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TATA STEEL BONUS 2025: 303.13 करोड़ का तोहफ़ा या संघर्ष की विरासत? पढ़िए ये खास विश्लेषण 👇

TATA STEEL BONUS NEWS

– DIGITAL BHILAI NEWS –


29 अगस्त 2025 – जमशेदपुर/भिलाई।


  • TATA STEEL ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कर्मचारियों को कुल ₹303.13 करोड़ का वार्षिक बोनस देने का ऐलान किया है।
  • इस बोनस में जमशेदपुर डिवीज़न और ट्यूब्स यूनिट के करीब 11,446 कर्मचारियों को ही ₹152.44 करोड़ का हिस्सा मिलेगा।
  • कर्मचारियों को न्यूनतम ₹39,004 और अधिकतम ₹3.92 लाख तक का भुगतान किया जाएगा। राशि 6 सितंबर को कर्मचारियों के खातों में पहुँच जाएगी।

☝️यह आंकड़ा भले ही बड़ा दिखे, लेकिन सवाल है कि यह बोनस कंपनी की उदारता है या फिर पिछली कई पीढ़ियों के संघर्षों का नतीजा?

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✍🏻आइए विस्तार से जानते है इस संघर्ष की विरासत को ✔️


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संघर्ष से बनी परंपरा ✊

❗1950–60 के दशक में tata steel के मजदूर आंदोलन पूरे देश में चर्चा का विषय रहे। प्रोडक्शन बंदी, हड़ताल, टूल-डाउन और यूनियन प्रदर्शनों ने कंपनी को झकझोर कर रख दिया था।

Tata steel

❗महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस और बाद में कई नेता व यूनियन प्रतिनिधि इस लड़ाई में जुड़े।

👉इसके बाद मैनेजमेंट को समझ आया कि “मैनपावर सैटिस्फैक्शन” ही Industrial peace (शांति) का आधार है।

✍🏻👌🏻इसी सोच ने Tata steel को भारत की पहली ऐसी कंपनी बनाया, जिसने कर्मचारियों की प्रत्यक्ष भागीदारी को महत्व दिया। यही वह परंपरा है, जिसकी वजह से आज भी, कानून में पात्रता से बाहर होने के बावजूद, कंपनी बोनस देती है।

Tata steel


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बाकी पीएसयू क्यों पिछड़े❓

👉✔️1983 में सरकार ने कर्मचारियों की भागीदारी के लिए कानून बनाया, लेकिन उसका अनुपालन कभी नहीं❌ हुआ।

SAIL सहित सभी PSU के द्विपक्षीय/त्रिपक्षीय कमेटी मे कर्मचारियो के निर्वाचित प्रतिनिधि के रुप मे सीमित संख्या में प्रतिनिधि शामिल होते है ।

❌यूनियन वार्ताओं में अक्सर गैर-निर्वाचित, बाहरी और बुज़ुर्ग नेता बैठते हैं, जिनकी जवाबदेही कर्मचारियों के प्रति कम और मैनेजमेंट के प्रति ज्यादा रहती है। ये नेता न तो अपने यूनियन में गुप्त निर्वाचन प्रणाली के माध्यम से निर्वाचित होते है तथा न ही कर्मचारियो के द्वारा सेक्रेट बैलेट इलेक्शन के माध्यम से❓

❗परिणाम यह कि SAIL में NJCS के कई वेतन और बोनस समझौते कर्मचारियों के लिए घाटे का सौदा 👎साबित हुए। (ओएनजीसी, इंडियन अॉयल तथा अन्य महारत्ना कंपनियों के मुकाबले ) 

⁉️सवाल यह है कि जब औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, कारखाना अधिनियम 1948, मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936 और प्रबंधन में भागीदारी अध्यादेश 1983 सब कंपनियों पर समान रूप से लागू हैं, तो SAIL प्रबंधन इस तरह की “कर्मचारी हितैषी परंपरा” क्यों नहीं निभाते?


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👎उदाहरण के तौर पर 2007 का समझौता — जहाँ कर्मचारियों को “पर्क्स प्रतिशत में नही लेना” , “पर्क्स का एरियर नही लेना” ❌  एकमुश्त 30% एमजीबी के बदले दो टूकड़ो मे 21 और 17% (कुल मिलाकर 29.5% अर्थात 0.5% और कम ही लेना।) ⚠️

👌🏻इसी बीच तेलऊर्जा कंपनियों में PRP (Performance Related Pay) की शुरुआत हुई,  और SAIL मे अधिकारी (चेयरमैन से लेकर जूनियर मैनेजर तक) वर्षो से PRP ले भी रहे है ।

लेकिन तथाकथित हमारे हितैषी यूनियन और उनके नेताओं को मैनेजमेंट के हित की पड़ी है ।

👆SAIL के वर्करों के लिए यह मांग आज तक अनसुनी रही।🙄


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Tata steel के बोनस का गणित और लोकल असर 📊

✔️2023-24 की तुलना में इस बार बोनस में लगभग ₹30.30 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।

✔️लगभग 25,907 कर्मचारियों को इस बार यह बोनस मिलेगा।

✔️त्योहार सीज़न से ठीक पहले ₹303 करोड़ का यह प्रवाह स्थानीय बाज़ार, ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मजबूती देगा।


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सवाल और बदलाव की मांग❓

💪इतिहास गवाह है कि एकजुट कर्मचारी आंदोलन ने ही बोनस जैसी परंपराओं को जन्म दिया।

❗लेकिन आज, जब यूनियनें अक्सर मैनेजमेंट-फ्रेंडली समझौते करती हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है—

❓क्या कर्मचारी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज़ खो चुके हैं?

Tata steel

बदलाव तभी संभव है जब—

  • यूनियन में सिर्फ निर्वाचित प्रतिनिधि हों।✔️
  • बाहरी नेताओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाए✔️
  • कर्मचारी एक बैनर के नीचे एकजुट होकर वार्ता में जाएं। (जैसे SAIL में अधिकारी वर्ग एक जुट है एक बैनर तले)✔️

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निष्कर्ष☝️

टाटा स्टील का ₹303.13 करोड़ का बोनस सिर्फ एक रकम नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि “संघर्ष की ताक़त और एकता से ही कर्मचारी अपने हक़ सुरक्षित कर पाए।”

वरना हाल वही होगा जो RINL, HEC, HSCL और BHEL जैसे PSU में हुआ—जहाँ कर्मचारियों की सुविधाएँ एक-एक कर लुप्त हो गईं।

इसलिए यूनियन नेता भले ही मैनेजमेंट समर्थक हो गए हो, अपना विरोध का स्वर को मत रोकिए। यह मत भूलिए कि आने वाले कल की लड़ाई अभी बाकी है।


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✍🏻रिपोर्ट : DIGITAL BHILAI NEWS 

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