STEEL का बड़ा खेल: टाटा, JSW और SAIL के तिमाही नतीजों में चौंकाने वाला फर्क

STEEL plant comparision

– DIGITAL BHILAI NEWS –

03 – AUG. – 2025 – (STEEL PLANT NEWS)


  • भारतीय STEEL उद्योग में तीन दिग्गज कंपनियाँ – TATA STEEL, JSW STEEL और STEEL अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) – ने हाल ही में अपनी पहली तिमाही (Q1 FY’26) की वित्तीय रिपोर्ट जारी की है।
  • तीनों ने लगभग बराबर मात्रा में STEEL बेचा, बाज़ार में दाम भी लगभग एक जैसे रहे, लेकिन जब बात कमाई और मुनाफ़े की आई तो तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
  • आख़िर ऐसा क्यों है कि समान उत्पादन और समान दाम पर भी SAIL, TATA और JSW के मुकाबले कमाई और मुनाफ़े में पिछड़ रहा है? यही सवाल अब हर किसी के ज़हन में है।
  • जाने DIGITAL BHILAI NEWS का ये खास विश्लेषण 👇🏻

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🔎 TATA STEEL – हाई वैल्यू प्रोडक्ट्स से मोटा मुनाफ़ा

TATA STEEL ने इस तिमाही में 4.75 मिलियन टन बिक्री दर्ज की।

  • इससे कंपनी को ₹31,014 करोड़ की आय हुई।
  • EBITDA: ₹7,263 करोड़
  • PBT (Profit Before Tax): ₹4,777 करोड़
  • PAT (Profit After Tax) : ₹3,523 करोड़

यानी टाटा स्टील ने न सिर्फ उत्पादन और बिक्री में मजबूती💪🏻 दिखाई, बल्कि हर टन पर कमाई भी शानदार रही।

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इसकी सबसे बड़ी वजह है वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स – टाटा ऑटोमोबाइल सेक्टर, इलेक्ट्रिकल स्टील, हाई-ग्रेड फ्लैट प्रोडक्ट्स जैसे प्रीमियम सेगमेंट पर ध्यान देता है।

इसलिए बाजार भाव बराबर होने के बावजूद टाटा स्टील का प्रति टन रेवेन्यू और मुनाफ़ा कहीं अधिक है।


🔎 JSW STEEL – उत्पादन और बिक्री में नंबर वन

JSW स्टील ने Q1 FY’26 में सबसे ज्यादा 7.26 मिलियन टन क्रूड स्टील उत्पादन और 6.69 मिलियन टन बिक्री की।

  • Revenue from Operations: ₹43,147 करोड़
  • Operating EBITDA: ₹7,576 करोड़
  • PAT (Net Profit After Tax): ₹2,209 करोड़

JSW स्टील का स्केल और मार्केट पकड़ सबसे मजबूत रही।

हालांकि, प्रति टन मुनाफ़े में यह TATA से थोड़ा पीछे है, लेकिन sheer volume यानी भारी-भरकम बिक्री ने JSW को राजस्व के मामले में सबसे आगे ला दिया।


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🔎 SAIL – उत्पादन बराबर, पर कमाई आधी

SAIL ने तिमाही में 4.85 मिलियन टन उत्पादन और 4.55 मिलियन टन बिक्री दर्ज की।

  • कुल आय सिर्फ ₹25,921 करोड़ रही – यानी टाटा से लगभग ₹5,000 करोड़ कम।
  • EBITDA: ₹2,925 करोड़
  • PBT: ₹890 करोड़
  • PAT: ₹685 करोड़

यहां सबसे बड़ा सवाल ? – जब उत्पादन लगभग टाटा जितना है और बाजार रेट भी समान है, तो फिर SAIL की कमाई इतनी कम क्यों? 🤔


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विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • SAIL अभी भी अधिकतर कमोडिटी-ग्रेड स्टील (रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर, बेसिक construction) पर निर्भर है।
  • इसके मुकाबले टाटा और JSW ज्यादा वैल्यू-एडेड स्टील प्रोडक्ट्स बेचते हैं।

नतीजा यह है कि टाटा और JSW प्रति टन कहीं ज्यादा कमाते हैं, जबकि SAIL का मार्जिन काफी कम रह जाता है


🧐 बड़ा सवाल – भविष्य में क्या SAIL बदल पाएगा खेल?

यह साफ है कि भारतीय स्टील सेक्टर में अब सिर्फ ज्यादा उत्पादन करना काफी नहीं है।असली खेल है – “किस तरह का स्टील बेचा जा रहा है।”

टाटा और JSW ने प्रीमियम प्रोडक्ट्स, हाई-टेक सेक्टर्स और बेहतर efficiency से बाजार पर दबदबा बनाया है।

SAIL उत्पादन और वॉल्यूम में बराबरी करता है, लेकिन PSU होने की वजह से वैल्यू-एडेड उत्पादों और प्राइवेट कंपनियों जैसी आक्रामक रणनीति में पिछड़ रहा है।


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✍️ निष्कर्ष:

स्टील इंडस्ट्री की यह तुलना बताती है कि बाजार में कीमतें एक जैसी होने के बावजूद प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेशनल एफिशिएंसी ही असली मुनाफ़े का खेल तय करती है।

और यही कारण है कि इस तिमाही की दौड़ में –

  • उत्पादन में JSW आगे,
  • मार्जिन में टाटा सबसे मजबूत,
  • और SAIL मुनाफ़े की रेस में काफी पीछे रह गया।
STEEL
TATA, SAIL, JSW PROFITS

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✍️ रिपोर्ट : DIGITAL BHILAI NEWS

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