन्हें बेस्ट केस स्टडी का अवार्ड दिलाया👇
👉इस वर्ष MCCQC-2025 सम्मेलन में देशभर की दर्जनों इंडस्ट्रियल क्वालिटी सर्किल टीमों ने अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए।
👉भिलाई स्टील प्लांट की “मारूति टीम” ने अपने प्रोजेक्ट के ज़रिए यह दिखाया कि कैसे एक जटिल औद्योगिक समस्या का समाधान इन-हाउस तकनीकी कौशल के बल पर किया जा सकता है।
👉टीम को प्रस्तुत केस स्टडी के व्यावहारिक दृष्टिकोण, लागत बचत और नवाचारपूर्ण कार्यान्वयन के लिए विशेष रूप से सराहा गया।
MCCQC सम्मेलन क्या है?
👉MCCQC (Madurai Chapter Convention on Quality Concepts), Quality Circle Forum of India (QCFI) द्वारा आयोजित एक वार्षिक सम्मेलन है, जिसमें देशभर की औद्योगिक इकाइयों से सैकड़ों टीमें भाग लेती हैं।
इन टीमों को अपने प्रोजेक्ट्स, नवाचार और क्वालिटी सुधार कार्यों को प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।
👉इस प्रतियोगिता में BSP की “टीम MARUTI” ने अपने केस स्टडी के जरिए न केवल निर्णायकों को प्रभावित किया,
बल्कि प्रयोगिक (Practical) और लागत-संवेदनशील (Cost-effective) समाधान प्रस्तुत कर सबका ध्यान खींचा।


प्रोजेक्ट शीर्षक और समस्या का विश्लेषण
👉प्रोजेक्ट शीर्षक:
“ब्लास्ट फर्नेस #8 के Pulverized Coal Injection System में प्रयुक्त Vertical Rolling Mill के Drag Chain Conveyor Plates की बार-बार होने वाली खराबी को इन-हाउस फैब्रिकेशन द्वारा कम करना।”
👉प्रमुख समस्या:
कोयला ग्राइंडिंग मिल में प्रयुक्त Drag Chain Conveyor Plates लगातार कोयला, धूल और नमी के संपर्क में रहते हैं।
साधारण माइल्ड स्टील प्लेट्स के कारण ये प्लेट्स जल्दी घिस जाती थीं, जिससे बार-बार ब्रेकडाउन, प्रोडक्शन लॉस, और मेंटेनेंस कॉस्ट में वृद्धि होती थी।
👉विश्लेषण:
टीम ने पाया कि समस्या का मूल कारण था —
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प्लेट्स की अपर्याप्त कठोरता,
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गलत डाइमेंशनिंग,
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और हीट ट्रीटमेंट की कमी।
इन कारणों से कन्वेयर प्लेट्स बार-बार रिप्लेस करनी पड़ती थीं,
जिससे उत्पादन प्रभावित होता था और सिस्टम की कुल दक्षता घटती थी।
👉समाधान: इन-हाउस फैब्रिकेशन से आत्मनिर्भरता की ओर
टीम “MARUTI” ने इस चुनौती को अवसर में बदला। एरिया रिपेयर शॉप में एक मानकीकृत प्रक्रिया विकसित की गई —
जिसमें कटिंग, मार्किंग, ड्रिलिंग, हार्डनिंग और फिटमेंट टेस्टिंग सभी चरणों को नियंत्रित किया गया।
इस प्रक्रिया से निर्मित नई प्लेट्स ने न केवल टिकाऊपन में सुधार किया,
बल्कि इन-हाउस निर्माण से आर्थिक बचत और समय की बचत दोनों हासिल हुईं।
👉प्रमुख उपलब्धियां और लाभ🙏🏻
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प्रति वर्ष 292 प्लेट्स का इन-हाउस निर्माण, जिससे लगभग ₹3.25 करोड़ की वार्षिक बचत।
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ब्रेकडाउन समय में कमी और उत्पादन दक्षता में वृद्धि।
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टीम की तकनीकी क्षमता, समन्वय और मेंटेनेंस योजना में व्यापक सुधार।
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स्थानीय संसाधनों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला।
टीम “MARUTI” की संरचना
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श्री रवि किशोर मौर्य, JEA, ब्लास्ट फर्नेस
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श्रीमती लक्ष्मी देवांगन, JEA, ब्लास्ट फर्नेस
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श्री दिलीप कुमार शर्मा, JEA, ब्लास्ट फर्नेस
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श्री किशोर कुमार साव, JEA., ब्लास्ट फर्नेस
फैसिलिटेटर: श्री हेमंत कुमार वर्मा, AGM., ब्लास्ट फर्नेस – टीम को यह सफलता उनके सामूहिक प्रयास, अनुशासन और सटीक समस्या-विश्लेषण की बदौलत मिली है।

प्रबंधन और अधिकारियों का आभार🙏🏻
👉टीम ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने वरिष्ठों और सहकर्मियों के मार्गदर्शन को दिया।
विशेष धन्यवाद श्री मनोज कुमार, सीजीएम (ब्लास्ट फर्नेस) सहित ऑपरेशन, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया गया, जिनके सहयोग और प्रोत्साहन ने इस प्रोजेक्ट को सफल बनाया।
👉टीम “मारूति” की यह उपलब्धि भिलाई इस्पात संयंत्र की गुणवत्ता संस्कृति और नवाचार भावना का जीवंत उदाहरण है। इस प्रोजेक्ट ने यह साबित किया कि इन-हाउस समाधान और टीमवर्क के बल पर बड़े औद्योगिक सुधार संभव हैं। भिलाई स्टील प्लांट परिवार को इस गौरवशाली सफलता पर गर्व है।
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K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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