INTUC Union Election 2026: महासचिव पद पर वंश बहादुर सिंह की मजबूत दावेदारी, चुनाव से पहले संगठन में सियासी हलचल तेज

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– DIGITAL BHILAI NEWS – 

  • भिलाई स्टील प्लांट की पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन INTUC से संबद्ध स्टील इम्प्लाइज यूनियन भिलाई के चुनाव सत्र 2026–2029 को लेकर संगठन के भीतर हलचल तेज हो गई है।
  • अध्यक्ष पद को लेकर निर्विरोध श्री संजीवा रेड्डी की स्थिति लगभग स्पष्ट मानी जा रही है, लेकिन महासचिव पद पर मुकाबला अब चुनाव का सबसे अहम केंद्र बन चुका है।
  • इस पद पर वंश बहादुर सिंह और संजय कुमार साहू आमने-सामने हैं।
  • चुनाव से पहले संगठनात्मक संतुलन, नेतृत्व क्षमता और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
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क्यों मजबूत मानी जा रही है वंश बहादुर सिंह की दावेदारी

👉यूनियन और संयुक्त ट्रेड यूनियन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, वंश बहादुर सिंह को एक व्यवहार कुशल, शांत स्वभाव और संतुलित नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जाता है।

👉भिलाई स्टील प्लांट के भीतर ही नहीं, बल्कि अन्य ट्रेड यूनियनों और कर्मचारियों के बीच भी उनकी छवि साफ-सुथरी और भरोसेमंद मानी जाती है। यही कारण है कि उन्हें संयुक्त ट्रेड यूनियन का संयोजक भी बनाया गया।

👉पिछले कार्यकाल के दौरान कई ऐसे मौके आए, जब संगठन के भीतर विवाद की स्थिति बन सकती थी। विशेषकर उस दौर में, जब ठेका यूनियन से जुड़े मामलों को भी इंटक महासचिव के स्तर पर देखा जाता था।

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👉इसके बावजूद वंश बहादुर सिंह ने धैर्य और संतुलन बनाए रखते हुए संगठन को बड़े विवादों से दूर रखा। इसी अवधि में भिलाई की अन्य यूनियनों में गहरे आंतरिक मतभेद सामने आए, लेकिन इंटक अपेक्षाकृत स्थिर और संगठित नजर आई।


चुनाव नहीं, सहमति की कोशिश थी प्राथमिकता

👉यूनियन से जुड़े सूत्रों और प्रतिनिधियों का कहना है कि वंश बहादुर सिंह शुरू से ही संगठन के भीतर चुनाव की बजाय आपसी सहमति के पक्षधर रहे हैं।

👉उन्होंने लगातार यह प्रयास किया कि प्रमुख पदों पर सहमति बनाकर संगठन को एकजुट रखा जाए। कई बैठकों और चर्चाओं के दौरान उन्होंने पदाधिकारियों से संवाद कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश भी की।

👉हालांकि, यह प्रयास सफल नहीं हो सका। संगठन से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि एक व्यक्ति की जिद के कारण हालात ऐसे बने कि चुनाव अपरिहार्य हो गया। उनका मानना है कि यदि सभी पक्ष लचीला रुख अपनाते, तो कई पदों पर चुनाव से बचा जा सकता था।


चुनाव प्रक्रिया: कब, कैसे और किन पदों पर

👉चुनाव अधिकारी की निगरानी में चुनाव की पूरी प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है। रविवार को सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान कराया जाएगा। इसके लिए मतपेटियां तैयार कर ली गई हैं और मतपत्रों की छपाई भी पूरी हो चुकी है। मतदान के बाद मतगणना शुरू होगी और संभावना जताई जा रही है कि देर रात या भोर तक सभी परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

👉इस चुनाव सत्र में कुल 61 पदों के लिए चुनाव हो रहा है। इनमें अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, अतिरिक्त महासचिव, कोषाध्यक्ष, सहायक कोषाध्यक्ष, उप महासचिव, वरिष्ठ सचिव और सचिव जैसे प्रमुख पद शामिल हैं।


निर्विरोध पद और संगठनात्मक संदेश

👉चुनाव से पहले ही यूनियन के 216 यूनियन प्रतिनिधि (UR) और 86 कार्यकारिणी सदस्य (WCM) निर्विरोध चुने जा चुके हैं।

👉किसी भी पद पर एक से अधिक नामांकन न आने के कारण यह प्रक्रिया बिना मतदान के शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि यह संगठन के भीतर भरोसे और एकजुटता का संकेत है।

👉इसके अलावा, कोषाध्यक्ष पद पर विजय कुमार विश्वकर्मा का निर्विरोध चुना जाना भी इस बात का संकेत माना जा रहा है कि हर स्तर पर टकराव नहीं है और कुछ पदों पर सहमति बनी हुई है।


रिटायरमेंट फैक्टर और भविष्य की रणनीति

👉इस चुनाव में एक और अहम पहलू रिटायरमेंट फैक्टर का है। यूनियन का कार्यकाल तीन वर्षों का है, जबकि कई दावेदारों के पास सेवा अवधि कम बची हुई है। ऐसे में संगठन के भीतर यह चर्चा भी रही कि प्रमुख पदों पर ऐसे लोग हों, जिनका कार्यकाल पूरा हो सके।

👉इस संदर्भ में यह तथ्य भी सामने आता है कि वंश बहादुर सिंह का रिटायरमेंट वर्ष 2030 बताया जा रहा है।


चुनाव के बाद भी एकजुटता का दावा

👉दिलचस्प बात यह है कि मुकाबला जितना कड़ा है, उतनी ही जोर-शोर से प्रत्याशी एकजुटता की बात भी कर रहे हैं। कई उम्मीदवारों का कहना है कि चुनाव एक प्रक्रिया है और परिणाम चाहे जो भी हो, इसके बाद सभी को एकजुट होकर कर्मचारियों के हितों के लिए काम करना होगा। मान्यता प्राप्त यूनियन के आगामी चुनाव को देखते हुए यह एकजुटता संगठन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।


निष्कर्ष: अनुभव बनाम टकराव की राजनीति

👉कुल मिलाकर, इंटक यूनियन चुनाव केवल पदों का नहीं, बल्कि नेतृत्व की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन गया है। महासचिव पद पर वंश बहादुर सिंह की दावेदारी इसलिए मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वे संगठन को संतुलन, संवाद और विवाद-मुक्त नेतृत्व देने की क्षमता रखते हैं।

👉वहीं, चुनावी टकराव ने यह भी साफ कर दिया है कि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी तरह सक्रिय है। अब रविवार का मतदान तय करेगा कि इंटक यूनियन की कमान अगले तीन वर्षों तक किसके हाथ में होगी।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़ 

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