Mining Company ने दिखाया Industrial Fairness, पर Steel Giant में Wage Scam — SAIL के ठेका मजदूरों का बड़ा शोषण उजागर
– DIGITAL BHILAI NEWS – (SAIL Contract Labour Wage Disparity)
- यह विडंबना ही है कि Coal India, जो एक Mining Company है, अपने ठेका कर्मियों को Industrial Worker मानकर केंद्रीय औद्योगिक वेतन (Central Sphere Wage) देती है — ₹1,285 से ₹1,383 प्रतिदिन तक।
- जबकि Steel Authority of India Limited (SAIL), जो असल में Steel Manufacturing Industry है, वहाँ ठेका मजदूरों को अब भी राज्य सरकार द्वारा तय न्यूनतम दर (₹400–₹500) के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है।
- दोनों ही PSU (Public Sector Undertakings) हैं, फिर भी नीति में इतना असमान व्यवहार क्यों?
भाग 1: Mining Sector में भी Industrial न्याय — Coal India का उदाहरण
👉Coal India Limited (CIL) ने 12 मई 2025 को अपने ठेका मजदूरों के लिए संशोधित वेतन आदेश जारी किया।
यह आदेश Chief Labour Commissioner (C), Govt. of India द्वारा 28 मार्च 2025 को जारी Price Index Revision के आधार पर लागू किया गया
| श्रेणी | बेसिक वेतन (₹/दिन) | संशोधित VDA (₹/दिन) | कुल वेतन (₹/दिन) |
|---|---|---|---|
| अस्किल्ड | 1176 | 109 | 1285 |
| सेमी-स्किल्ड | 1206 | 111 | 1317 |
| स्किल्ड | 1236 | 114 | 1350 |
| हाईली स्किल्ड | 1266 | 117 | 1383 |
👉यानी एक Mining PSU अपने ठेका श्रमिकों को Industrial Workers की श्रेणी में रखकर Central Government Wage Rate देती है —
👉यह एक Industrial Justice Model का उदाहरण है।
भाग 2: पर SAIL में ‘Industrial Worker’ नहीं, ‘State Worker’ बना दिए गए ठेका मजदूर
👉SAIL के ठेका मजदूर भी Furnace Operation, Material Handling, Crane Maintenance, Blast Furnace cleaning जैसे औद्योगिक कार्यों में लगे हैं।
👉इनकी कार्य प्रकृति Mining Workers से अधिक औद्योगिक (industrial) है — फिर भी SAIL उन्हें State Sphere के तहत रखती है, जिससे राज्य सरकार के न्यूनतम वेतन दर लागू होते हैं।
👉राज्य सरकार के औसतन न्यूनतम वेतन:
| राज्य | न्यूनतम दैनिक दर | अधिसूचना (अप्रैल 2025) |
|---|---|---|
| छत्तीसगढ़ | ₹385 – ₹475 | लेबर विभाग, रायपुर |
| झारखंड | ₹410 – ₹480 | रांची अधिसूचना |
| ओडिशा | ₹400 – ₹490 | भुवनेश्वर अधिसूचना |
| पश्चिम बंगाल | ₹420 – ₹500 | कोलकाता अधिसूचना |
👉यानी SAIL का ठेका मजदूर, जो Furnace या Mill Floor पर काम करता है, वो लगभग ₹450 प्रतिदिन पर सीमित है, जबकि कोल इंडिया का उतना ही श्रमिक ₹1300 प्रतिदिन पा रहा है।
👉यह समान कार्य पर असमान वेतन (Equal Pay Inequality) का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

भाग 3: ऑन-पेपर सब सही, पर ज़मीन पर घोटाला
👉यहाँ सबसे बड़ा खेल यहीं से शुरू होता है। ठेकेदार और अधिकारी मिलकर “कागज़ पर State Wage तो दिखाते हैं, पर असल में मजदूर को उससे भी कम देते हैं।”
⚠️ कैसे होता है शोषण:
-
Salary Bank में पूरी दिखाते हैं:
ठेकेदार राज्य की निर्धारित दर के अनुसार मजदूर का वेतन अकाउंट में भेजता है। -
पहले से धमकी:
