BONUS की नई परंपरा – “मीटिंग छोड़ो, चिल्लर लो!” जानिए, SAIL कर्मियों के खाते में कितना गिरेगा ‘बोनस रूपी चिल्लर’
– DIGITAL BHILAI NEWS – BHILAI
- SAIL में इस साल BONUS को लेकर न अभी तक कोई मीटिंग बुलाने की बात हुई, न कोई माहौल और न ही मीटिंग होने के आसार दिख रहे है।
- ऐसा प्रतीत होता है कि – सीधा पुराने “जलेबी जैसे” फॉर्मूले के हिसाब से रकम निकाल कर कर्मियों के खाते में डाल दी जाएगी।
- NJCS के बुजुर्ग साहसी नेताओं ने पहले ही 5 साल के लिए जिस फॉर्मूले पर दस्तखत कर दिए थे, उसी के हिसाब से SAIL कर्मी इस बार भी मालामाल होने वाले है, और सभी इस संशय में है कि वे इतनी बड़ी रकम का उपयोग कैसे करेंगे 😢 उन्हें इनकम tax की raid का डर सता रहा है।🤫
- जाने फार्मूला के हिसाब से कितना बनने वाला है इस बार का बोनस 👇🏻
देखे ये ‘जादुई’✨ बोनस फ़ॉर्मूला?
BONUS का यह चमत्कारी आंकड़ा तैयार हुआ इस तरह:
👉🏻तीन साल का औसत Bonus = ₹25,833
👉🏻लेबर प्रोडक्टिविटी और DA में बढ़ोतरी का गुणा-भाग
👉🏻स्पेशल फैक्टर (जिसका नाम सुनकर लगता है कि यह किसी सुपरहीरो की पावर है, लेकिन असर बस चाय-समोसा जितना)😆
👉🏻प्रोडक्शन और PBT पैरामीटर में वेटेज बांटकर, SAIL के 90.5% टारगेट अचीवमेंट को सलाम ठोंका गया।
👉🏻और फिर आया वह मैजिक नंबर: P1 + P2 = ₹29,497

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“प्रोडक्शन में हाथ, तो प्रॉफिट में भी साथ — Bonus फॉर्मूला हो पारदर्शी”
👉🏻SAIL कर्मचारियों का कहना है कि जब अधिकारियों को PRP (Performance Related Pay) का भुगतान सीधी-सरल गणना से किया जाता है, तो कर्मचारियों के लिए Bonus का फ़ॉर्मूला इतना उलझा हुआ क्यों बना दिया गया है?
👉🏻उनकी मांग है कि Bonus फ़ॉर्मूला को इतना जटिल बनाने के बजाय इसे सीधा और पारदर्शी रखा जाए — ताकि उत्पादन में कर्मचारियों की जो हिस्सेदारी है, उसका सीधा लाभ उन्हें “प्रॉफिट-आधारित बोनस” के रूप में मिले।
👉🏻सरल शब्दों में: “प्रोडक्शन में हाथ, तो प्रॉफिट में भी साथ”।
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आइए एक नजर डालते है SAIL के पिछले प्रॉफिट और कर्मियों को मिले बोनस के आंकड़ों पर 👉🏻

इन आंकड़ों से ये स्पष्ट है कि कर्मचारियों को प्रॉफिट में हिस्सा नहीं मिलता, उन्हें बस एक अजीब से फॉर्मूला के तहत अमाउंट थमा दिया जाता है।
वहीं हम दूसरी तरफ देखे तो अधिकारियों को PRP के रूप में PBT का 5% उनके बीच ग्रेड अनुसार बाटा जाता है।। यानी उन्हें प्रॉफिट में हिस्सा मिलता है।
बोनस फार्मूला बदलने पर अड़े एनजेसीएस नेता, चेताया – नहीं मानी मांग तो छोड़ देंगे बैठक
एनजेसीएस के नेता राजेंद्र सिंह ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में लागू किए गए बोनस फार्मूले पर एनजेसीएस नेताओं ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, बल्कि प्रबंधन ने इसे मनमाने ढंग से लागू किया। उन्होंने बताया कि पहले ही प्रबंधन को इस फार्मूले को रद्द कर नया फार्मूला बनाने के लिए कहा जा चुका है। उनका कहना है कि यदि इस बार उनकी मांग नहीं मानी गई तो शांतिपूर्ण तरीके से बैठक नहीं होगी, बल्कि कर्मचारी बैठक छोड़कर बाहर आ जाएंगे। एनजेसीएस ने प्रबंधन से दो दिन की मीटिंग बुलाने की मांग की है, जिसमें पहले दिन नया फार्मूला तय हो और दूसरे दिन उस पर निर्णय लिया जाए।
“कोल यूनियनें बोनस बढ़वाएँ, SAIL नेता हस्ताक्षर की नौटंकी दिखाएँ”
BWU अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता का कटाक्ष – “दम है तो NJCS से इस्तीफ़ा दें”
BWU अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने NJCS नेता के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि साइन करना या न करना कोई बड़ी बात नहीं है, यह कोई राष्ट्रपति पद नहीं है कि इनके हस्ताक्षर से कोई फर्क पड़े। असली सवाल यह है कि मीटिंग का टीए-डीए लिया या नहीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मीठा-मीठा गप-गप और कड़वा-कड़वा थू”। दत्ता ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो ऐलान करें कि NJCS की कोई सुविधा नहीं लेंगे और इस्तीफ़ा दे दें, क्योंकि यह समिति कर्मियों का भला करने में नाकाम है।
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✍🏻 रिपोर्ट : Digital Bhilai News

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

