BSP ST एसोसिएशन द्वारा मनाई गई मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती एक आदिवासी योद्धा की अमर गाथा को किया गया स्मरण

Bhilai Steel Plant Tribal Employees

– DIGITAL BHILAI NEWS – 

  • भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल्ड ट्राइब एम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आज आदिवासी समाज के महानायक मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।
  • इस अवसर पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर आदिवासी समाज के उत्थान में उनके ऐतिहासिक योगदान को स्मरण किया।
  • कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की जीवित चेतना थे।
  • उनका संघर्ष, विचार और नेतृत्व आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
  • एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री प्रदीप टोप्पो ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन आदिवासी कर्मचारियों के बीच एकता, जागरूकता और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं।
  • आइये विस्तार से जानते है इस कार्यक्रम के बारे में 👇

Bhilai Steel Plant


गांव से वैश्विक मंच तक: एक असाधारण जीवन यात्रा

👉मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा का जन्म 3 जनवरी 1903 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के रांची जिले (वर्तमान झारखंड के खूंटी जिले) के टकरा पाहनटोली गांव में एक मुंडा आदिवासी परिवार में हुआ।

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👉उनका बचपन गांव की सादगी और संघर्षों के बीच बीता। प्रारंभिक जीवन में मवेशी चराने वाले इस बालक की प्रतिभा को मिशनरियों ने पहचाना और शिक्षा का अवसर दिलाया।

👉1910 में उन्होंने सेंट पॉल स्कूल, रांची में शिक्षा प्रारंभ की, जहां पढ़ाई के साथ-साथ खेल और नेतृत्व में भी उन्होंने असाधारण प्रदर्शन किया। वर्ष 1918 में वे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी।

Marang Gomke Jaipal Singh Munda Jayanti
Marang Gomke Jaipal Singh Munda Jayanti

ऑक्सफोर्ड से शिक्षा और वैश्विक दृष्टिकोण

👉जयपाल सिंह मुंडा की शिक्षा यात्रा भारतीय गांवों से निकलकर विश्व प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तक पहुंची। उन्होंने कैंटरबरी के सेंट ऑगस्टाइन कॉलेज में अध्ययन के बाद ऑक्सफोर्ड के सेंट जॉन्स कॉलेज से अर्थशास्त्र में ऑनर्स डिग्री प्राप्त की।

👉ऑक्सफोर्ड में रहते हुए वे वाद-विवाद और बौद्धिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उन्होंने इंडियन सिविल सर्विस (ICS) परीक्षा भी उत्तीर्ण की, लेकिन आदिवासी समाज की सेवा को प्राथमिकता देते हुए इस प्रतिष्ठित सेवा को स्वीकार नहीं किया।


खेल के मैदान से इतिहास रचने तक

👉जयपाल सिंह मुंडा भारतीय खेल इतिहास के स्वर्णिम अध्याय का नाम हैं। वे 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे। उनकी कप्तानी में भारत ने फाइनल में हॉलैंड को 3-0 से पराजित कर पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता।

👉यह उपलब्धि न केवल खेल जगत की, बल्कि पूरे देश के आत्मसम्मान की प्रतीक बनी। उन्होंने यह साबित किया कि आदिवासी समाज के युवक भी वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।


संविधान सभा में आदिवासियों की बुलंद आवाज

👉1946 में जयपाल सिंह मुंडा संविधान सभा के सदस्य चुने गए। उन्होंने आदिवासी अधिकारों, भूमि संरक्षण, सांस्कृतिक अस्मिता और स्वशासन के मुद्दों को मजबूती से उठाया। उनकी भूमिका संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूचियों के निर्माण में निर्णायक मानी जाती है।

👉संविधान सभा में उनका ऐतिहासिक वक्तव्य आज भी आदिवासी समाज की पीड़ा और उम्मीदों का दस्तावेज माना जाता है, जिसमें उन्होंने समान अवसर और सम्मानजनक जीवन की मांग को मुखर रूप से रखा।


राजनीतिक संघर्ष और झारखंड आंदोलन

👉आदिवासी समाज की दुर्दशा से व्यथित होकर जयपाल सिंह मुंडा ने राजनीति का मार्ग चुना। उन्होंने आदिवासी महासभा और बाद में झारखंड पार्टी के माध्यम से अलग झारखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।

👉वे चार बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और जीवन भर आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे। हालांकि झारखंड राज्य का गठन उनके जीवनकाल में नहीं हो सका, लेकिन उन्हें इस आंदोलन का पुरोधा माना जाता है।


अमर विरासत और वर्तमान में प्रासंगिकता

👉आज जयपाल सिंह मुंडा की विरासत शिक्षा, खेल, राजनीति और सामाजिक चेतना के रूप में जीवित है। उनके नाम पर स्टेडियम, शैक्षणिक योजनाएं और छात्रवृत्तियां चलाई जा रही हैं। वे आदिवासी समाज के लिए आत्मगौरव का प्रतीक हैं।

👉भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल्ड ट्राइब एम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह जयंती समारोह उनकी स्मृति को नमन करते हुए आदिवासी समाज को एकजुट रखने का संदेश देता है।


कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारी

  • अध्यक्ष – श्री प्रदीप टोप्पो
  • कार्यकारी उपाध्यक्ष – श्री अजय कुमार
  • उपाध्यक्ष द्वितीय – श्री मनोज हेम्ब्ररोम
  • महासचिव – श्री श्याम सुंदर मुर्मू
  • कोषाध्यक्ष – श्री भिमांशु कच्छप
  • जोनल सचिव – श्री किरण बास्की ….साथ ही श्री टीकाराम हेम्ब्ररोम, श्री राधेश्याम सोरी एवं अन्य सदस्यगण उपस्थित रहे।

एसोसिएशन ने एक स्वर में मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को सादर नमन करते हुए कहा —“जय जोहार!”


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

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