श्रम का सम्मान या शोषण?” — RAKS का 10 अक्टूबर को ब्लैक बैज विरोध
– DIGITAL BHILAI NEWS –
– 07 – OCTOBER – 2025 – Workers’ Rights, RAKS Fight! –
“सेल कर्मियों के अधिकारों पर गहरी नींद में इस्पात मंत्रालय व श्रमायुक्त, तीस हजार कर्मचारी इंतजार में हुए सेवानिवृत्त”
- भारत बड़े सार्वजनिक उपक्रम Steel Authority of India Limited (SAIL) में कर्मचारियों का असंतोष अब चरम पर पहुँच चुका है।
- लगातार 9 वर्षों से अधूरा पड़ा वेज रिवीजन (Wage Revision) न केवल कर्मचारियों की जेब पर भारी पड़ा है, बल्कि उनकी उम्मीदों को भी तोड़ चुका है।
- राउरकेला कर्मचाऱी संघ (RAKS) ने इस मसले पर इस्पात मंत्रालय, मुख्य श्रमायुक्त और प्रधानमंत्री कार्यालय को घेरते हुए कहा कि – “श्रम का सम्मान करने का दावा करने वाली सरकार आज स्वयं शोषण की भागीदार बन चुकी है।”
- RAKS ने आरोप लगाया कि जिन कर्मचारियों की मेहनत से भारत का इस्पात उद्योग चाँद और मंगल तक पहुँचा, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं।
- Union ने ऐलान किया है कि 10 अक्टूबर 2025 को सभी कर्मचारी ब्लैक बैज पहनकर काम पर जाएंगे।
यह कदम सरकार और प्रबंधन को सीधा संदेश है कि “अब प्रतीक्षा नहीं, बल्कि आंदोलन होगा।” - आइये जानते है विस्तार से इस खबर को 👇
पृष्ठभूमि: SAIL वेज रिवीजन की अधूरी कहानी⚠️
SAIL में हर पाँच साल पर कर्मियों का वेज रिवीजन (Wage Revision) किया जाना तय है।
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पिछला वेज रिवीजन 2017 में प्रभावी होना था, लेकिन अब तक लागू नहीं हो पाया। जिसके इंतजार में लगभग तीस हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और सैकड़ों कर्मचारी जीवन यात्रा पूरी कर चुके हैं।

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इस बीच यूनियन ने कई बार तथ्यों और साक्ष्यों के साथ पत्र लिखे, परंतु प्रबंधन और मंत्रालय ने ठोस कदम नहीं उठाया।
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NJCS (National Joint Committee for Steel) के माध्यम से यह प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए थी, मगर कर्मचारियों का आरोप है कि “NJCS (National Joint Committee for Steel) नेताओ ने कर्मचारियों का भरोसा तोड़ा।
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“चार कर्मचारी ऐसे नहीं मिलेंगे जो सम्मान से उनका नाम लें, फिर भी वे प्रतिनिधि बने बैठे हैं,” आरएकेएस ने तंज कसा।
कर्मचारियों की प्रमुख शिकायतें⚠️
आरएकेएस ने कर्मचारियों की समस्याओं की लंबी सूची सार्वजनिक की है —
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इंसेंटिव रिवार्ड: 15 साल से अटका हुआ है – इस बीच उत्पादन क्षमता दोगुनी हुई और कर्मचारियों की संख्या आधी हो गई।
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बोनस फॉर्मूला: कर्मचारियों को PBT (Profit Before Tax) का बेहद छोटा हिस्सा।
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उदाहरण: ₹16,000 करोड़ PBT पर कर्मचारी को मात्र ₹40,500 बोनस।
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वहीं अधिकारियों को इसी आधार पर ₹3–15 लाख तक का PRP (Performance Related Pay)
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फेस्टिवल एडवांस: 2008 से ₹5,000 पर ही स्थिर। महंगाई के इस दौर में यह रकम हास्यास्पद लगती है।
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अवकाश नीति व क्वार्टर सुविधा: अधिकारी और कर्मचारी वर्ग में स्पष्ट भेदभाव। रखरखाव की स्थिति बेहद खराब।
विश्लेषण: श्रमिक असंतोष और उद्योग पर असर❗
👉स्टील उद्योग देश की आधारभूत अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
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SAIL के 40,000 से अधिक कर्मचारी सीधे तौर पर इस मुद्दे से प्रभावित हैं।
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कर्मचारी मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
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लगातार विलंब से यह संदेश गया है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं देती।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि असंतोष गहराया तो आने वाले समय में औद्योगिक अशांति खड़ी हो सकती है।
आंदोलन की चेतावनी⚠️
👉आरएकेएस ने कहा है कि यदि सरकार और प्रबंधन ने जल्द ठोस पहल नहीं की, तो यह असंतोष आने वाले दिनों में वृहद आंदोलन का रूप ले सकता है। Union का कहना है:
“हमने वर्षों तक इंतजार किया, लेकिन अब प्रतीकात्मक विरोध से शुरुआत कर रहे हैं।
👉10 अक्टूबर को ब्लैक बैज लगेगा, और यदि सरकार ने नहीं सुना तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा।”
👉संगठन ने साफ किया है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कर्मचारियों को उनका न्यायपूर्ण हक नहीं मिल जाता।
👉SAIL के वेज रिवीजन का मुद्दा अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि नैतिकता और न्याय का सवाल बन चुका है।
लगातार 9 साल से लंबित यह मामला न केवल कर्मचारियों के जीवन स्तर को प्रभावित कर रहा है, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।
यदि सरकार ने त्वरित पहल नहीं की, तो आने वाले समय में यह विवाद एक बड़े औद्योगिक संकट का रूप ले सकता है।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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