स्थाई काम, अस्थाई हाथ! SAIL में बढ़ते ठेका प्रथा पर यूनियन का बड़ा सवाल, इस्पात मंत्री को सौंपा मांग पत्र
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में लगातार घटती स्थाई नियुक्तियों और तेजी से बढ़ते ठेका श्रमिकों की संख्या को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने इस मुद्दे पर केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी को पत्र लिखकर गैर-कार्यपालक (Non-Executive) कर्मचारियों की स्थाई बहाली बढ़ाने की ठोस मांग की है।
- यूनियन का कहना है कि स्थाई प्रवृत्ति के कार्यों में ठेका श्रमिकों की बढ़ती तैनाती न केवल श्रम कानूनों की भावना के विपरीत है, बल्कि सुरक्षा, उत्पादन और गुणवत्ता—तीनों के लिए खतरनाक साबित हो रही है।
- आइए विस्तार से जानते है क्या है पूरा मामला👇
पिछले 15 वर्षों का सच: सेवानिवृत्ति तेज, बहाली बेहद धीमी…
👉यूनियन द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, बीते 15 वर्षों में SAIL से कुल 54,200 कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं। इसके मुकाबले स्थाई बहाली बेहद सीमित रही।
👉स्थिति यह है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की तुलना में नई नियुक्तियां 10 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाईं।
👉वर्ष 2010 में SAIL में 94,848 गैर-कार्यपालक कर्मचारी और 15,946 अधिकारी कार्यरत थे। आज तस्वीर बदल चुकी है—स्थाई कर्मचारियों की संख्या घटी है, जबकि ठेका श्रमिकों की संख्या लगातार बढ़ी है।

स्थाई कामों में ठेका श्रमिक: सबसे बड़ा विरोधाभास…

👉यूनियन का आरोप है कि पहले ठेका श्रमिकों की नियुक्ति गैर-स्थाई और गैर-तकनीकी कार्यों तक सीमित थी, लेकिन पिछले दो दशकों से यह स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
👉आज लोकोमोटिव संचालन, क्रेन संचालन, मशीन ऑपरेशन, हाई-वोल्टेज मशीनों का अनुरक्षण जैसे स्थाई प्रवृत्ति के कार्य भी ठेका श्रमिकों से कराए जा रहे हैं।
👉यह न केवल सुरक्षा मानकों के लिए खतरा है, बल्कि प्लांट की दीर्घकालिक कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़े करता है।
SAIL की यूनिट-वार मैनपावर स्थिति (आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर)
| यूनिट | अधिकारी | कर्मचारी | ठेका श्रमिक |
|---|---|---|---|
| बीएसपी | 2,505 | 10,387 | 20,739 |
| डीएसपी | 1,214 | 5,661 | 6,689 |
| आरएसपी | 1,863 | 9,685 | 16,249 |
| बीएसएल | 1,936 | 8,427 | 14,044 |
| आईएसपी | 1,031 | 3,630 | 6,862 |
| एएसपी | 144 | 411 | 1,117 |
| एसएसपी | 171 | 586 | 971 |
| वीआईएसएल | 48 | 183 | 1,227 |
| सीसीएसओ | 10 | 25 | 5 |
| सीएमओ | 480 | 339 | 2,375 |
| आरडीसीआईएस | 145 | 26 | 190 |
| सीईटी | 173 | 10 | 47 |
| एमटीआई | 21 | 20 | 60 |
| कारपोरेट कार्यालय | 226 | 107 | 6 |
| जीडी | 12 | 0 | 541 |
| ईएमडी | 13 | 7 | 3 |
| एसएसओ | 17 | 3 | 0 |
| एसआरयू | 101 | 311 | 1,956 |
| सीएफपी | 60 | 78 | 57 |
| कोलियरीज | 118 | 772 | 1,687 |
| कुल | 10,288 | 40,648 | 75,343 |
नोट: नियमित कर्मियों के आंकड़े 01 दिसंबर 2025 तक और ठेका श्रमिकों के आंकड़े 01 अप्रैल 2025 तक के हैं।
अधिकारी बनाम कर्मचारी: लागत और संतुलन का सवाल?
👉उपरोक्त आँकड़े बयाँ कर रहे है कि विगत 15 वर्षो मे सेल में 54200 कर्मचारी सेवानिवृत हुए है तथा मात्र 5658 अधिकारी ही सेवानिवृत हुए है ।
👉वर्तमान स्थिति यह है कि SAIL में चार कर्मचारियों पर एक अधिकारी का अनुपात बन गया है जबकि एक अधिकारी के औसत वेतन में तीन कर्मचारी कार्य कर सकते है।
👉जमीनी कार्य, उत्पादन की निरंतरता और यहां तक कि ठेका श्रमिकों को मार्गदर्शन देने का काम भी स्थाई कर्मचारी ही कर रहे हैं, जबकि संख्या लगातार घटती जा रही है।
बढ़ते ठेका श्रमिक, बढ़ती दुर्घटनाएं!
👉यूनियन के अनुसार ठेका श्रमिकों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ औद्योगिक दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या में भी वृद्धि देखी गई है। इनमें बड़ी संख्या अप्रशिक्षित या अल्प-प्रशिक्षित ठेका श्रमिकों की होती है।
👉इसके अतिरिक्त, उत्पादन लक्ष्य का समय पर पूरा न होना, मशीनों का गुणवत्तापूर्ण अनुरक्षण न हो पाना और संचालन में तकनीकी खामियां—ये सभी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं।
यूनियन की प्रमुख मांगें क्या हैं?
यूनियन ने इस्पात मंत्री को भेजे पत्र में साफ शब्दों में मांग की है कि—
- सभी स्थाई प्रवृत्ति के पद केवल स्थाई कर्मियों के लिए आरक्षित किए जाएं।
- रिक्त पदों की वास्तविक संख्या के आधार पर नई स्थाई बहाली की जाए।
- ठेका श्रमिकों के शोषण पर रोक लगे और उन्हें पूरा वैधानिक वेतन सुनिश्चित किया जाए।
यूनियन का बयान: “कर्मचारी भारी तनाव में जी रहे हैं”
👉बीएकेएस बोकारो के अध्यक्ष हरिओम ने कहा कि कम मैनपावर और आर्थिक शोषण के कारण SAIL के कर्मचारी भारी मानसिक तनाव में हैं।
👉उनका कहना है कि यदि ठेका श्रमिकों को जोड़ दिया जाए तो कुल मैनपावर लगभग पहले जैसा ही है, लेकिन स्थाई कर्मचारियों की कमी से जिम्मेदारी असंतुलित हो गई है। यह स्थिति न तो कर्मचारियों के हित में है और न ही कंपनी के दीर्घकालिक भविष्य के लिए।
निष्कर्ष
👉SAIL जैसी महारत्न कंपनी में स्थाई कामों के लिए स्थाई नियुक्तियां केवल कर्मचारियों की मांग नहीं, बल्कि सुरक्षा, गुणवत्ता और उत्पादन की अनिवार्य शर्त है।
👉यूनियन द्वारा उठाया गया यह मुद्दा अब नीति-निर्माताओं के पाले में है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस्पात मंत्रालय और Steel Authority of India Limited प्रबंधन इस पर क्या ठोस कदम उठाते हैं?
अगली खबर पढ़े👉 ED (F&A) के साथ BSP वर्कर्स यूनियन की अहम बैठक, CPF, NPS, EPS, C&IT इंसेंटिव सहित कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा
रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