मजदूर को पहले ही बता दिया जाता है — “सैलरी ₹450 की दिखेगी, पर असल में ₹320–₹350 ही मिलेगा।” -
Cash Withdrawal System:
वेतन आने के बाद ठेकेदार मजदूर से ATM से पैसा निकलवाकर ₹100–₹130 प्रतिदिन के हिसाब से पैसा वापस ले लेता है। -
विरोध का अंजाम:
अगर मजदूर मना करे तो उसका गेट पास रोक दिया जाता है, अगले महीने नाम हटा दिया जाता है। -
Management Nexus:
ठेकेदार और अफसर इस ‘kickback system’ में हिस्सेदार होते हैं — जिससे शिकायत दर्ज करना लगभग असंभव बन जाता है।
👉यानी ऑन पेपर सब ‘कम्प्लायंट’ है, पर व्यवहार में यह एक संगठित भ्रष्टाचार है।

👉ठेका मजदूर की हकीकत मोटे तौर पे :-
-
“₹450-500 की जगह ₹320 मिलना आम बात है।”
-
“ATM से पैसा निकाल कर ठेकेदार को देना पड़ता है।”
-
“अगर आवाज उठाओ तो गेट पास खत्म कर देते हैं।”
👉इस तरह एक मजदूर को महीने में ₹2500–₹3000 तक की तनख्वाह में कटौती का सामना करना पड़ता है — जो हर साल लगभग ₹30,000–₹40,000 का नुकसान है।
👉यदि जाँच हो भी जाये तो भी कुछ नहीं मिलता, क्योंकि बैंक ट्रांजैक्शन और सेलेरी स्लिप तो “सही” दिखते हैं।
👉दोहरी नीति, दोहरा अन्याय:-
| तुलना बिंदु | COAL INDIA | SAIL |
|---|---|---|
| कार्य प्रकृति | Mining (Industrial Base) | Steel Manufacturing (Industrial Base) |
| श्रमिक वर्ग | Industrial Worker | State Sphere Worker |
| न्यूनतम वेतन दर | ₹1,285–₹1,383 प्रतिदिन | ₹400–₹500 प्रतिदिन |
| नीति का नियंत्रण | Central Govt (CLC-C) | State Govt (Labour Dept) |
| भुगतान पारदर्शिता | Account-based, audited | On-paper compliant, off-paper cash deductions |
| असल स्थिति | वेतन समानता का उदाहरण | औद्योगिक शोषण का केंद्र |
भाग 4: क्या है संभावित समाधान ?
-
Central Sphere Classification लागू किया जाए:
SAIL जैसे PSU में Industrial Category को Central Wage Structure से जोड़ा जाए। -
Third-Party Audit System:
भुगतान प्रक्रिया की हर 3 महीने में स्वतंत्र ऑडिटिंग हो। -
Cash Handling पर पूर्ण रोक:
मजदूर के अकाउंट से किसी तीसरे को निकासी की अनुमति पर कानूनी दंड। -
Whistleblower Protection:
मजदूर को शिकायत करने पर नौकरी से न निकाला जाए, इसके लिए PSU स्तर पर सुरक्षा गारंटी। -
National Uniform Wage Policy for PSUs:
सभी सरकारी उपक्रमों के ठेका कर्मियों के लिए एक समान राष्ट्रीय न्यूनतम औद्योगिक दर।
निष्कर्ष: –
👉यह रिपोर्ट सिर्फ़ वेतन की तुलना नहीं, बल्कि PSU सिस्टम में Industrial Injustice का आईना है।
जहाँ एक माइनिंग कंपनी (Coal India) ने न्यायसंगत औद्योगिक ढांचा बनाया, वहीं SAIL जैसी इंडस्ट्री अपने ही ठेका मजदूरों को राज्य दर पर रखकर न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रही है बल्कि ठेकेदारी भ्रष्टाचार को संरक्षण भी दे रही है।
जब तक इस “On-paper Compliance, Off-paper Loot” मॉडल पर कार्रवाई नहीं होगी —
भारत के श्रमिक केवल फाइलों में Industrial Worker रहेंगे, हकीकत में नहीं।
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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