SESBF से NPS ट्रांजिशन पर BSP Workers Union की प्रतिक्रिया: स्वागत भी, सवाल भी

–  DIGITAL BHILAI NEWS –

  • SAIL में पेंशन व्यवस्था को लेकर चल रहा SESBF से NPS ट्रांजिशन अब कर्मचारियों के बीच नई चर्चा का विषय बन गया है।
  • 2 फरवरी 2026 को कोलकाता में आयोजित बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया कि SESBF में 2% की मासिक कटौती 31 मार्च 2026 के बाद बंद कर दी जाएगी और जमा राशि संबंधित कर्मचारियों के NPS खाते में स्थानांतरित की जाएगी।
  • इस फैसले पर BSP Workers Union ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए प्रबंधन के निर्णय का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही कुछ महत्वपूर्ण आपत्तियाँ भी दर्ज कराई हैं।
  • आइए जानते है क्यों है कर्मियों में असमंजस?
SESBF
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प्रबंधन के निर्णय का स्वागत, पर ‘विकल्प’ की कमी पर सवाल!

👉यूनियन का कहना है कि दोहरी पेंशन व्यवस्था को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट करने और एकीकृत प्रणाली की ओर बढ़ने का कदम सकारात्मक है। SESBF और SAIL Pension Scheme को समानांतर चलाने से उत्पन्न जटिलताओं को समाप्त करना आवश्यक था।

👉लेकिन यूनियन के अनुसार, कर्मचारियों को एक अहम विकल्प से वंचित कर दिया गया। यूनियन प्रतिनिधियों ने पहले सुझाव दिया था कि कर्मचारियों को दो विकल्प मिलें—

  • वे चाहें तो SESBF में जमा पूरी राशि अपने बैंक खाते में ले सकें।
  • या फिर वह राशि National Pension System (NPS) में ट्रांसफर कर दी जाए।

👉हालाँकि, आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार जमा राशि सीधे NPS खाते में ट्रांसफर की जाएगी और व्यक्तिगत निकासी का स्पष्ट विकल्प नहीं दिया गया है।

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कर्मचारियों की व्यावहारिक जरूरतें: लोन और पारिवारिक दायित्व!

👉यूनियन का तर्क है कि कई कर्मचारी वर्तमान समय में होम लोन, वाहन लोन या अन्य वित्तीय दायित्वों से जूझ रहे हैं। यदि उन्हें SESBF की संचित राशि एकमुश्त अपने खाते में लेने का अवसर मिलता, तो वे उस राशि का उपयोग कर:

  • अपने ऋण को आंशिक या पूर्ण रूप से कम कर सकते थे।
  • ब्याज का दीर्घकालिक बोझ घटा सकते थे।
  • परिवार की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा कर सकते थे।

👉दूसरी ओर, जो कर्मचारी दीर्घकालिक निवेश में विश्वास रखते हैं, वे स्वेच्छा से राशि NPS में स्थानांतरित कर सकते थे। यूनियन का कहना है कि “विकल्प देना ही लोकतांत्रिक और कर्मचारी हितैषी निर्णय होता।”


टैक्स के दायरे में लाने पर भी आपत्ति!

👉एक और महत्वपूर्ण बिंदु टैक्स व्यवस्था से जुड़ा है। यूनियन का मानना है कि SESBF को नए टैक्स ढाँचे के तहत लाना कर्मचारियों के हित में नहीं है।

👉पहले SESBF एक अलग सुपरएन्नुएशन फंड के रूप में संचालित होता था। अब यदि पूरी राशि NPS के माध्यम से जाएगी और कर नियमों के तहत आएगी, तो कर्मचारियों को वास्तविक लाभ की गणना को लेकर संशय बना रहेगा।

👉यूनियन का तर्क है कि पेंशन जैसी दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा योजना को टैक्स के कठोर दायरे में लाना उचित नहीं माना जा सकता।


कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति!

👉फैसले के बाद कर्मचारियों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

  • कुछ कर्मचारी NPS को सुरक्षित और संरचित विकल्प मान रहे हैं।
  • जबकि कई कर्मचारी यह महसूस कर रहे हैं कि उन्हें अपने ही संचित धन पर पूर्ण निर्णय का अधिकार नहीं दिया गया।

👉यूनियन का कहना है कि यदि निकासी और NPS—दोनों विकल्प खुले होते, तो यह निर्णय अधिक संतुलित और पारदर्शी माना जाता। 


आगे क्या?

👉BSP Workers Union ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर कर्मचारियों से व्यापक राय लेकर प्रबंधन के समक्ष पुनः अपनी बात रखेगी। यूनियन का स्पष्ट मत है कि पेंशन संबंधी निर्णयों में कर्मचारियों की प्राथमिकताओं और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

👉SESBF से NPS ट्रांजिशन का यह चरण भले ही प्रशासनिक दृष्टि से सुव्यवस्थित माना जा रहा हो, लेकिन कर्मचारी हितों के संतुलन की बहस अभी समाप्त नहीं हुई है। SAIL में आने वाले दिनों में इस विषय पर और स्पष्टता तथा संवाद की आवश्यकता बनी रहेगी।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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