बार-बार Tax की लूट पर सवाल: क्या ‘वन नेशन, वन टैक्स’ बनेगा समाधान?
– DIGITAL BHILAI NEWS – 01 सितंबर 2025
Tax का मकड़जाल और आम नागरिक की पीड़ा
भारत में Tax शब्द सुनते ही आम आदमी का माथा ठनक उठता है। वजह साफ है — यहाँ टैक्स केवल कमाई पर ही नहीं, बल्कि हर कदम पर देना पड़ता है। Income Tax, GST, Toll Tax, Road Tax, VAT, TDS — ये सभी टैक्स मिलकर ऐसा बोझ डालते हैं कि मिडिल क्लास और व्यापारी वर्ग की कमर टूट जाती है।

सोचिए —
❗नौकरीपेशा व्यक्ति अपनी सैलरी पर इनकम Tax देता है।
❗वही पैसा खर्च करता है तो जीएसटी लगता है।
❗गाड़ी खरीदी तो रोड Tax और जीएसटी।
❗गाड़ी चलाने निकले तो टोल Tax।
❗सेविंग्स बैंक में FD रखी तो ब्याज पर भी इनकम टैक्स।
यानी आम नागरिक अपनी कमाई पर भी Tax देता है और खर्च करने पर भी। इस “Tax का मकड़जाल” ही आज भारत की सबसे बड़ी आर्थिक समस्या है।
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नई सोच: वन नेशन वन टैक्स मॉडल
👉इसी जटिल व्यवस्था से निकलने का प्रस्ताव है — वन नेशन वन टैक्स।
इस मॉडल के तीन मुख्य स्तंभ हैं:
- 1. ₹100 से बड़े नोट बंद – ताकि कैश में बड़े लेनदेन ही न हों।
- 2. ₹5000 से ज्यादा कैश ट्रांजैक्शन पर रोक – महंगे सामान केवल बैंकिंग चैनल (UPI, कार्ड, NEFT, Paytm आदि) से खरीदे जाएं।
- 3. प्रॉपर्टी को आधार से लिंक करना – ताकि ब्लैक मनी और हवाला खत्म हो।
इसके बाद केवल एक ही टैक्स — 2% बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स (BTT) लगाया जाए।
यानी ₹5000 से ऊपर के कोई भी ट्रांजेक्शन को करने के लिए BANKING ट्रांजेक्शन मैंडेटरी होगा।

उदाहरण:
- ₹100 का सामान → ₹102
- ₹1000 का सामान → ₹1020
- ₹1 लाख का सामान → ₹1,02,000
👉बाकी सभी टैक्स — Income Tax, GST, Toll Tax, VAT, TDS — खत्म कर दिए जाएं।
(हा कस्टम act को सेम रखा जाए, जो इंपोर्ट एक्सपोर्ट है उसे वैसे ही चलाए।)
👉अब जानते है इस सिस्टम के फायदे और सीमाएं क्या होंगे ?
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जनता को क्या फायदा होगा?
1. टैक्स देने में सरलता
आज GST रिटर्न भरने के लिए व्यापारी को चार्टर्ड अकाउंटेंट रखना पड़ता है। इनकम टैक्स की जटिलता अलग। अगर केवल 2% BTT लागू होता है तो आम आदमी को न फॉर्म भरने की जरूरत होगी, न किसी विभाग के चक्कर लगाने की।
2. भ्रष्टाचार पर लगाम
- घूसखोरी कैश में होती है।
- हवाला कारोबार कैश पर चलता है।
- नशा तस्करी, सोने की तस्करी, गौ तस्करी, मानव तस्करी, सट्टा, लव जिहाद, आतंकवाद फंडिंग — सब नकद पर आधारित है।
अगर ₹5000 से ऊपर का कैश लेनदेन बंद हो जाए और सब कुछ बैंकिंग चैनलों से हो तो ये सभी गैरकानूनी गतिविधियाँ रुक जाएंगी।
3. सरकार की आय में बढ़ोतरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि टैक्स चोरी पूरी तरह खत्म होने पर सरकार की आय डबल हो सकती है। यानी कम टैक्स दर (2%) होने के बावजूद वसूली ज्यादा होगी, क्योंकि कोई टैक्स छिपा नहीं सकेगा।
4. व्यापार और उद्योग को राहत
- न GST की मोटी किताबें
- न इनकम टैक्स का दखल
- न TDS का झंझट
बिजनेस करना आसान होगा। छोटे व्यापारी से लेकर बड़े उद्योगपति तक बिना डर के कारोबार कर सकेंगे।
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क्या यह सच में भ्रष्टाचार मिटा देगा?
