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Painful Truth – पसीने से बने Steel का हक़ लिए बिना 29,632 रिटायर्ड, बाकी चुप? 🤫

WHO IS SAIL CHAIRMAN ?

– Digital Bhilai News – 

  • भिलाई से लेकर बोकारो तक, राउरकेला से लेकर बर्नपुर तक — देश की इस्पात नगरी SAIL के हजारों चेहरे आज सिर्फ़ एक अधूरी उम्मीद की कहानी बनकर रह गए हैं।😓
  • जनवरी 2017 से अगस्त 2025 के बीच 29,632 नियमित नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारी रिटायर हो गए, लेकिन 39 महीने का फिटमेंट एरियर और 58 महीने का पर्क्स एरियर पाने की उनकी ख्वाहिश अधूरी ही रह गई।👎🏻

आंकड़ों के पीछे छुपा दर्द 😣

👉🏻जनवरी 2017 में SAIL के पास 71,008 नियमित नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारी थे। अगस्त 2025 में यह संख्या घटकर 41,376 रह गई।

यह सिर्फ़ संख्या नहीं, बल्कि इस कमी के पीछे एक कहानी है:-

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  • भिलाई (BSP): 21,234 से 10,778 यानी कुल 10,456 रिटायर हुए 👉🏻 प्रतिशत कमी (49.2%).
  • राउरकेला (RSP): 13,901 से 9,799 यानी कुल  4,102 रिटायर हुए 👉🏻 प्रतिशत कमी (29.5%).
  • बोकारो (BSL): 12,452 से 8,477 यानी कुल  3,975 कर्मी रिटायर हुए 👉🏻 प्रतिशत कमी (31.9%).
  • इसी प्रकार बर्नपुर (ISP) में –6,210 से 3,681 यानी 2,529 कर्मचारी (40.7%) कम हुए।
  • CFP: 340 → 80 → कमी 260 (76.5%) — सबसे कटु गिरावट

कई अन्य यूनिटों में भी यही सिलसिला चला


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Sail manpower 2025


नेतृत्व बदलता रहा, दर्द वही रहा 😣

इस दौरान सेल कर्मचारियों ने देखा कि😏 👉🏻

🔸नरेंद्र मोदी दो बार प्रधानमंत्री बने।

🔸चौधरी बिरेंद्र सिंह, धर्मेंद्र प्रधान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरसीपी सिंह, एच डी कुमारस्वामी जैसे नेता इस्पात मंत्री बने।

🔸पी के सिंह, अनील चौधरी, सोमा मंडल, अमरेंदु प्रकाश जैसे चेयरमैन SAIL की कुर्सी पर आए।

लेकिन इन बदलावों के बीच, नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों का दर्द जस का तस रहा।🥺


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रिकॉर्ड मुनाफा, फिर भी खाली हाथ कर्मचारी 😓👎🏻

BAKS, भिलाई के अध्यक्ष अमर सिंह कहते हैं:

✅“कंपनी ने लगातार 5 साल से हर साल 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर किया है।

मुनाफे के नए रिकॉर्ड बने, लेकिन कर्मचारियों के हक़ पर सबकी आँखें 😴 बंद रहीं।”

क्या हुआ — सच्चाई की तख्ती पर👇🏻

🔻कम लोग → ⏫ज्यादा काम: हर साल करीब 600+ कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं; नई भर्ती न के बराबर।👎🏻

🔻कम लोग → ⏫ज़्यादा मुनाफा: पिछले पाँच साल से SAIL का टर्नओवर ₹1 लाख करोड़+; रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज।

🔻कम लोग → ⏫ज्यादा ठेका: रिक्तियों को भरने की जगह प्रबंधन ने ठेका-पर निर्भरता बढ़ाई

परिणाम – सस्ती फ़ोर्स 🛑 कम अधिकार 🛑 सीमित ट्रेनिंग🛑 सेफ्टी से समझौता 🛑 गुणवत्ता में गिरावट और 🛑 ठेका की आड़ में बढ़ता भ्रष्टाचार ⚠️


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कटु सवाल🌵 — प्रबंधन और सरकार से

📈कंपनी रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही है — क्यों कर्मचारियों के वेज-रिविजन और बकाया पर पर्दा पड़ा हुआ है?👎🏻

🔎क्या मुनाफा सिर्फ शेयरहोल्डर्स और अधिकारियों तक ही सीमित रहेगा ???

❌स्थायी स्टाफ घटाने और ठेका बढ़ाने की नीति क्या दीर्घकालिक सुरक्षा और तकनीकी सततता को खतरे में नहीं डालती?


29 हजार कर्मियों का रिटायरमेंट के साथ उनके सपनों का अधूरा होना…

रिटायर्ड कर्मचारियों के इन रुपयों के मिलने से सजाए हुए सपने अधूरे रह गए —

👉🏻किसी ने बच्चो की उच्च शिक्षा के लिए प्लानिंग की थी।

👉🏻किसी का मकान का सपना

👉🏻किसी के बच्चो की शादी की रौनक हुई कम


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📢 Digital Bhilai News की राय

‼️ इस्पात बनाने वालों की मेहनत ने भारत की अर्थव्यवस्था को मज़बूती दी है। अब वक्त है कि उनकी आवाज़ को भी उतनी ही मज़बूती मिले।

‼️ जो अपने खून-पसीने से देश का स्टील गढ़ते हैं, उनके अधिकार भी उतने ही मज़बूत होने चाहिए।


🔸निष्कर्ष

कम होती नियमित man power, दोगुना होता प्रोडक्शन, और रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा… फिर भी जिन हाथों ने पसीना बहाकर इस स्टील को सोना बनाया, वे आज भी अपने हक़ के लिए तरस रहे हैं

29,632 कर्मचारी चुपचाप रिटायर हो गए, बाकी के चेहरों पर भी एक ही सवाल“हमारे हिस्से का सम्मान और सुविधा कब लौटेगी?” कब हमारा हक का एरियर मिलेगा?

क्या प्रॉफिट की चमक में इंसान की मेहनत की कीमत धुंधली हो गई है?

क्या यह तय हो गया है कि सुविधाएं बहाल करने का वादा बस आश्वासनों तक सीमित रहेगा?

या फिर सबको इसी तरह आंख मूंदकर इंतज़ार करना होगा?

इतिहास गवाह है — स्टील पिघलाने वाले दिल, दर्द सहने में भी सबसे आगे होते हैं।

लेकिन सवाल ये है… कब तक?


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✍🏻 रिपोर्ट : Digital Bhilai News

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