Sustainability Report से खुलासा: बोर्ड मेंबर्स का वेतन करोड़ों में, कर्मचारी अब भी वेतन समझौते की प्रतीक्षा में
– DIGITAL BHILAI NEWS –
30 अगस्त 2025
स्वतंत्र निदेशक को भी 10 लाख तक सीटिंग अलाउंस, बोर्ड अधिकारियों का औसत 61 लाख – कर्मचारी 9 साल से अधूरे समझौते और एरियर के इंतजार में।
Company की Annual & Sustainability Report 2024-25 ने वेतन असमानता (Pay Discrimination) को उजागर कर दिया है।
जहां कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और टॉप मैनेजमेंट सालाना करोड़ों रुपये का वेतन और सुविधाएँ उठा रहे हैं, वहीं हज़ारों कर्मचारी पिछले 8 वर्ष 8 माह से वेतन संशोधन और एरियर का इंतजार कर रहे हैं।
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बोर्ड और टॉप मैनेजमेंट का remuneration 💸
रिपोर्ट के अनुसार:
👉श्री बृजेन्द्र प्रताप (Whole Time Director) – ₹1.34 करोड़
👉श्री अनिल तुलसियानी (Whole Time Director) – ₹1.19 करोड़
👉श्री अरविंद कुमार (Whole Time Director) – ₹1.17 करोड़

👉श्री कृष्ण कुमार (Whole Time Director) – ₹85.27 लाख
👉चेयरमैन/मैनेजिंग डायरेक्टर – ₹79.69 लाख
👉कंपनी सेक्रेटरी – ₹83.99 लाख
👉 बोर्ड स्तर पर 10 अधिकारियों का औसत सालाना वेतन ₹61 लाख दर्ज हुआ है।

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स्वतंत्र निदेशक: न्यूनतम योग्यता और 10 लाख तक का अलाउंस
रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्र निदेशक (Independent Directors) जिसके लिए न्यूनतम योग्यता सिर्फ़ स्नातक (Graduate) है, उन्हें सालाना ₹7 लाख से ₹10 लाख तक का सीटिंग अलाउंस मिल रहा है।
उदाहरण:
श्री जयप्रसाद → ₹10.05 लाख
श्री अशोक कुमार→ ₹9.65 लाख
अन्य स्वतंत्र निदेशक → ₹6.9 से ₹7.9 लाख
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👷 कर्मचारियों का औसत वेतन (भ्रमित आंकड़े)
👉रिपोर्ट में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का औसत वेतन मिलाकर ₹15.3 लाख/वर्ष दिखाया गया है।
❗लेकिन यह एक प्रकार से भ्रामक है, क्योंकि अधिकारियों को कर्मचारियों में मर्ज कर दिया गया।
📌 असल तस्वीर:
कंपनी में 10,000 अधिकारी – औसत वेतन ₹28 लाख/वर्ष से अधिक।
करीब 42,000 कर्मचारी – औसत वेतन ₹12 लाख/वर्ष।
बोर्ड लेवल अधिकारी – औसत ₹61 लाख/वर्ष, यानी कर्मचारियों से चार गुना ज्यादा।
इस तरह का प्रस्तुतिकरण प्रबंधन की उस रणनीति को उजागर करता है, जिसमें वास्तविक असमानता को छुपाने की कोशिश की गई।
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⚖️ असमानता का पैमाना
💸बोर्ड और मैनेजमेंट अपने पैकेज और भत्ते समय पर सुनिश्चित कर रहे हैं।
❗वहीं कर्मचारी 8 साल 8 महीने से वेतन संशोधन व एरियर की राह देख रहे हैं। और अपने अधिकारों से वंचित हैं।
⚠️यह स्थिति कंपनी के भीतर गहरी आर्थिक और प्रबंधकीय असमानता को दर्शाती है।
⚠️लंबे समय से अधूरा हुआ वेतन समझौता न केवल असंतोष बढ़ा रहा है, बल्कि भविष्य में इंडस्ट्रियल रिलेशन और प्रोडक्टिविटी पर भी असर डाल सकता है।
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CSR बनाम कर्मचारियों के अधिकार❓
कंपनी अपनी रिपोर्ट में CSR (Corporate Social Responsibility) और Sustainability पर करोड़ों खर्च दिखाती है।
लेकिन सवाल उठता है कि जब अपने ही कर्मचारियों को वेतन और एरियर का हक़ नहीं मिल रहा तो CSR का दिखावा कितना सार्थक है?
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निष्कर्ष
⚠️कंपनी की यह रिपोर्ट एक कड़वी हकीकत सामने लाती है-
❗जहां बोर्ड अधिकारी सालाना करोड़ों में खेल रहे हैं, और अधिकारियों के कोई मुद्दे पेंडिंग नहीं है। वहीं कर्मचारी अपने मूल वेतन वृद्धि और एरियर के लिए लगभग नौ साल से तरस रहे हैं।
👉यह सिर्फ़ आर्थिक भेदभाव (Economic Discrimination) नहीं, बल्कि कर्मचारियों के धैर्य और मनोबल की भी कठिन परीक्षा है।
👉अब देखना होगा कि क्या प्रबंधन इस गहरी असमानता को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर कर्मचारी अपने हक के लिए और लंबा इंतजार करेंगे।
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✍🏻 रिपोर्ट : DIGITAL BHILAI NEWS

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