“वन नेशन वन टैक्स” के समर्थक मानते हैं कि इससे देश की आधी से ज्यादा समस्याएँ खत्म हो सकती हैं।
- घूसखोरी और कालाबाजारी का अंत
- मुनाफाखोरी, जमाखोरी और मिलावटखोरी पर लगाम
- नक्सलवाद, आतंकवाद, लव जिहाद, मानव तस्करी और अलगाववाद की फंडिंग रुक जाएगी
✔️चुनावी राजनीति में जातिवाद और पैसों की ताकत कमजोर होगी
✔️यह एक तरह से आर्थिक और सामाजिक क्रांति साबित हो सकता है।
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लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं❓
इतना आसान भी नहीं है कि एक झटके में सारे टैक्स खत्म कर दिए जाएं। कुछ अहम सवाल उठते हैं:
1. क्या 2% टैक्स से सरकार का खर्च चल पाएगा?
भारत एक विशाल देश है — रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर पर हजारों अरब रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में 2% टैक्स पर्याप्त होगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है।
2. ग्रामीण भारत तैयार है?
शहरों में डिजिटल ट्रांजैक्शन आम हो चुका है, लेकिन गाँवों में अब भी कैश इकोनॉमी ज्यादा चलती है। वहाँ अचानक बड़े नोट या कैश लेनदेन पर रोक लगाना व्यवहारिक नहीं लगेगा।
3. अंतर्राष्ट्रीय निवेश पर असर
विदेशी निवेशक और कंपनियाँ तब भरोसा करती हैं जब टैक्स सिस्टम स्थिर और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो। एकदम नए मॉडल को अपनाने में संकोच हो सकता है।
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क्या इसे पायलट प्रोजेक्ट से शुरू किया जा सकता है?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल को तुरंत पूरे देश में लागू करने के बजाय पहले 4–5 बड़े शहरों में पायलट बेसिस पर आजमाया जा सकता है। जैसे —
- दिल्ली
- मुंबई
- चेन्नई
- बेंगलुरु
- अहमदाबाद या लखनऊ
6 महीने के प्रयोग से साफ हो जाएगा कि यह मॉडल व्यवहारिक है या नहीं।
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निष्कर्ष: बदलाव की राह पर भारत
✔️भारत का Tax सिस्टम निश्चित रूप से आम जनता को उलझन और तकलीफ देता है।
👉“वन नेशन वन Tax” का विचार इस उलझन से बाहर निकालने वाला एक साहसी और क्रांतिकारी प्रस्ताव है।
👉यह सिर्फ Tax सुधार नहीं, बल्कि पूरे सामाजिक-आर्थिक ढांचे को बदलने की दिशा में कदम हो सकता है।
👉लेकिन, यह तभी संभव होगा जब समाज मिलकर आवाज उठाएँ और पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए इस सिस्टम को परखने का साहस दिखाएँ।
👉अगर यह लागू हुआ तो वाकई भारत की GDP 2% तक बढ़ सकती है, भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है और शायद हम जल्द ही उस भारत की ओर बढ़ें जिसे 2047 तक “विकसित राष्ट्र” बनाने का सपना देखा जा रहा है।
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✍🏻 रिपोर्ट : DIGITAL BHILAI NEWS
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K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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