अमर बलिदानी आदिवासी क्रांतिवीर राघोजी भांगरे की 220वीं जयंती पर कोटि-कोटि नमन | Bhilai Steel Plant ST Employees Welfare Association
– DIGITAL BHILAI NEWS – (अमर बलिदानी आदिवासी क्रांतिवीर Raghoji Bhangre जयंती)
- 8 नवंबर 2025 | भिलाई – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जनजातीय शौर्य का अमिट अध्याय लिखने वाले अमर बलिदानी आदिवासी क्रांतिवीर राघोजी भांगरे (Raghoji Bhangre) की 220वीं जयंती के अवसर पर भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल्ड ट्राइब एम्प्लाईज वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
- देवगांव, महाराष्ट्र में 08 नवंबर 1805 को जन्मे इस क्रांतिकारी ने अत्यंत कम आयु में अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण नीतियों और साहूकारों-जमींदारों के शोषण के विरुद्ध हथियार उठाकर स्वतंत्रता का बिगुल फूंका था।
- इस अवसर पर एसोसिएशन सदस्यों द्वारा फूलमाल्यार्पण, श्रद्घासुमन और विनम्र नमन कर उनके बलिदान को याद किया गया।

कार्यक्रम: भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ संघर्ष-स्मरण
👉इस सम्मान समारोह की अध्यक्षता श्री प्रदीप टोप्पो द्वारा की गई। वहीं महासचिव श्री श्याम सुंदर मुर्मू ने राघोजी भांगरे के जीवन, संघर्ष, परिवार और जनजातीय अस्मिता की लड़ाई पर विस्तार से प्रकाश डाला।
👉श्री श्याम सुन्दर मुर्मू ने कहा — “राघोजी भांगरे केवल एक विद्रोही नहीं, वे जनजातीय समाज के सम्मान, अस्तित्व और राष्ट्रप्रेम के विराट प्रतीक थे।”
👉कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों ने इस महान जननायक की शहादत को याद करते हुए आदिवासी समाज के गौरव और एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।

राघोजी भांगरे: संक्षिप्त जीवन परिचय
👉जन्म — 8 नवंबर 1805, देवगांव (महाराष्ट्र), जनजाति — कोली, पिता — रामजी भांगरे, माता — रमाबाई, बलिदान — 2 मई 1848, ठाणे सेंट्रल जेल….
👉बचपन से ही तेज-तर्रार, निर्भीक और न्यायप्रिय स्वभाव के राघोजी (Raghoji Bhangre) ने बहुत कम उम्र से जन-अस्मिता हेतु संघर्ष शुरू कर दिया था।
विद्रोह की ज्वाला कैसे जली?
👉राघोजी भांगरे के पिता रामजी भांगरे (Raghoji Bhangre) ब्रिटिश पुलिस में जमादार पद पर थे। लेकिन जब उन्होंने देखा कि अंग्रेज सरकार और स्थानीय साहूकार-जमींदार जनजातीय समुदाय को— भूमि से बेदखल कर रहे हैं, कर्ज के नाम पर गुलाम बना रहे हैं, अत्याचार की हदें पार कर रहे हैं…
👉तब उन्होंने सरकारी नौकरी त्याग दी और विद्रोह में शामिल हो गए। उन्हें बाद में काला पानी की सजा दी गई और वहीं उनकी मृत्यु हो गई। पिता की शहादत ने 13 वर्ष से भी कम उम्र के राघोजी के भीतर बदले की ज्वाला प्रज्वलित कर दी।
क्रांति का विस्तार — सह्याद्रि हिल्स से संपूर्ण महाराष्ट्र तक
👉1838 से भांगरे ने संगठित विद्रोह शुरू किया। उन्होंने गुरिल्ला युद्ध-नीति अपनाकर अंग्रेजों और साहूकारों को भारी नुकसान पहुँचाया। वे अपने—भाई “बापूजी भांगरे”, बहन “रुकमिणी खाडे” और साथी → धावला भांगरे, बालू पिचाड, कालू साबले, जावजी बंबले, गोविंदराव खाडे, किसना खाडे, राया ठाकरे जैसे वीरों के साथ लड़ते हुए रतनगढ़ और संगढ़ किलों में मोर्चा संभाले रहे।
रणनीति व उपलब्धियाँ
👉ब्रिटिश फौज पर अचानक हमले, खजाने जब्त कर गरीबों में बाँटना, साहूकारों-जमींदारों के जुल्मों का प्रतिकार, जन-अस्मिता के लिए संगठित संघर्ष – उन्होंने अहमदनगर, पुणे, नासिक, सातारा, पुरंदर तक विद्रोह की लपटें फैलाईं। 1844 में उनके नेतृत्व में अंग्रेजों के एक अफसर सहित 10 सिपाहियों को मार गिराया गया।
उनका विद्रोह — क्यों अनूठा था?
👉सामान्य डकैती या प्रतिशोध से आगे बढ़कर उनके विद्रोह की नींव सामाजिक-आर्थिक न्याय पर आधारित थी। वे कई बार धन लूटते, पर— गरीबों-किसानों में बाँट देते – शोषक संरचना को चुनौती देते वे कहते थे —“दमन के विरुद्ध संघर्ष ही असली धर्म है।”
गद्दारी, गिरफ्तारी और शहादत
👉उनकी बढ़ती शक्ति से भयभीत ब्रिटिश सरकार ने कैप्टन मैकिंटोश को भेजा। गद्दारों की सूचना पर उनका भाई बापूजी भांगरे शहीद हुए। राघोजी गोसावी वेश में छिपते हुए भी संघर्ष करते रहे, लेकिन अंततः पकड़े गए।
👉2 मई 1848 ठाणे सेंट्रल जेल में उन्हें फांसी दे दी गई। उनकी उम्र मात्र 43 वर्ष थी!
इतिहास में स्थान – Jyotiba Phule जैसे महान सुधारकों को प्रेरणा
👉कहा जाता है कि “ज्योतिबा फुले” भी राघोजी भांगरे के संघर्ष से प्रेरित थे। राघोजी भांगरे को महाराष्ट्र का “पहला संगठित आदिवासी क्रांतिकारी” भी कहा जाता है।
जनजातीय अस्मिता और सामाजिक संदेश
👉राघोजी भांगरे का विद्रोह केवल अंग्रेजों के खिलाफ नहीं था। वह— भूमि अधिकार, किसान न्याय, आदिवासी सम्मान, सामाजिक समता की आवाज था। आज भी उनका संघर्ष ग्रामीण-आदिवासी भारत में प्रखर प्रेरणा स्रोत है।
समारोह में उपस्थित
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श्री प्रदीप टोप्पो
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श्री श्याम सुंदर मुर्मू
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श्री ललित कुमार बघेल
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श्री राम सिंह मरकाम
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श्री भिमांशु कच्छप
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श्री ओमनाथ नेताम
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श्री भागवत प्रसाद ध्रुव
निष्कर्ष
👉राघोजी भांगरे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने, उपेक्षित परन्तु अत्यंत प्रभावशाली जननायक थे।
👉उनकी शहादत हमें सिखाती है कि—स्वाभिमान और न्याय की लड़ाई छोटी उम्र, सीमित साधनों या कठिन समय की मोहताज नहीं होती।
👉आज उनकी जयंती पर संकल्प यही— उनके बलिदान को स्मरण रखें, जनजातीय अस्मिता की लौ जलाए रखें, सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई जारी रखें
राघोजी भांगरे अमर रहें! शत-शत नमन!
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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